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चर्चा में

2/28/2017 12:00:00 AM

राष्ट्रवादी कौन है - फासीवादी सरकार से लड़ रहे छात्र या भाजपा जो आईएसआई के जासूसों को पालती है?



सच्चा राष्ट्रवादी कौन है? क्या वो है जो शांतिपूर्ण ढंग से अपने लोगों की आवाज को कुचलने की कोशिश करने वाली अन्यायी सरकार का विरोध कर रहा है या वो लोग जो गाली दे रहे हैं, मार-पीट कर रहे हैं, धमकी दे रहे हैं और भय का माहौल बना रहे हैं? वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने कहा कि देश के विश्वविद्यालयों में अशांति का गठबंधन हो गया है। लेकिन, सवाल उठता है कि वे क्या अशांति फैला रहे हैं? क्या वो सरकार है या जनता? जवाब है नहीं। ये लोग फासीवादी सिद्धांतों का विरोध कर रहे हैं जो मौजूदा सरकार के कामकाज में गहरे तक पैठ कर गयी है।
 
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के फर्जी रणबांकुरों द्वारा हिंसा का औचित्य साबित करने के लिए भाजपा नेतृत्व आगे आकर यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि वे उनके खिलाफ हैं जो भारत को अलग करने की मांग कर रहे हैं। उनके लिये यह समझना जरुरी है कि कोई भी भारत को तोड़ने वालों के साथ नहीं खड़ा है। और ये तय करना न्यायालय का काम है कि संविधान द्वारा दिये गये बोलने की आजादी के अधिकार का उल्लंघन किया गया है कि नहीं। हमारी अदालतों ने कहीं भी हमें अपने ही साथी नागरिकों के साथ हिंसात्मक रवैया अपनाने की अनुमति नहीं दी है। इस सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय जनता पार्टी के हिंसक तत्व सुसंगत बहस करने के काबिल नहीं हैं। 

इससे भी ज्यादा चिंता की बात पुलिस की निष्क्रियता है। हिंसा इसलिए हो पायी क्योंकि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्रों को पता था कि दिल्ली पुलिस मूकदर्शक की तरह देखती रहेगी, कुछ करेगी नहीं। यही कारण है जिससे इन लोगों का हिंसा करने और लोगों को डराने का हौसला बढ़ा। 

यदि आप पिछले 33 महीनों पर नजर डालें तो आप देखेंगे कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सभी ऐसे छात्रों पर हमला किया है जिन लोगों ने इस सरकार के अन्याय के खिलाफ बोलने की हिम्मत की। यह भाजपा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की कुछ साबित करने की चिंता को भी जाहिर करता है। अर्थव्यवस्था के हालात गंभीर हैं। दलितों पर हमला किया जा रहा है। हमारे युवाओं के लिए कोई नौकरी नहीं है। एक तरफ हमारे बहादुर जवान अपना बलिदान दे रहे हैं और दूसरी तरफ मोदी सरकार पाकिस्तानी आईएसआई को पठानकोट आने का न्यौता दे रही है। अब लोगों को यह तय करना है कि कौन देश के खिलाफ काम कर रहा है, चुनावों में वोट पाने के लिये झूठे वादे करने वाला व्यक्ति या फिर भारतीय छात्र जिसे सोचने पर मजबूर किया जा रहा है।

जब एबीवीपी साधारण सा तर्क देने में भी नाकाम हो जाती है तो वो लोगों को सीधे ‘देशद्रोही’ ठहरा देती है। फिर भी असली देशद्रोही कौन हैं? भाजपा शासित मध्य प्रदेश से आयी खबरें इस बात का खुलासा करती हैं कि भाजपा आईटी सेल के सदस्य कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम कर रहे हैं। और भाजपा खुद को सबसे बड़ा राष्ट्रवादी साबित करने के लिये पूरी जान लगाये हुए है और उसके सदस्य हमारे सबसे बड़े दुश्मन के हाथों देश को बेच देने पर उतारु हैं। ये भाजपा का असली चेहरा है। 

 
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