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10/12/2017 12:00:00 AM

जय अमित शाह : काल्पनिक ‘निजी किरदार’



नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के खिलाफ सबसे ताजा और घातक आरोप लगाते हुए हाल ही में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे की कंपनी को मिली संदिग्ध वित्तीय मदद का पर्दाफाश किया गया है। इसकी तपिश भाजपा के वैचारिक आका आरएसएस तक भी पहुंची और वो भी इस मामले को गंभीरता से लेने पर मजबूर हो गया। आरोपों को सिरे से खारिज करने की बजाय संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि ‘‘अगर किसी के भी खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं तो इसकी जांच होनी चाहिए। लेकिन गलत काम के प्रथम दृष्टया सबूत होने चाहिए।’’

पूरा मामला उजागर होने के बाद सरकार और तथाकथित ‘निजी किरदार’ जय अमित शाह के बीच संदिग्ध मिलीभगत के संबंध में ढेरों सवाल खड़े हो रहे हैं। द वायर की आगे की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि पिछले रविवार को इस खोजी खबर के जारी होने के पहले ही केंद्रीय कानून मंत्रालय ने अतिरिक्त महान्यायाधिवक्ता तुषार मेहता को जय शाह का मुकदमा लड़ने की अनुमति दे दी थी। इस खबर के जारी होने से दो दिन पहले 6 अक्टूबर को दी गई अनुमति से पता चलता है कि मंत्रालय को पहले से ही पता चल गया था कि ऐसी कोई खबर जल्द ही आने वाली है। इसके अलावा अग्रिम अनुमति दिये जाने का कोई और कारण नहीं हो सकता। इसका मतलब यह भी है कि सरकार को शाह की कंपनी के खिलाफ लगे आरोपों का पता था और वो शायद चुपचाप इंतजार कर रही थी।

केवल इतना ही नहीं है, केंद्रीय मंत्रालय और ‘निजी किरदार’ के बीच मिलीभगत कानून मंत्रालय के खुद के नियमों के खिलाफ है। इसके अलावा ढेरों ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब मिलने बाकी हैं। इस घपलेबाजी के खुलासे और सोशल मीडिया पर मचे बवाल के बाद सकते में आयी भाजपा ने रेलमंत्री पियूष गोयल को सामने करके जय अमित शाह की ओर से और सरकार की ओर से भी एक साथ प्रतिक्रिया व्यक्त की। आखिर सरकार के कैबिनेट मंत्री ‘निजी किरदार’ का बचाव क्यों कर रहे थे? पीयूष गोयल जब नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे तब भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (आईआरईडीए) ने जय शाह की कंपनी को 10.35 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। क्या यह हितों का टकराव नहीं है?

उपरोक्त को देखते हुए ये कहा जा सकता है कि ‘निजी व्यक्ति’ और सरकार के बीच अंतर ही खत्म हो गया है। यह सत्ता के मद में चूर घनिष्ठ पूंजीवाद है। इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात तो देश के चौकीदार की चुप्पी है जो अभी तक इस पूरे मामले पर कुछ भी नहीं बोले और सिर्फ दूसरे मामलों पर पुरानी और घिसीपिटी बयानबाजी ही कर रहे हैं।

 
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