|

आपकी आवाज़

अस्सी का बनारस

अरे नहीं! अस्सी बरस का नहीं हुआ बनारस। यह तो और भी पुराना है। बनारस सिर्फ एक शहर नहीं बल्कि एक मिजाज का नाम है। हर प्रकार की समस्याओं से घिरे रहने के बावजूद खुश रहने का मिजाज, समय के दबाव को ठेंगे पर रखने वाला अल्हड़ मिजाज। मोबाइल फोन वाले वक्ती दौर में ट्रंक काल बुक करने वाला मिजाज, एक बड़ा सा कद्दू कंधे पर रख लेने के बाद अपने आप को जहांपनाह समझने वाला मिजाज। पान मुंह में दबाये पूरी रामायण-महाभारत बांच देने वाला मिजाज इस शहर को पूरी दुनिया में अलग स्थान दिलाता है।

बलात्कार: सामाजिक बीमारी कानूनी उपचार से दूर नहीं होगी

दिल्ली की 23 वर्षीय लड़की के साथ बस के अंदर हुई दिल दहला देने वाली बलात्कार और मारपीट की घटना से सार्वजनिक तौर से लोगों में काफी गुस्सा और पीड़ा है जिसे हर किसी ने अपने-अपने तरीके से जाहिर भी किया। महिलाओं के खिलाफ अपराध को रोकने के लिए कठोर कानून की मांग करते हुए युवा विशेष रूप से सड़कों पर उतर गये। लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार मौलिक अधिकार है और यह सराहनीय है कि युवाओं में अपने देश के प्रति भावना है।

महिलाओं के प्रति अपराध - समस्या हमारे में है, कानून में नहीं

इस बार यह ऑफिस की टैक्सी नहीं थी, यह पोशाक नहीं थी, वह ‘उस तरह की लड़की’ नहीं थी, वह अकेले यात्रा नहीं कर रही थी। अगर कुछ था तो वह उन सारी सावधानियों का पालन कर रही थी जो कि हम महिलाओं को लेने के लिए तय किया गया है। फिर भी, उसके साथ बलात्कार किया गया। इतना ही नहीं, सामूहिक बलात्कार, उस पर निर्दयी तरीके से बुरी तरह से हमला किया गया। और इसी के साथ सामान्य कोलाहल शुरू होता है, पुलिस पर, सरकार पर आरोप लगता है, मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग शुरु होती है - असली मुद्दा नेपथ्य में चला जाता है।

वैश्विक समृद्धि के युग में प्रवेश करने का खाका

मैं मार्च 2013 में जारी होने वाली किताब, ‘योजना: पुनर्जीवित नवाचार, जोखिम का फिर से पता लगाना और मुक्त बाजार का बचाव’, का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं और उससे मुझे काफी उम्मीदें भी हैं। इसके लेखक तीन ऐसे लोग हैं जिन्हें उनकी दिमागी क्षमता के लिए जाना जाता है और वे अपने-अपने संबंधित क्षेत्रों में काफी नामी-गिरामी हैं। पहले लेखक हैं गैरी कास्पारोव, जिनके बारें में किसी को भी शक नहीं है कि वे शतरंज के महानतम खिलाड़ी हैं। अन्य दो लेखकों में पे-पाल के सहसंस्थापक मैक्स लेवचिन और पीटर थिएल हैं। पीटर थिएल फेसबुक के पहले बाहरी निवेशक थे। पुस्तक के बारे में दावा किया गया है कि यह किताब विघटनकारी प्रौद्योगिकियों के जरिये वैश्विक समृद्धि के नए युग का शुभारंभ होने की विस्फोटक घोषणा करने साबित होगी। एक आईआईटियन के रूप में, मेरे जैसे लोगों के लिए इस बात का बड़ा महत्व है। लेकिन गंभीरता से कहा जाये तो यह ठीक भी है क्योंकि पिछले एक दशकों में क्रांतिकारी नवाचारों में बुरी तरह से कमी आई है ऐसे नये विचारों की आज दुनिया को सख्त जरुरत है। यहाँ हम आईफोन जैसी वृद्धिशील प्रगति के बारे में बात नहीं कर रहे हैं।.

यूपीए के सामाजिक खर्चों की सच्चाई

हाल के दिनों में यूपीए सरकार के खिलाफ आलोचना करने की बाढ़ आ गई है, विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा अध्यादेश लागू होने के साथ इस तरह की आलोचनाओं को सुर्खियों में जगह मिलने लगी है, जिसकी व्याख्या का शायद हमारी ‘समावेशी’ नीतियों से दूर तक कोई वास्ता नहीं है। इस तरह की आलोचनाएं ज्यादातर वितरण बनाम अभूतपूर्व विकास पर केंद्रित होती हैं। कईयों ने तो तेजी से इस बात का निष्कर्ष भी निकाल दिया कि भारत के अच्छे वक्ती दौर में भी सरकार की नीतियों ने गरीबी दूर करने की दिशा में कुछ नहीं किया और इसे ही तेज आर्थिक विकास का पैमाना ठहरा दिया। भारत के अधिकार आधारित विधायी ढांचे को खैरात या दान के तौर पर देखा गया। मौजूदा सरकार को इस बात के लिये दोषी ठहराया गया कि वह भारत को समाजवादी कल्याणकारी राज्य के दौर में पीछे ढकेल रही है।



 
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, 24, अकबर रोड, नई दिल्ली - 110011, भारत टेलीफोन: 91-11-23019080 । फैक्स: 91-11-23017047 । ईमेल: connect@inc.in © © 2012-2013 अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी। सर्वाधिकार सुरक्षित। नियम एवं शर्तें | गोपनीयता नीति