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10/12/2017 12:00:00 AM

वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत 100वें स्थान पर फिसला



अपनी वार्षिक रिपोर्ट में वैश्विक भुखमरी सूचकांक (जीएचआई) ने बताया है कि
119 देशों में भारत का स्थान ऐतिहासिक रूप से कमजोर होकर 100वें स्थान पर पहुंच गया है। 31.4 स्कोर के साथ भारत का साल 2017 का ग्लोबल हंगर इंडेक्स अंक ऊंचाई की तरफ और गंभीर श्रेणी में है। यह और भी भयावह सच है कि भारत के मुकाबले उत्तर कोरिया और लड़ाई का सामना कर रहे वेनेजुएला का प्रदर्शन बेहतर है। इसके अलावा, इस रैंकिंग में भारत की काफी तेज गिरावट हुई है। 2014 में 55वीं रैंक से गिरकर भारत 2015 में 80 और 2016 में 97 पर पहुंच गया था।

2017 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल बच्चों का पांचवां हिस्सा यानि 21 प्रतिशत कुपोषण का शिकार है। जीएचआई चार संकेतकों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है। ये हैं - आबादी में कुपोषणग्रस्त लोगों की संख्या, बाल मृत्युदर, अविकसित बच्चों की संख्या और अपनी उम्र की तुलना में छोटे कद और कम वजन वाले बच्चों की तादाद। भारत को युद्ध जैसे हालात का सामना कर रहे दक्षिण सूडान जैसे देशों की श्रेणी में रखा गया है। इसमें 2016 के मुकाबले 15 प्रतिशत की वृद्धि देखी गयी है। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि पांच साल से कम उम्र के एक तिहाई बच्चे (35.7 प्रतिशत) कम वजन वाले हैं और तीन में से एक (38.4 प्रतिशत) अविकसित हैं। हैरत की बात ये है कि 6 से 23 महीने के बीच के केवल 9.6 प्रतिशत बच्चों को पर्याप्त आहार मिलता है और आधे से कम (48.4 प्रतिशत) परिवारों के पास बेहतर स्वच्छता सुविधाएं होती हैं। जीएचआई में श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देश भी भारत के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर हैं।

जबकि, यूपीए के शासनकाल के दौरान ये कहानी अलग ही थी। 2014 की रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि पिछले एक दशक के दौरान भारत ने कुपोषण से लड़ने में अच्छी प्रगति की थी। बच्चों के कुपोषण में 5 प्रतिशत की गिरावट आयी थी, बच्चों के अविकसित होने के मामलों में 9 प्रतिशत की कमी तथा कम वजन के मामलों में 12.8 प्रतिशत की गिरावट हुई थी। रिपोर्ट में ‘पिछले एक दशक में पोषण पर विशेष ध्यान देने’ के लिए यूपीए सरकार की सराहना की गयी थी। रिपोर्ट में बच्चों के पोषण और विकास में सुधार के लिए 14 लाख केंद्र स्थापित करने के लिए ‘एकीकृत बाल विकास सेवा कार्यक्रम’ की भी प्रशंसा की गयी थी। ग्रामीण क्षेत्रों में मदद के लिए समुदाय आधारित संपर्क और सुविधा-केंद्रित स्वास्थ्य पहलों के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की सराहना की गयी थी। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को लोगों के लिए काफी फायदेमंद बताया गया और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार की भी प्रशंसा की गई थी। रिपोर्ट में यूपीए सरकार द्वारा ‘पोषण के लिए अनुकूल माहौल’ बनाने के प्रयासों की सराहना की गयी।

मोदी सरकार को विरासत में मिली अच्छी-खासी प्रणाली के बावजूद उसे पूरी तरह से बर्बाद क्यों कर दिया गया? इसके कारण ही भारत की रैंकिंग में लगभग दोगुनी गिरावट हो गयी और यह 55वीं रैंक से गिरकर 100वीं रैंक पर पहुंच गया। यूपीए सरकार ने भुखमरी मिटाने के लिए जो काम किया था उस सारी मेहनत पर पानी फेर दिया गया। इसमें कोई शक नहीं है कि भाजपा सरकार को चंद अमीर उद्योगपतियों के फायदों की ही चिंता है गरीब और कमजोरों की नहीं।


 
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