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5/31/2017 12:00:00 AM

विदेश नीति के मोर्चे पर पीएम मोदी की 56 इंची नाकामी



56 इंच ऐसी संख्या है जो प्रधान मंत्री को बेहद पसंद है। अपनी 56 इंची छाती का नाप बताते हुए प्रधानमंत्री पद के तत्कालीन उम्मीदवार श्री नरेन्द्र मोदी को ये उम्मीद थी कि ये जुमला भारतीय मतदाताओं को उनकी ताकत का संदेश देगा। अपने चुनाव प्रचार के दौरान और उसके बाद भी मोदी जी ने खोखली बयानबाजी और झूठा राष्ट्रवाद अपने भाषणों में जारी रखा, जिसके पीछे वो इस सच्चाई को छुपाने में कामयाब हो गये कि वो भारत के अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध के लिये सुसंगत नीति बनाने में नाकाम रहे।

जब से मोदी सरकार सत्ता में आयी है तब से भारत में 170 से अधिक आतंकवादी हमले हो चुके हैं। विपक्ष में रहते हुए मोदी जी ने कहा था ‘‘चीन की घुसपैठ से लेकर पाकिस्तान के आतंकी हमलों तक - यूपीए सरकार भारत की सीमाओं की रक्षा करने में नाकाम रही है। केंद्र सरकार कब जागेगी?’’ यह एक ऐसा सवाल है, जिसे शायद पूर्ववर्ती सरकारों की बजाय मौजूदा भाजपा सरकार से पूछा जाना चाहिए। जैसा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा में अपने भाषण में सरकार को याद दिलाया, यूपीए सरकार ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के सक्षम नेतृत्व में कश्मीर में शांति स्थापित की, रोजगार पैदा किया, उन्हें मुख्य धारा में लेकर आये और पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने में कामयाब रहे।

यूपीए के अच्छे कामों को आगे बढ़ाने की बजाय पीएम मोदी जी के झूठे राष्ट्रवाद और अवसरवादी राजनीति से कश्मीर में सब गड़बड़ हो गया है। आज, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों द्वारा 6 महीने में 3 बार हमारे जवानों का सिर काट लिया जाता है और कश्मीर में आईएसआईएस और पाकिस्तान के झंडे खुलेआम लहराये जा रहे हैं। लगभग 1400 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन हुआ है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? भाजपा निश्चत तौर पर नरेंद्र मोदी के अलावा किसे दोषी ठहरायेगी जिनकी नाक के नीचे ये सब कुछ हो रहा है?

अपनी खोखली बयानबाजियों के चलते प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्ववर्ती सरकारों के अच्छे कामों को नष्ट कर दिया। उनके पूर्ववर्तियों के अच्छे प्रयासों के प्रति उनके अनादर से स्पष्ट है कि वह भारत की विदेश नीति को सुलझाने में असफल हैं। उन्होंने नेपाल को चीन की गोद में डाल दिया। 70 साल से भारत के दोस्त रूस ने पाकिस्तान पर अपना हथियार प्रतिबंध हटा लिया और चीन पाकिस्तान के साथ मिलकर तेजी से आगे बढ़ रहा है। पाकिस्तान को अलग-थलग करने की बजाय, प्रधान मंत्री मोदी ने एशिया में भारत को अलग-थलग कर दिया है।

भारत एक अभिमानी राष्ट्र रहा है। आजादी हासिल करने के बाद से भारत ने स्वतंत्र एजेंडा और पहचान स्थापित करने का प्रयास किया है। भारत की बेहतरी के लिये काम करने में पं. नेहरु से लेकर डॉ. मनमोहन सिंह तक हमारे भूतपूर्व प्रधान मंत्रियों की कुशल कूटनीति जरुरी थी। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की जगह बनाये रखने का प्रयास किया और फोटो खिंचवाने के लिए कूटनीति को कम करने से इनकार कर दिया।

 
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