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8/7/2017 12:00:00 AM

भाजपा की ‘‘बेटा बचाओ, बलात्कार बढ़ाओ’’ योजना?



पीछा करना, उत्पीड़न, अपहरण, छेड़छाड़, बलात्कार, इन सबका आकर्षण के साथ कोई लेना-देना नहीं है और सत्ता के साथ इसका हर तरह का संबंध है। और अगर आपके पिता सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी में बड़े ओहदेदार हों तो फिर ये तय है कि पुलिस आपके खिलाफ लगे आरोपों को कमजोर कर देगी और आपको आसानी से जमानत मिल जायेगी ताकि आप अपना समय काट सकें और आपके खिलाफ हो रहा दुष्प्रचार धीरे-धीरे खत्म हो जाये।

यह भाजपा की बिगड़ी औलाद विकास बराला की कहानी है, जो हरियाणा भाजपा प्रमुख सुभाष बराला के पुत्र हैं। 4 अगस्त को आधी रात उन्होंने आधे घंटे तक एक 29 साल की युवती का सात किलोमीटर की दूरी तक पीछा किया और उनका अपहरण करने का प्रयास किया।

संघ शासित प्रदेश का हिस्सा होने के नाते चंडीगढ़ पुलिस सीधे गृह मंत्रालय के अधीन आती है। इस मामले में बरती गयी लापरवाही से साफ है कि भाजपा सरकार आरोपी को बचाने की हर जुगत लगा रही है। पीड़िता द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में बराला के खिलाफ साफ तौर पर उत्पीड़न, अपहरण का प्रयास करने और उसकी इज़्जत से खिलवाड़ करने की शिकायत के बावजूद पुलिस ने आरोपियों के साथ साठ-गांठ करके गैर जमानती आईपीसी की धारा 341 (गलत तरीके से रोकना), 365 (किसी व्यक्ति का गुप्त तरीके से अपहरण का इरादा रखना या गैरकानूनी तरीके से कैद करना) 354 (महिला की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग) और 511 (ऐसा अपराध कारित किये जाने का प्रयास जिसमें आजीवन कारावास या अन्य कारावास के दंड का प्रावधान है) को हटा दिया। उन्होंने जमानत पर छोड़ने से पहले जानबूझ कर भारतीय दंड संहिता की धारा 354डी (महिला का पीछा कराना) और 185 (शराब पीकर गाड़ी चलाना) को भी कमजोर कर दिया। चिंता की बात है कि छह सीसीटीवी कैमरों से कोई फुटेज उपलब्ध नहीं है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हरियाणा भाजपा अध्यक्ष के बचाव में तुरंत सामने आये, यहां तक कि सुभाष बराला का परिवार सोशल मीडिया पर पीड़िता के चरित्र हनन और उसकी गुमनामी को लेकर तमाम आरोपों के साथ टूट पड़ा। चंडीगढ़ भाजपा उपाध्यक्ष रामवीर भट्टी ने तो पार्टी की मध्ययुगीन और महिलाओं से नफरत वाली सोच उजागर करते हुए सवाल पूछा कि पीड़िता के माता-पिता ने आधी रात उसे बाहर घूमने-फिरने कैसे दिया।

अपनी तरफ से वह बहादुर महिला किसी भी कीमत पर विकास बराला को छोड़ने के लिये तैयार नहीं है। एक आईएएस अधिकारी की बेटी के रूप में वह अपनी जैसी दूसरी तमाम महिलाओं की ओर से भाजपा के इन रसूखदारों को जवाबदेह बनाने की अपनी जिम्मेदारी को स्वीकार करती है, जो उनकी राजनीतिक ढाल को चुनौती देने या तोड़ने की हिम्मत नहीं कर सकते। चुप्पी से दुर्व्यवहार सिर उठाता है। उसकी आवाज में करोड़ों देशवासियों और कांग्रेस के लोगों की आवाज़ शामिल है और भाजपा के बेटा बचाओं, बलात्कार बढ़ाओ’’ तथा आपसी मिलीभगत करके महिलाओं के खिलाफ हिंसा की संस्कृति को चूर-चूर कर देगी।

 
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