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Press Releases

Highlights of the press briefing of Shri Randeep Singh Surjewala and others 5-1-2017

Smt. Ambika Soni, GS AICC, Shri Virbhadra Singh, CM Himachal Pradesh,  Shri Harish Rawat, CM Uttarakhand, Capt. Amrinder Singh, PCC Punjab, Ms. Asha Kumari, Incharge Punjab and Shri Randeep Singh Surjewala, MLA, In-charge Communication Deptt. addressed the media today.

श्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए प्रैस वार्ता के मंच पर उपस्थित सभी वरिष्ठ कांग्रेसजनों एवं भूतपूर्व सैनिकों का स्वागत किया। आज देश की रक्षा करने वाले सैनिक जो देश के लिए और तिरंगे के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देते हैं और मौजूदा मोदी सरकार में लगातार संघर्षव्रत हैं अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए, आज वो सब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रांगण में आए हैं। इसके बारे में व्याख्या करने के लिए आदरणीय कैप्टन अमरिन्द्र सिंह जी सम्पूर्ण बातें बताएंगे।

Capt. Amrinder Singh requested everyone to stand and hold two minutes' silence for those of our fellow soldiers / ex-servicemen who have fallen in battle fields for the Nation.

Capt. said first I would like to wish everybody on Guru Gobind Singh's 350th Prakash Utsav.  I am happy today that most of the service organizations throughout the country are going to be supporting the Congress Party. He said there are some Punjab based organizations which are located in various Districts of Punjab and today I am happy to say that General Satbir Singh and his movement which has today entered its 571st day of their Protest at Jantar Mantar on various issues, they have been protesting for OROP which is a long pending demand and a just demand that has been denied to them. Then, the 7th Pay Commission and most of all is the downgrading of the various ranks of the Indian Army in relation to their Civilian counterparts. Whether a person gets Rs. 500 or more is not important but 'izzat' of a man is more important than anything else. General Satbir Singh and his colleagues and all of us at whichever level we are working in Punjab have been taking this up. We have with us both the CMs of Himachal Pradesh and Uttarakhand. This issue is affecting everybody. I remember when the CM asked me to come and tour Himachal Pradesh and I went to one constituency somewhere in Kangra and there was a huge crowd and I asked them if somebody belongs to the Army or their families, the whole crowd stood up. That is the type of strength, Servicemen are a disciplined lot and we have all come together on stage to work for the benefit of Congress Party in all India States. These are the things that should have been looked into but instead of looking into things, our Defence Minister who criticizes for the sake of criticism and I took very strong remarks of him yesterday and I also pasted on the Facebook which was made about two Army Commanders, outstanding soldiers and then you say that the IB has also to look into them. I think it is an insult to our service and to our Army Commanders. Once you reach the position of Army Commander, then all these things have already been looked at many times before and you don't use such comments for Commanders. There are 21 issues which we are putting in our manifesto for ex-servicemen, the same will be sent to the all Media persons by the Media Department of AICC.  

Shri Virbhadra Singh said he fully endorses the views of Capt. Amrinder Singh that our veteran soldiers who on daily basis are raising their demands but the Government of the day is totally oblivious to their demands and not even talking to them. I think this is adding salt to the wounds. Capt. Amrinder has talked everything about the issue and I support them.

Ex-servicemen play a very important role and come majority from States including Himachal Pradesh, Punjab, Uttarakhand and other areas which are recruiting grounds for the Indian Army. I do not want to take much time and fully endorse their demand and wish our veteran soldiers who are supporting on daily basis just to express their demands.  The ex-servicemen in Hiimachal are by and large satisfied by the steps taken by the State Government. The grievances about the OROP which has to be done by the Central Government we fully endorse their demand which is a just demand. It is not a question of money, it is question of honour. He dies for the honour of the country; he dies for the honour of his Regiment, he dies for the values. It has been a tradition coming down for almost 100 years for the entire family son to join the Army. The central Government should not ignore their rightful demands. Something has been done but why not do everything, what is yet to be done. Whatever has been done is also a step forward but it should not have been done in such piecemeal manner.

श्री सुरजेवाला ने पुन: कहा कि कांग्रेस की यूपीए सरकार ने जब 'वन रैंक वन पेंशन' का निर्णय किया था, जनरल सतबीर सिंह, जनरल शेरगिल, जनरल ग्रेवाल और हमारे सब फौजी साथी उस परिभाषा से सहमत हैं। दुर्भाग्य से आज देश के प्रधानमंत्री जी ने देश के सैनिकों से वायदा खिलाफी और विश्वासघात किया। मोदी जी के उस विश्वासघात के खिलाफ 571 दिन से हमारे सैनिक जंतर-मंतर पर आज भी धरने पर बैठे हैं।

वायदा किया रेवाड़ी में वन रैंक वन पेंशन देने का और जब कांग्रेस सरकार ने 'वन रैंक वन पेंशन' डेफिनेशन के मुताबिक दिया तो उसको 'वन रैंक फाईव पेंशन' में बदल कर मोदी सरकार ने देश के सैनिकों से साथ घोर विश्वासघात किया। एक और प्रांत जहाँ के रणबांकुरों ने हमेशा देश को गौरवांनवित किया है माननीय हरीश रावत जी उत्तराखंड से ना केवल प्रतिनिधित्व करते हैं परंतु सैनिकों की अगुवाई करते रहे हैं, अपने-अपने तरीके से मैं उन्हें निमंत्रण देता हूं कि वो अपनी बात कहें।

श्री हरीश रावत जी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि मैं सबका स्वागत करता हूं। उत्तराखंड़ के एक्स सर्विसमैन को बधाई देना चाहता हूं कि वे सबकी भावनाओं के अनुरुप एक एतिहासिक लड़ाई लड़ने का काम कर रहे हैं। 571 दिन से लगातार एक मोर्चे पर जूझ रहे हैं और जिस तरीके की अनसुनि की जा रही है, जिस तरीके से है उनके राईटस को बुल्डोज करने से, हम लोग बहुत दुखी हैं और मैं कैप्टन अमरिन्द्र सिंह जी, सभी इस तकलीफ को समझते हैं। सौभाग्य से मैं राहुल जी का भी धन्यवाद करना चाहता हूं उनका ये विश्वास था यूपीए टू के समय 'वन रैंक वन पेंशन' के मुद्दे पर एक सशक्त निर्णय का काम सरकार ने किया। लेकिन उसका फायदा उठाकर जिन लोगों ने बड़ी-बड़ी बातें की, जैसा सुरजेवाला जी ने कहा कि उन्होंने पूरे मुद्दे को ना केवल डायल्यूट किया बल्कि उसको डायवर्ट करने की भी कोशिश की है। उसकी जितनी भी मजम्मत की जाए कम है। सबसे जो तकलीफ पहुंचाने वाला पार्ट था, जिस तरह से सातवें पे कमीश्न के संदर्भ में एक्स सर्विसमैन को ट्रीट किया जा रहा है, वो किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है। मैं मेजर जनरल सतबीर सिंह जी और उनके सहयोगी साथियों का जो हमारा साथ देने के लिए आए हैं, उसके लिए उनको धन्यवाद देना चाहता हूं, हम चुनावी दृष्टिकोण से कोई बात नहीं कहते हैं, हम काम के दृष्टिकोण से ये बात कहते हैं।

हमने उत्तराखंड में पहले से ही चीफ मिनिस्टर ऑफिस में एक सैल बनाया है, प्रिसिंपल सैक्रेट्री की देखरेख में ताकि विषय में निर्णय में देरी या अड़चन ना हो।

मैं कैप्टन अमरिन्द्र जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने काफी सहयोग किया है।

श्री सुरजेवाला ने पुन: कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और सैनिकों का इतिहास जुड़ा और गौरवांतित रहा है और आज हमारे एक्स सर्विसमैन साथियों ने, फौज के सिपाहियों ने, डेकोरेटिड़ सोल्जर ने ये निर्णय किया है कि वो तीनों प्रांतो में ही नहीं पूरे देश में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का समर्थन करेंगे। मोदी सरकार के विश्वासघात को उजागर करेंगे और सब एक्ससर्विस मैन को ये बताएंगे कि उनकी मांगों को लेकर कांग्रेस उपाध्यक्ष श्री राहुल गाँधी जी ने जिस प्रकार से ना केवल अनुमोदन किया बल्कि सहमति जताई है और प्रतिबद्धता दोहराई है कि एक्स सर्विसमैन वन रैंक वन पेंशन की वो डेफिनेशन और हमारे सैनिकों का सम्मान वो केवल और केवल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के हाथ में सुरक्षित है और इस निर्णय के साथ आपने कांग्रेस पार्टी का इन चुनाव में तीनों प्रांतो में भी समर्थन करने का निर्णय किया है। हम उसके शुक्रगुजार हैं। मैं अब प्रार्थना करुंगा कि जनरल सतबीर सिंह जी से कि वो सभी सैनिकों की ओर से अपनी बात आपके समक्ष रखें।

जनरल सतबीर सिंह जी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सबको मैं दिलतह से नमस्कार करता हूं।

"जन्म देते रहो ऐ खुदा मार-मार के मुझको बार-बार और मैं हर बार होता रहूं कुर्बाने वतन”।

हम सैनिक देश के सैनिक हैं और सदियों से हम अपनी ड्यूटी अपने बलिदान से हर जगह पर करते हैं। चाहे वो पुरातन समय हो या आज का। 2500 साल पहले कौटिल्य ने अपने राजा से बोला कि अगर सिपाहियों को अपनी जरुरतों के लिए आपके पास आना पड़े, उस दिन आप राजा कहलाने के लायक नहीं रहेंगे। आज भी ये बिल्कुल दुरुस्त है।

आज हम 571 दिन से सड़क पर बैठे हैं, एक हक के लिए और सरकार का वायदा किया हुआ, हमें बुलाया और हमें रेवाड़ी में वायदा किया कि अगर हमारी सरकार 2004 में आ जाती तो आज वन रैंक वन पेंशन का सवाल ही नहीं उठता। ये वायदा किया आज के प्रधानमंत्री जी ने। उसके बाद हम हर जगह हर दरवाजे पर गए और हमें मना कर दिया गया, फिर हम 14 जून 2015 से जंतर-मंतर पर बैठ हैं, भूखे प्यासे।

आज 571 दिन हो गए हैं, हमारे पास सरकार से कोई भी नहीं आया अभी तक कि आपको क्या दिक्कत है।

एक परिभाषा आपने नियुक्त की, उस डेफिनेशन को हमारे उस समय के मिनिस्टर ऑफ स्टेट भंवर जितेन्द्र सिंह जी, उन्होंने वन रैंक वन पेंशन की डेफिनेशन अपने हाथ से लिखी थी कि जब-जब दर बदलेंगे पिछले वालों को पास करते जाएंगे। इस सरकार ने उस लाईन को बदली कर दिया। हमें बहुत अफसोस है कि एक अप्रूवड़ डेफिनेशन को बदली कर देना और उसको दोहराया गया 2 दिसंबर 2014 को। आज की सरकार में मिनिस्टर ऑफ स्टेट ने, उन्होंने दोहराया यही डेफिनेशन जो कांग्रेस ने अप्रूव की थी, जो 26 फरवरी 2014 को लिखित में दी, अनाउंस हो गई और उसको बिना सलाह किए, डिस्क्शन किए संसद में इन्होंने उस लाईन को उड़ा दिया जिसमें लिखा था कि जब-जब दर बदलेगी तो वो नया वाला रेट पिछले वाले सभी सैनिकों को पास कर दिया जाएगा। इन्होंने उस लाईन को उड़ा दिया और उसके बदले में लिख दिया

Equalization will be carried out on periodic intervals.

ये शर्म की बात है।


हमने सभी पार्टियों को लिखा है, मुझे खुशी है कि कैप्टन अमरिन्द्र जी जो हमारे एक ही पुराने साथी हैं, हमने सबको ये प्वाईंट लिखे हैं और हमें खुशी है कि इन्होंने हमारे सभी प्वाईंट को लागू करने के लिए अपना एग्रीमेंट दिया है।


एक है वन रैंक वन पेंशन जो पंजाब से नहीं कर सकते लेकिन इनकी पार्टी यहाँ से कोशिश करेंगे कि पूरा करवाएंगे। दूसरा इन्होंने हमें एक ऐसी विसंगति में डाल दिया, कहते हैं कि हम तुम्हें 1 जुलाई 2014 से देंगे लेकिन पेंशन देंगे 2013 की। अभी कहते हैं सातवां वेतन आयोग आ गया है तो जो आपको मिल रहा है उसको मल्टिप्लाई करेंगे फैक्टर से, मतलब 2013 की पेंशन को कहते हैं, मान लो वो 31 दिसंबर 2015 की है। अन्याय है ये।

It should be directly under the charge of the Chief Minister and that should be part of this Ministry looking after the whole State as well as the Centre. Covenant Act of the Defence Forces, all democracies USA, UK everyone has a Covenant Act.


यहाँ से तो हमारा प्रधान सेवक 15 अगस्त को भूल गए हैं और उन्होंने लाल किले से बोला कि हम जन-थल और वायु में 40,000 पुलिस कर्मियों की शहीदी पर मांग करते हैं, सैनिक को भूल गए और उसके बाद हमने प्रधान सेवक जी को लिखा कृपया इसको ठीक कीजिए, उन्होंने जवाब भी नहीं दिया।


One of the options is to give support in the elections in each State to educate the voter as to please give your vote to those who complete or accept your assurance and don't break it.


When I was sitting on Dharna, I was asked one day by Defence Minister and asked whether I was sitting for money, I laughed.


हम उसके साथ, जो हमारे साथ हैं। ये हमारा एक नारा हमने जंतर-मंतर से दिया हुआ है। हम कैप्टन अमरिन्द्र साहब जी और कांग्रेस पार्टी के सामने आए हैं। अगर देश को तरक्की करना है तो सरहद को महफूज रखो और एक सैनिक की ईज्जत करो। हम ईज्जत और इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, पैसे के लिए नहीं।


बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं, हमारे दोनों चीफ मिनिस्टर का और हमारे सभी साथी आपके साथ होंगे। सैनिक एकता जिंदाबाद। भारत माता की जय। जय हिंद।


श्री सुरजेवाला ने पुन: कहा कि मैं सबका शुक्रिया करता हूं। सतबीर सिंह जी ने जिस प्रकार से ना केवल पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल बल्कि पूरे देश में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ अपनी बात, अपना मन और भावना जोड़ने का निर्णय इस मंच से बताया उसके लिए पुन: धन्यवाद। 

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