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नेशनल हेराल्ड



नेशनल हेराल्ड से संबंधित सामान्य प्रश्न और उनका समाधान

1. क्या श्रीमती सोनिया गांधी या श्री राहुल गांधी को यंग इंडियन से आर्थिक लाभ हुआ है?

नहीं। धारा 25 के तहत पंजीकृत निर्लाभ कंपनी यंग इंडियन के निदेशक या शेयरधारक कानूनन कंपनी से किसी भी तरह का वित्तीय लाभ नहीं ले सकते (और ना ही किसी ने कोई लाभ लिया है)।

2. क्या एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) से यंग इंडियन को कोई संपत्ति स्थानांतरित की गयी है?

नहीं। एजेएल की सभी परिसंपत्तियां और आय कंपनी के पास ही है। एक भी पैसा यंग इंडियन को, यंग इंडियन के निदेशकों या यंग इंडियन के शेयरधारकों के पास नहीं गया है।

3. क्या यंग इंडियन आज एजेएल के स्वामित्व वाली संपत्तियों की मालिक हैं?

नहीं, यंग इंडियन और एजेएल दोनों अलग-अलग कंपनियां हैं। एजेएल की सभी परिसंपत्तियां अभी भी एजेएल के पास ही हैं। यह उसी तरह का झूठा आरोप है कि इंडियन होटल्स लिमिटेड के शेयरधारकों का ताज ग्रुप की होटल संपत्तियों पर अधिकार है और वे किसी होटल विशेष के मालिक हैं या इसमें रहने के लिये आ सकते हैं!

4. यंग इंडियन को एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के स्वामित्व वाली संपत्तियों को हड़पने के लिए बनाया गया था?

गलत। इसके विपरीत, धारा 25 के तहत पंजीकृत निर्लाभ कंपनी यंग इंडियन ने एजेएल के प्रमुख शेयरधारक होने के नाते वास्तव में, एजेएल की संपत्तियों पर सुरक्षा उपायों को बढ़ाने का काम किया।

5. कांग्रेस पार्टी ने एजेएल को 90 करोड़ रुपये का कर्ज क्यों दिया?

कंपनी की खराब वित्तीय सेहत के कारण पिछले कई दशकों से कांग्रेस पार्टी ने एजेएल को आर्थिक रूप से मदद की है। इससे स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज रहे एजेएल की मदद करने की पार्टी की प्रतिबद्धता परिलक्षित होती है। एजेएल के 1937 के संस्थापक दस्तावेज जो कंपनी का बहिर्नियम हैं, इसके उद्देश्यों में कहा गया है कि ‘‘कंपनी द्वारा जारी किसी भी समाचार पत्र, पत्रिका, सामयिक या जर्नल की नीति भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सामान्य नीति और सिद्धांतों के अनुसार होगी।’’ यह दर्शाता है कि एजेएल की स्थापना के समय से ही एजेएल और कांग्रेस पार्टी के बीच अटूट रिश्ता रहा है। कांग्रेस पार्टी एजेएल का समर्थन करके अपने उद्देश्यों को पूरा करना चाहती है।

6. यंग इंडियन को अरुण जेटली ने रियल एस्टेट कंपनी बताया है। क्या ये सही है?

पूरी तरह गलत। यंग इंडियन एक भी रियल एस्टेट या अचल संपत्ति की मालिक नहीं है। एजेएल के पास अपनी सभी परिसंपत्तियों का मालिकाना है। इसलिये ये सारे आरोप पूरी तरह निराधार हैं।

7. एजेएल 2010 में अपना 90 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने के लिए बैंक क्यों नहीं गयी?

एजेएल की बैलेंस शीट पर कांग्रेस पार्टी से 90 करोड़ रुपये का ऋण मौजूद था। कोई भी वाणिज्यिक बैंक एजेएल की कम आमदनी, नकारात्मक कीमत और भारी घाटे वाली बैलेंस शीट के कारण एक भी रुपया उधार देने को तैयार नहीं था।

8. क्या राजनीतिक दलों को कर्ज देने की अनुमति है?

हां। ऋण देने के लिये राजनीतिक दलों पर कानूनन कोई प्रतिबंध नहीं है। वास्तव में, भारतीय निर्वाचन आयोग ने नवंबर 2012 में इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी किए हैं। श्री सुब्रमण्यम स्वामी ने इसी आधार पर कांग्रेस की मान्यता खत्म करने की मांग की थी, लेकिन उनकी शिकायत को चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के आदेश से रद्द कर दिया गया।

9. एजेएल की वित्तीय हालत कितनी बुरी थी?

लाभ और हानि का विवरण (लाख रुपये में) नीचे दिया गया है। कृपया ध्यान दें कि फरवरी 2011 में एजेएल के 90 करोड़ रुपये के कर्ज को समाप्त करने के बाद एजेएल 2011-12 में कई वर्षों में पहली बार अपने लाभ की घोषणा करने में सक्षम हो पाया और अंधकार से उजाले की ओर आया। यह केवल कांग्रेस पार्टी द्वारा एजेएल के वित्तीय पुनरुद्धार योजना से ही संभव हो पाया।

10. कांग्रेस पार्टी द्वारा दी गयी वित्तीय मदद से एजेएल ने क्या किया?

इस पैसे का इस्तेमाल बकाया वेतन, वीआरएस, सिविक एजेंसियों और वैधानिक तथा अन्य देनदारियों, करों, बकाया राशि का भुगतान में किया गया।

11. एजेएल की संपत्तियों को बेचा क्यों नहीं गया?

एजेएल की अधिकांश संपत्तियां सरकारी पट्टों पर थीं जिनकी जमीन की बिक्री निषिद्ध है।

12. क्या एजेएल के शेयरधारकों को धोखा दिया गया, जैसा कि कुछ लोगों ने आरोप लगाया है?

2011 में असाधारण आम बैठक में उपस्थित और मतदान करने वाले सभी शेयरधारकों ने सर्वसम्मति से यंग इंडियन के लिए नयी इक्विटी जारी करने को मंजूरी दी थी ताकि एजेएल का कर्ज समाप्त किया जा सके। शेयरधारकों को धोखा देने का सवाल ही नहीं उठता।

13. क्या नेशनल हेराल्ड पुनर्जीवित होगा?

एजेएल की मंशा हर हाल में नेशनल हेराल्ड अखबार को पुनर्जीवित करने और पंडित जवाहर लाल नेहरु द्वारा स्थापित मीडिया की आवाज बहाल करने की है।

14. एक अखबार के साथ राजनीतिक पार्टी का कोई लेना-देना क्यों होना चाहिए?

हर राजनीतिक दल को अपनी विचारधारा और अपनी नीतियों को प्रभावी ढंग से बड़े पैमाने पर जनता तक पहुंचाने की जरुरत होती है। अखबार ऐसा करने के लिए वह माध्यम प्रदान करता है।

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