|

चर्चा में

10/12/2017 12:00:00 AM

जीएसटी अनुपालन में कमी



जीएसटी के तहत करीब 70 प्रतिशत करदाताओं ने जुलाई माह के लिए विस्तृत बिक्री विवरण दाखिल किया, कर अधिकारियों के मुताबिक इससे पता चलता है कि जीएसटी का अनुपालन काफी कम हो रहा है। इससे पहले रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख को दो बार आगे बढ़ाने के बाद पिछला मंगलवार कारोबारियों के लिए आखिरी मौका था। टैक्स अधिकारी अब इस बात पर अपना सिर धुन रहे हैं कि आखिर 20 लाख करदाताओं ने अपना रिटर्न दाखिल क्यों नहीं किया!

इससे पहले, जीएसटी लागू होने के पहले दो महीनों में अपेक्षित रिटर्न की तुलना में कम अनुपालन के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए सर्वेक्षण किया गया था। जुलाई टैक्स रिटर्न के लिए जीएसटीएन विंडो ऑनलाइन होने के बाद से ढेरों शिकायतें प्राप्त हुईं। कई बार तो भारी बोझ के चलते पोर्टल ही धवस्त होने की खबर आयी। कई कारोबारियों ने दावा किया कि उन्होंने कर भुगतान तो कर दिया लेकिन जीएसटीएन पर कर प्राप्ति संबंधी रसीद नहीं दिख रही है। कई दूसरे कारोबारियों का कहना था कि प्राप्ति रसीद में त्रुटियां हैं। इसके अलावा सर्वर में देरी होने और इसके चलते सत्र समाप्त होने जैसी शिकायतें आम हैं।

ऐसा नहीं है कि सरकार को करदाता के व्यवहार के बारे में जानकारी नहीं थी। वास्तव में, जीएसटी नेटवर्क के चेयरमैन नवीन कुमार ने एक साक्षात्कार में कहा कि ‘‘हमने सर्विस टैक्स, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और वैट के संबंध में करदाताओं के रिटर्न दाखिल करने के व्यवहार का अध्ययन किया है और हमने पाया है कि 50 प्रतिशत करदाता अंतिम दिन अंतिम समय में अपना रिटर्न दाखिल करते हैं और उनमें से ज्यादातर 4-5 बजे के बीच ऐसा करते हैं। लगभग 30 प्रतिशत करदाता अंतिम समय से ठीक पहले और लगभग 20 प्रतिशत उससे पहले रिटर्न फाइल करते हैं। हमने सिस्टम तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखा है।’’

हालांकि, जैसा दावा किया जा रहा था अनुपालन के स्तर से वैसी कोई तैयारी दिखायी नहीं देती। कुल मिलाकर, जीएसटी इस प्रकार से लागू किया गया है कि इसे कहीं से ‘गुड एंड सिंपल टैक्स’ नहीं कहा जा सकता। बिना किसी छूट वाला, एक टैक्स, सीधा और व्यापक सुधार वाले विचार को भाजपा की अगुआई वाली सरकार ने बेहद जटिल बना कर रख दिया है। मौजूदा नीति का ढांचा दुनिया भर में अपनाये गये सामान्य जीएसटी कार्यप्रणाली के बिल्कुल विपरीत है।

इसके कारण अर्थव्यवस्था को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा है। हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने नोटबंदी और जीएसटी के खराब प्रभावों के कारण मंदी की संभावना जतायी है। आईएमएफ के अनुमानों के अनुसार, भारत 2017 में 6.7 प्रतिशत और 2018 में 7.4 प्रतिशत की गति से विकास करेगा जो, इस साल के पहले के अनुमानों से क्रमशः 0.5 और 0.3 प्रतिशत कम होगा। विश्व बैंक ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा था कि इन नीतिगत फैसलों- नोटबंदी की अफरातफरी और जीएसटी को लेकर अनिश्चितता - ने भारत की आर्थिक रफ्तार को धीमा कर दिया।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने आलोचकों की बात सुनना पसंद नहीं करते और इस दुगर्ति का यही कारण है, जिससे बचा जा सकता था। श्री गांधी ने हाल ही में ये भी कहा था, ‘‘वह (मोदी) किसी की नहीं सुनते लेकिन हम आंदोलन करके उन्हें लोगों की बात समझाने की कोशिश करेंगे। हम प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित करेंगे और जीएसटी को सरल बनाने के लिए उन्हें मनाने की कोशिश करेंगे।’’

हमें उम्मीद है कि मोदी जी सुन रहे होंगे, क्योंकि अर्थव्यवस्था बेहद कीमती है जिससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता।


 

 
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
24, अकबर रोड, नई दिल्ली - 110011,
भारत टेलीफोन: 91-11-23019080 । फैक्स: 91-11-23017047 । ईमेल: connect@inc.in
© © 2012-2013 अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी। सर्वाधिकार सुरक्षित। नियम एवं शर्तें | गोपनीयता नीति