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चर्चा में

12/5/2015 12:00:00 AM

इंटक के 31वें पूर्ण अधिवेशन में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का भाषण

इंटक के 31वें पूर्ण अधिवेशन को संबोधित करने हेतु मुझे आमंत्रित करने के लिए मैं इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. जी. संजीवा रेड्डी का बहुत आभारी हूं। 

इंटक 1947 में अस्तित्व में आया था और इसे महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरु, सरदार वल्लभ भाई पटेल और कांग्रेस पार्टी के अन्य प्रमुख नेताओं का आशीर्वाद का अवसर मिला है। और अपनी स्थापना के बाद से इंटक श्रमिक वर्ग की समर्पित भाव से सेवा की है ताकि श्रमिक वर्ग को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के विकास का फायदा निष्पक्ष और न्यायोचित ढंग से मिल सके। यह काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है इसलिये इंटक, जिसके आज लगभग 3.30 करोड़ सदस्य होने का अनुमान है, के सामने लंबा और दुरुह कार्य है। 

कांग्रेस पार्टी का हमेशा से ये मानना है कि ट्रेड यूनियन आंदोलन सामाजिक लोकतंत्र का एक अभिन्न हिस्सा है और सामूहिक सौदेबाजी को दिये जाने वाले हर प्रोत्साहन में ट्रेड यूनियन आंदोलन में प्रतिनिधित्व करने वाले उद्योगपतियों और कार्यकर्ताओं के बीच विकास के फल में श्रमिकों का उचित और न्यायोचित हिस्सा सुरक्षित करने के लिये प्रदान किया जाना चाहिए। ट्रेड यूनियन आंदोलन की भूमिका तेजी से बदलती सामाजिक और आर्थिक स्थितियों और इन स्थितियों से निपटने में सरकार के दृष्टिकोण को देख कर तय होनी चाहिए। यह महत्वपूर्ण है कि इंटक को श्रमिक वर्ग की भलाई के लिए वर्तमान एनडीए सरकार की आर्थिक और सामाजिक नीतियों और उनके प्रभाव का उद्देश्यपरक मूल्यांकन करना चाहिए।

यह कहना जरुरी नहीं है कि हमारे देश के सामने अभी भी एक प्रमुख कार्य गरीबी को मिटाने का है जो बड़े पैमाने पर हमारे लोगों को प्रभावित करती है। इसके लिये आर्थिक विकास की उच्च दर और रोजगार के अवसरों में तेजी से वृद्धि की आवश्यकता है। भारत की अर्थव्यवस्था इस बारे में देश में व्यापक ढंग से आम सहमति है कि भारत की अर्थव्यवस्था को सालाना लगभग 8 प्रतिशत की दर से वृद्धि करना चाहिए और विकास प्रक्रिया की सामग्री ऐसी होनी चाहिए कि हम हर साल 1-1.2 करोड़ व्यक्तियों के लिए उत्पादक नये रोजगार के अवसर प्रदान करने में सक्षम हों। यह भी जरुरी है कि विकास प्रक्रिया समावेशी और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ हो ताकि वितरणात्मक न्याय के साथ-साथ टिकाऊ पर्यावरण प्रोफाइल सुनिश्चित हो सके।

विकास प्रक्रिया समावेशी के साथ ही पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ हो इसे सुनिश्चित करने में ट्रेड यूनियन आंदोलन बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इंटक का प्रस्तावित एजेंडा जैसे रोजगार सृजन, श्रम मानकों और काम के अधिकारों का सम्मान, सभी के लिये सामाजिक सुरक्षा और प्रभावी सामाजिक संवाद इन तीनों अनिवार्यताओं के लिये कारगर साबित होगा। यह दूरदर्शी एजेंडा युवा कामगारों को उत्पादक रोजगार के अवसर प्रदान करने पर केंद्रित है, जो शून्य लैंगिक भेदभाव सुनिश्चित करता है और स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, संघ की स्वतंत्रता की गारंटी और सामूहिक सौदेबाजी पर ध्यान केंद्रित कर सामाजिक सुरक्षा की सीमाओं का विस्तार करता है।

ट्रेड यूनियन आंदोलन को इस बात के प्रति सजग रहना होगा कि मौजूदा भारतीय अर्थव्यवस्था नाजुक हालत में है और इसे रोजगार के अवसरों के अपर्याप्त विस्तार का सामना करना पड़ रहा है। सार्वजनिक उद्यमों को अनिश्चित भविष्य का सामना करना पड़ रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम जैसे हर रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम को बजट आवंटन में कटौती का सामना करना पड़ रहा है। संरचनात्मक श्रम सुधारों के नाम पर ठेका मजदूरी और रखो-निकालो नीति के पक्ष में सुरक्षित औद्योगिक रोजगार के लिए गुंजाइश कम करने की कोशिशें की जा रही हैं। यह आम तौर पर सभी मानते हैं कि वर्ष 2022 तक हमें कम से कम 50 करोड़ कुशल कामगारों की जरुरत होगी। जबकि असल जमीनी हकीकत की रफ्तार इस लक्ष्य का अंश मात्र भी नहीं है। 

2 सितम्बर, 2015 को देश में मनायी गयी एक दिनी आम हड़ताल ने स्पष्ट कर दिया कि एनडीए सरकार की मजदूर विरोधी और अदूरदर्शी आर्थिक नीतियों से श्रमिकों में भारी असंतोष है।

हालांकि, औद्योगिक अशांति, हड़ताल और तालाबंदी विवादों को हल करने का सबसे अच्छा साधन नहीं है। हमें त्रिपक्षीय प्रक्रिया के सभी हितधारकों अर्थात् श्रमिकों, उद्योग और सरकार को शामिल करके शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए औद्योगिक समस्याओं के समाधान के लिए उपलब्ध साधनों को बढ़ाना चाहिए।

मैं अपनी बात इस पर जोर देते हुए समाप्त करना चाहूंगा कि इंटक को औद्योगिक संबंधों के प्रबंधन में अपनी ऐतिहासिक भूमिका निभानी है, उसे कृषि श्रमिकों और निर्माण श्रमिकों के तौर पर असंगठित क्षेत्रों के अधिक से श्रमिकों को शामिल करने के लिए अपनी पहुंच का विस्तार करना चाहिए और विभिन्न जगहों पर काम करने वाली महिला कामगारों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इंटक को श्रमिकों की शिक्षा और कौशल विकास से संबंधित कार्यक्रमों में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।

इन्हीं शब्दों के साथ मैं इंटक के इस 31वें पूर्ण अधिवेशन को संबोधित करने के लिए मुझे आमंत्रित करने हेतु एक बार फिर डॉ. सजीव रेड्डी को धन्यवाद देता हूं और अपनी वाणी को विराम देता हूं। 

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