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चर्चा में

5/10/2017 12:00:00 AM

भारतीय जंगलराज पार्टी


56 इंच ऐसा जुमला है जिसका इस्तेमाल भाजपा के प्रचारकों की फौज द्वारा अक्सर भारत के प्रधानमंत्री के संबंध में किया जाता है। यह ऐसा शब्द है जो आदमी की ताकत को बताता है। फिर भी, बीते 3 साल में जो कुछ हुआ उससे तो ये पता चलता है कि अगर उनकी छाती 56 इंच की थी, तो उसमें सैंकड़ों मांसपेशियों की बजाय ज्यादातर हवा भरी हुई थी। प्रत्येक युद्ध विराम के उल्लंघन, हमारे जवान की हर शहादत, निर्दोष नागरिकों की हर मौत ने इस छाती की हवा निकाल दी है।

जब से उन्होंने कुर्सी संभाली है तब से जम्मू-कश्मीर में 1300 से अधिक बार युद्ध विराम के उल्लंघन और 170 से अधिक अलग-अलग आतंकवादी हमलों की घटनाएं हुई हैं। प्रधानमंत्री के पास विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त करने का तो समय है, लेकिन जब राष्ट्रीय सुरक्षा की बात आती है तो वे आश्चर्यजनक ढंग से चुप्पी साध जाते हैं। जबसे श्री मनोहर पर्रिकर ने गोवा में सरकार बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय छोड़ने का फैसला किया तब से भारत में पूर्णकालिक रक्षा मंत्री तक नहीं है। राष्ट्रीय सुरक्षा पूर्णकालिक चिंता का विषय है और इसे अंशकालिक आधार पर कतई नहीं चलाया जा सकता है।

अगर हम गुजरात से अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर पर गौर करें तो गुंडा राज पूरे देश में फैल चुका है। भाजपा को अब भारतीय जंगलराज पार्टी के तौर पर जानना चाहिए। पूरे देश में असंतोष का कारण यह है कि भाजपा हमारे अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का पालन करने और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने नहीं दे रही है। चाहे वो डेल्टा मेघवाल के दुखद बलात्कार और मृत्यु का मामला हो या आंध्र प्रदेश में दलितों पर हमले का हो, भाजपा ने यह सुनिश्चित किया है कि कहीं कोई जांच न हो। राजस्थान के भाजपा नेताओं ने थाने में पुलिस पर हमला किया उनको इसका भरोसा था कि वे असानी से बच निकलेंगे।

जहां कहीं भी भाजपा पर शांति और सुरक्षा मुहैया कराने और पुलिस पर नियंत्रण की जिम्मेदारी है, यही कहानी पूरे देश में चल रही है।

 
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