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Highlights of the press briefing of Shri Randeep Singh Surjewala 6-1-2017


https://www.youtube.com/watch?v=PR76_AcQMUo

श्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए  आज जो तथ्य हम आपके सामने रखने वाले हैं उनको देखने के बाद आप स्वयं अनुमान निकाल सकते हैं कि प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी ने लगातार कहा  कि उनका पहला नारा है "ना खाऊंगा ना खाने दूंगा”। ये भी वो बार-बार दोहराते रहते हैं कि वो देश की सम्पदा के चौकीदार हैं।

कांग्रेस उपाध्यक्ष माननीय राहुल गाँधी जी के द्वारा बिरला और सहारा दोनों की कम्प्यूटर एन्ट्री और कागजात सार्वजनिक पटल पर रखने के बाद प्रधानमंत्री जी की विश्वसनियता संदेह के घेरे में है। प्रधानमंत्री जी को जो अपने आपको भ्रष्टाचार के खिलाफ सजग प्रहरी बताते हैं, अब आवश्यकता है कि अपनी विश्वसनियता को साफ करें, एक निष्पक्ष जांच के द्वारा। जैसा आप जानते हैं और जैसा सार्वजनिक पटल पर भी है कि 22 नवंबर 2014 को सहारा समूह पर रेड हुई थी और उस में लगभग 137 करोड़ रुपया कैश में पकड़ा गया और बहुत सारे कम्प्यूटर, एक्सेल शीट और दूसरे कागजात पकड़े गए थे। इन सारे कागजात में एक विशेष बात ये थी कि एक एक्सेल शीट में 9 बार भिन्न-भिन्न तिथियों में मोदी जी के नाम की एंन्ट्री थी जिसका कुल टोटल बैठता था - 40 करोड़ 10 लाख रुपया।

ये कागजात जिस पर इंकम टैक्स अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं, श्री राहुल गाँधी जी ने सार्वजनिक किए थे। इन कागजातों में पेमेंट की तिथि, पेमेंट की जगह, पेमेंट किसको की गई और किसके द्वारा की गई, कोरियर कौन था इस पैसे का, वो भी सार्वजनिक किया गया था।

आज आश्चर्यचकित करने वाली बात ये है कि उन दोनों उद्योगिक घरानों से पकड़े गए कागजातों को रफा-दफा करने का सरकार में षड़यंत्र किया जा रहा है।

Shockingly entire case against Sahara Group is being set to be closed in a hush-hush and conspiratorial manner with great and alarming speed.

ये दिखाता है कि कहीं ना कहीं दाल में केवल काला नहीं, पूरी दाल ही काली है और पूरे मामले को किसी प्रकार से हड़बड़ी में रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा है।

This reflects that Modi Government has something to hide and consequently an attempt is being made to brush the entire matter under the carpet.

इस पूरी प्रक्रिया में सहारा ग्रुप को दो सीधे फायदे पहुंचे।

पहला 1910 करोड़ रुपए की आय पर अब कोई इंकम टैक्स उन्हें नहीं देना पड़ेगा। मैं ये तथ्य आपके सामने रखने वाला हूं।

दूसरा सहारा समूह को पेनेल्टी और प्रोसिक्यूशन से मोदी सरकार के द्वारा इम्यूनिटी दे दी गई है। इस बारे में जो इंकम टैक्स सेटेलमेंट का ऑर्डर 10 नवंबर 2016 को पारित किया गया है उसकी एक प्रतिलिपि हम आपकी ई-मेल पर भेज रहे हैं।

हम मोदी सरकार से और खास कर मोदी जी से मात्र 5 प्रश्न पूछना चाहते हैं।

पहला, सहारा कागजों, जिनमें रिश्वत के आदान-प्रदान की चर्चा है, तिथि है, लेने वाले का नाम है, देने वाले का नाम है, उस सारे मामले को मात्र 16 दिन में इंकम टैक्स सेटेलमेंट कमीश्न के द्वारा निपटा दिया गया और तीन तिथियों में, वो तीन तिथियाँ हैं- 25 अक्टूबर 2016, 4 नवंबर 2016 और 7 नवंबर 2016 को सुनवाई होती है और फैसला आ जाता है 10 नवंबर 2016, यानि 16 दिन में सारा मामला खत्म और इन 16 दिन में 4 छुट्टियाँ भी हैं, यानि कि 12 दिन में सुनवाई से निर्णय तक सहारा के सारे मामले का पटाक्षेप करने का षड़यंत्र किया जा रहा है। क्या मोदी जी और मोदी सरकार बताएगी कि इस जल्दी के पीछे क्या चिंता है और क्या कारण है?

दूसरा सवाल, तथ्य स्पष्ट हैं कि सहारा ग्रुप ने उन पर हुई 22 नवंबर 2014 की रेड़ के बाद एक रिवाईज्ड इंकम टैक्स रिटर्न सरकार को दायर की और रिवाईज्ड इंकम टैक्स रिटर्न में उन्होंने माना कि उन्होंने 1 हजार 2017 करोड़ रुपए की आय छुपाई थी, यानि सरकार को और इंकम टैक्स अथोर्टी को नहीं बताई और उन्होंने रिवाईज्ड इंकम टैक्स रिटर्न में मान लिया, लिखित में। जब ये सारा मामला इंकम टैक्स सेटेलमेंट कमीश्न में भी गया तो वो जो एडिशनल आय थी वो और जो और पैसा पकड़ा गया था ये कुल राशि मिलाकर बनी 1 हजार 910 करोड़ 76 लाख रुपया।

This entire amount came to Rs. 1910.64 Crore.  Even the Income Tax Commission says this is the income on which they need to pay tax. I am sending you that order, that order contains this finding.

एक और सच्चाई जो है कि सहारा समूह ने इन्ही सालों, 2009-2010 से लेकर और 2014-15 तक जो रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनी में फाईलिंग दायर की, उनमें अपना कुल खर्चा लगभग 9 करोड़ रुपया दिखाया, लेकिन जब मामला इंकम टैक्स सेटेलमेंट कमीश्न में गया तो वो खर्चा बढ़कर 1956 करोड़ 50 लाख हो गया। यानि 1910 करोड़ की आय, 1956 करोड़ का खर्चा।

सीधा सवाल केवल इतना है मोदी जी से कि सहारा समूह को ओरिजनल खर्चे के डिस्क्लोजर से 150 से 200 गुना फायदा क्यों दिया जा रहा है? खास तौर से जब ये वो आय है जिसको उन्होंने घोषित नहीं किया था। सरकार को और अथोर्टीज को। ऐसे में इतना दयालु बनने का क्या कारण है? अब सरकार इतना दयालुपन एक उद्योगिक समूह पर क्यों दिखा रही है, क्या गढजोड़ है, मेज के नीचे से होने वाला क्या समझौता है, क्या प्रत्यक्ष या परोक्ष समजौता हुआ है?

तीसरा सवाल, 137 करोड़ जो कैश में मिले थे, अब केवल उन पर टैक्स देना पड़ेगा, वो भी 12 किश्तों में, उस पर भी छूट दे दी गई। सेक्शन 271 इंकम टैक्स एक्ट ये कहता है कि अगर आप में से किसी की अघोषित आय पकड़ी जाए तो उस पर 100 प्रतिशत से 300 प्रतिशत तक जुर्माना लगेगा, अनिवार्य है, इससे कम नहीं लग सकता। सैक्शन 276 इंकम टैक्स एक्ट ये कहता है कि ऐसे व्यक्ति पर या उद्योगिक समूह पर मुकदमा चलाया जाएगा। तो मोदी सरकार इतनी दयालु क्यों बनी है कि सहारा समूह को पेनल्टी से भी छूट दे दी और मुकदमा चलाने से भी छूट दे दी गई। पेनल्टी और प्रोसिक्यूशन दोनों से छूट दे दी।

चौथी बात और ज्यादा आश्चर्यजनक है क्योंकि भाजपा के मित्र बार-बार इन कागजों के बारे में कहते हैं कि जांच की कोई जरुरत नहीं क्योंकि कोई सुबूत नहीं। अब हम आपके सामने जो सुबूत रखने वाले हैं, ये फाईडिंग है, सुबूत है। इंकम टैक्स सेटेलमेंट कमीश्न जिसने ये सारी रियायत 12 दिन में कर दी उन्होंने 22 सितंबर 2016 को एक आदेश पारित किया। इसी सहारा समूह के कागजों को लेकर और उसकी मैं 5 लाईनें पढ़ कर बताना चाहता हूं-

Para 8 says "Insofar as loose papers and computer print outs seized are concerned, they record receipt and outgoings of cash. The Departmental case is that on the basis of statements recorded and third party enquiries carried out, the papers have evidentiary value. That is the case of the Income Tax Department.

Now the findings – the speculation income offered in the settlement application and other issues related to meaningfulness of or otherwise of loose papers seized, would require further verification / enquiry which can be taken up in later proceedings.

Now your own Settlement Commission has said that Sahara papers' verification should be taken up, should be verified for further later proceedings. So will you now conduct an independent enquiry or not? We are not saying so. The order by which this Industrial House is being given benefit is saying so. And the Final Order of the Commission comes on 10th November 2016. This order also we are supplying to you and even they say surprisingly while giving all the concession to the Industrial House, they cannot deny the authenticity of the documents and surprisingly they record two findings, those findings are –

(1) That all these loose sheets, that all the papers showing receipt of payment and payment  of money to various persons belong to Sahara Group. So the ownership of the document is verified again.

(2) They say we are not going to accept these as it is because Income Tax Department had to bring corroborative evidence. What is that corroborative evidence? Person who has delivered the money must be investigated. Person who is said to have received the money must be investigated. Where the money has been drawn, that person has to be investigated. So, the person who has received the money must be investigated and the courier must also be investigated. But did Income Tax Department do so? The answer is again No.

I am just reading the relevant findings to you – three lines only – It says – The papers seen by during the course of 245 (d) Sub Clause (iv) proceedings also do not throw much light on the veracity of the payment or receipts as depicted therein. We have also noted that non corroborative evidence is collected by the Department. Having considered carefully the rival arguments on this issue, we are of the opinion that ownership of the documents etc. cannot be denied. However, evidentiary value of loose papers and electronic documents could not be proved and why, because no corroborative evidence was collected. Why was it not collected? Was it not collected because one of the persons named at 9 different places in those papers is the current Prime Minister of India? Was it not collected for that reason? And will it be collected now and should it then not be a subject matter of an independent investigation as your own Settlement Commission has now recorded, that is the question, and last but not the least -

None less than Financial Intelligence Unit of the Ministry of Finance on 28th of April 2013 collected details of 4,574 bank Accounts of this Industrial House - not one, not two, not three, 4,574 Bank Accounts. And Enforcement Directorate, Government of India on 3rd May 2013 collected those details from Financial Intelligence Unit, put them all on a CD and had referred this issue for investigation. Nearly 5,000 Bank Accounts, if they have to be investigated can take 6-8-9 months but now 2-1/2 or 3 years have passed and I am supplying both these documents also to you. Both these documents are here. They are also being placed on your –e-mail which reflects 4,574 suspicious Bank Accounts, that may be accounts which may be transacting Black-money could be, a question mark therein, were also put there. Why has Modi Government not investigated? What are the details of these 4,574 Bank Accounts?  Has Modi Ji found all these Bank Accounts also clear like he has found the other entries clean and has settled the matter in Settlement Commission? So, it is time that Prime Minister Shri Narendra Modi and BJP Government answer these questions to people of India.

On being asked on the issue by Congress Party, Shri Surjewala said Congress Party has already demanded that credibility of the Prime Minister is at stake, a serious question has been raised on whether or not this money was received by the recipient. One of the persons named 9 times therein is none less than person holding the Highest Office of the country. We want that Prime Minister's credibility should never be in doubt. We want that Prime Minister should be able to subject himself to an independent investigation. The question that were raised, that those papers by itself were not sufficient pieces of evidence. Now you have investigation of those papers – first by Income Tax Department, Director of Investigation who works directly under the Prime Minister, who came to a conclusion that the papers were correct and consequently they must be investigated. Sahara Group went to the Income Tax Settlement Commission who decided the entire matter hurriedly but ended up giving two findings – (a) the loose papers, the computer excel sheets belongs to the Industrial House and (b) they need to be investigated or enquired. I am not saying so.

Shri Surjewala said first let PM come forward and answer. That is why I said, the charity must begin at home. And then, there has to be a probe that does not fall within the precincts of the Government and where the probe can only really be termed as neutral, independent, free and fair.

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