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चर्चा में

April, 13

बाबासाहेब डॉ. बीआर अम्बेडकर की बराबरी की सोच को आगे बढ़ायेंगे

कांग्रेस पार्टी की भारत के लिये सोच उन पीछे ले जाने वाले मानदंडों को खत्म करने की है जिसने सदियों से हमारे लोगों को कुचला है और यहां न्यायसंगत और समानता वाले समाज को स्थापित करने की है।

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March, 14

भाजपा का मंत्र - यदि चुनाव नहीं जीत सको तो सत्ता के लिये पैसों का इस्तेमाल करो

चुनावी जनादेश क्या निर्धारित करता है? यह लोगों का मत है। चुनाव बूथ में सभी भारतीय एक समान हैं। वहां हम सभी की आवाज एक ही है। वहां हम सभी के पास एक तरह की ताकत है। 

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March, 2

झूठे वादे करते पकड़े गये तो अब मोदी जी फर्जी जीडीपी आंकड़े गिना रहे

सरकारी आंकड़े पवित्र होते हैं या कहें कि कम से कम 2014 से पहले तक तो ऐसा ही था। केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के साथ ही हालात बदल गये। शुरुआत से ही मोदी सरकार ने आंकड़ों की बाजीगरी ये दिखाने के लिये करनी शुरु कर दी कि भारत का जीडीपी दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे तेजी से बढ़ता हुआ है।

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February, 28

राष्ट्रवादी कौन है - फासीवादी सरकार से लड़ रहे छात्र या भाजपा जो आईएसआई के जासूसों को पालती है?

सच्चा राष्ट्रवादी कौन है? क्या वो है जो शांतिपूर्ण ढंग से अपने लोगों की आवाज को कुचलने की कोशिश करने वाली अन्यायी सरकार का विरोध कर रहा है या वो लोग जो गाली दे रहे हैं, मार-पीट कर रहे हैं, धमकी दे रहे हैं और भय का माहौल बना रहे हैं



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February, 20

मोदी जी ने नोटबंदी क्यों थोपी: डूबे कर्ज में डूबे बैंक अब प्रधानमंत्री के दोस्तों को कर्ज नहीं दे पा रहे थे

8 नवम्बर, 2016 के बाद से मोदी जी अपने उत्पाद के मैनुफैक्चरिंग डिफेक्ट को छुपाने की कोशिश में लगे हताश सेल्समैन की तरह, दिखे और नोटबंदी के फैसले के पीछे कई सारे कारण गिना डाले। कालेधन से लेकर आंतकवाद, जाली मुद्रा और कैशलेस अर्थव्यवस्था जैसे विभिन्न आकार प्रकार के जुमले उन्होंने जनता के सामने परोस दिये। जबकि असली कहानी तो कुछ और ही थी।

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February, 16

नोटबंदी की भूल के 100 दिन - एटीएम में अभी भी नोट नहीं और पाकिस्तान से बढ़िया क्वालिटी वाले नकली नोटों की सप्लाई तेज

नोटबंदी के बाद भारत 100 दिन झेल चुका और लोगों को यह उम्मीद है कि जाली नोट अब कभी भी अपना मुंह नहीं उठा पायेंगे और जैसा कि मोदी जी ने वादा किया था पाकिस्तान को हमेशा के लिये खामोश कर दिया जायेगा। हम चाहते हैं कि ये सच होता। लेकिन दुर्भाग्य से ये एक और जुमला निकला, ऐसा जुमला जिसको खुद प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी नाकामी और अदूरदर्शिता को छुपाने के लिये तैयार किया था। 

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February, 15

प्रधानमंत्री बारहमासी चुनावी मोड में, गृहमंत्री प्रचार में व्यस्त और रक्षा मंत्री नींद के आगोश में हैं

भाजपा को 2014 में सत्ता हथियाने में खोखले राष्ट्रवाद की जुमलेबाजी से भी काफी मदद मिली। उनके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के हाथों में सुरक्षित नहीं है। जाहिर है उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह जी की विनम्रता को उनकी कमजोरी समझ लिया। फिर भी, आंकड़ों से भी साफ पता चलता है कि यूपीए सरकार के समय आतंकी हमलों और मौतों में काफी कमी आयी थी। 

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February, 13

नाकाम नोटबंदी: नकली नोटों ने देश में अपनी राह तलाशी

8 नवंबर, 2016 का दिन बदनामी लेकर आया। इस दिन भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने घमंड में चूर होकर अदूरदर्शिता से बिना किसी से सलाह विचार किये पल भर में ही चलन में रही मुद्रा का 86 प्रतिशत बंद करने का फैसला किया। इससे पूरे देश में अफरा-तफरी मच गयी। नोटबंदी पर लगातार बदलते नियम-कानूनों से भ्रम फैल गया।

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February, 10

मोदी ने लोकतंत्र के मंदिर को अपवित्र किया

संसद के प्रति प्रधानमंत्री के दिल में कोई सम्मान नहीं है। श्री नरेन्द्र मोदी ने पदभार ग्रहण करते समय संसद के सामने सारा दिखावा, शो-बाजी करने के बाद दोनो सदनों, इनके सदस्यों और तो और भारत के लोगों का अपमान किया है। हर मौजूदा सदस्य का अपमान उन सारे लोगों का अपमान है जिसका प्रतिनिधित्व वो सदस्य करता है। लेकिन, मोदी जी को इसकी कोई परवाह नहीं है। वो किसी की नहीं सुनते और उनको किसी की चिंता ही नहीं है।

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February, 3

मोदी सरकार के बजट की खासियत - भारत को नोटबंदी जैसी बर्बादी की एक और सौगात

केन्द्र सरकार का यह चौथा बजट श्री अरुण जेटली ने पेश किया है और हमें अभी भी उनके भारी-भरकम सुधारों का इंतजार है। इस बजट की सबसे बड़ी खासियत ये रही कि नोटबंदी की भारी नाकामी के बाजवजूद सरकार अपना सीना ठोक रही है और इसने नोटबंदी जैसी बर्बादी के अलावा और कुछ भी नहीं किया। 

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January, 23

भाजपा ने अपने प्रचार के लिये रेल सुरक्षा से समझौता किया

शब्द! शब्दों का मोल क्या है? ये प्रेरित कर सकते हैं, ये शांत करा सकते हैं, ये लुभा सकते हैं, ये गुस्सा दिला सकते हैं। फिर भी, केवल शब्द सब कुछ नहीं होते। इनके साथ ठोस काम भी होना चाहिए। अच्छी और स्पष्ट नीतियों और बेहतर प्रबंधन से इनको सार्थक बनाना चाहिए। भाजपा सरकार की दुःखद वास्तविकता यह है कि अच्छी और स्पष्ट नीतियों तथा बेहतर प्रबंधन की बजाय केवल शब्दों पर ध्यान देती है। 

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January, 17

मोदी जी की कृपा से भारत अब तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था नहीं रहा

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने घमंड में चूर हो कर भारत के आर्थिक विकास को पटरी से उतारने में पूरी तरह सफल हुए इस काम को हमारे दुश्मन 1947 के बाद से आज तक नहीं कर पाये थे। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा ताजा अनुमानों के मुताबिक मोदी जी के नोटबंदी के फैसले के कारण भारत की जीडीपी विकास दर का पूर्वानुमान 7.6 प्रतिशत से गिरकर 6.6 प्रतिशत रह गया है। 

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