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Statement issued by Shri Randeep Singh Surjewala, Incharge Communication, AICC and Shri Jaiveer Shergill, National Media Panelist.

प्रेस विज्ञप्ति

06 जनवरी, 2016 

रणदीप सिंह सुरजेवाला, मीडिया प्रभारी, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी एवं जयवीर शेरगिल, नेशनल मीडिया पैनलिस्ट ने निम्नलिखित बयान जारी किया :- 

1.           प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी हमेशा कहते आए हैं, ‘‘न खाउंगा, न खाने दूंगा’’। चुनावों के दौरान उन्होंने सीना ठोंक कर कहा था कि वो देश का भरोसा एवं देश की संपत्ति के ‘चौकीदार’ हैं। लेकिन ‘बिरला’ और ‘सहारा’ मामलों में प्रधानमंत्री का नाम आने से उनकी विश्वसनीयता पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह लग गया है और आवश्यक है कि इसकी एक स्वतंत्र जांच की जाए। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने का दम भरने वाले मोदी जी को इन दो औद्योगिक घरानों से पैसा लिए जाने के आरोपों का जवाब देना ही होगा।

2.           मोदी सरकार के सत्ता सम्हालने के छः महीने बाद दिनांक, 22.11.2014 को आयकर विभाग ने ‘सहारा ग्रुप’ पर छापा मारा।

3.           आयकर विभाग द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों में छः माह में मोदी जी को 9 बार पैसा दिए जाने की बात कही गई है, जिसका कुल मूल्य 40.1 करोड़ रु. है। दिनांक 22 नवंबर, 2014 के इस दस्तावेज़ पर आयकर अधिकारियों तथा गवाहों के हस्ताक्षर भी हैं।

पैसा दिए जाने की तारीख, स्थान एवं वो व्यक्ति जिसे पैसा दिया गया तथा जिस व्यक्ति को वो पैसा पहुंचाया गया, उनके नाम भी इसमें बताए गए हैं। 

4.           चौंकाने वाली बात यह है कि ‘‘सहारा ग्रुप’’ के खिलाफ इस पूरे मामले को चुपचाप और गोपनीय तरीके से यथाशीघ्र निपटाने की कोशिश की जा रही है। इससे साफ हो जाता है कि मोदी सरकार इस पूरे मामले पर पर्दा डालकर इसे दबाने का प्रयास कर रही है।  

अब तक मिले तथ्यों से साफ है कि इस प्रक्रिया में ‘सहारा ग्रुप’ को निम्न फायदे हुए हैं :-

(a)  अब उसे 1910 करोड़ रु. की आय पर आयकर नहीं देना पड़ेगा; तथा

(b)  उसे पेनल्टी और सजा से पूरा संरक्षण मिल गया।

 

कृपया इंकमटैक्स सेटेलमेंट कमीशन का दिनांक 10.11.2016 का आदेश देखें (संलग्नक ।.1) 

5.           हम मोदी सरकार से निम्नलिखित सवालों के जवाब मांगते हैं :-   

(i)  ‘सहारा पेपर्स’ का पूरा मामला इंकमटैक्स सेटेलमेंट कमीशन ने केवल 16 दिनों और दिनांक 25.10.2016, 04.11.2016 तथा 07.11.2016 की तीन सुनवाईयों में ही निपटा दिया तथा 10.11.2016 को इस मामले में फैसला भी सुना दिया गया। इन 16 दिनों में से 4 दिन अवकाश था। तो वास्तव में सहारा पेपर्स का मामला केवल 12 दिनों में ही निपटा दिया गया। 

क्या यह बात दिलचस्प नहीं कि मोदी सरकार सहारा मामले को निपटाने में इतनी ज्यादा जल्दी क्यों दिखा रही है? क्या इससे संदेह उत्पन्न नहीं होता

(ii) सहारा समूह ने दिनांक 22.11.2014 को आयकर छापा पड़ने के बाद संशोधित आयकर भरा। सहारा समूह ने 1217 करोड़ रु. की अतिरिक्त आय दिखाई, जो पहले नहीं बताई गई थी। जब्त किए गए दस्तावेज़ों एवं ‘सहारा समूह’ की स्वीकारोक्ति के आधार पर आय की गणना करने के बाद इंकमटैक्स सेटेलमेंट कमीशन ने 1910.76 करोड़ रु. की कर योग्य आय निकाली।  

सहारा समूह द्वारा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ को दिए गए दस्तावेजों से साल 2009-10 से लेकर साल 2012-13 के बीच केवल 9.7 करोड़ रु. के खर्च का खुलासा हुआ। इसके विपरीत इंकमटैक्स सेटेलमेंट कमीशन ने सहारा समूह को साल 2009-10 से 2014-15 के बीच 1956.50 करोड़ रु. के ऑपरेशनल खर्च की अनुमति दी। इसका परिणाम यह हुआ कि सहारा पर छापे एवं कंप्यूटर रिकॉर्ड, एक्सेल शीट तथा दस्तावेजों से निकाली गई 1910 करोड़ रु. की कर योग्य आय में सहारा समूह को 100 फीसदी की छूट मिल गई।  

प्रश्न यह उठता है कि सहारा समूह को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ को बताए गए खर्च के 150 से 200 गुना तक खर्च दिखाने की स्वीकृति क्यों दी गई? सहारा समूह को इस तरह छिपाई गई आय पर छूट प्राप्त करने की अनुमति क्यों दी गई? क्या इससे यह प्रदर्शित नहीं होता है कि केंद्र सरकार उस कंपनी के प्रति उदार रवैया अपनाए हुए है, जो हजारों करोड़ रु. की आय को छिपाने की दोषी है?

 

(iii)      दिनांक 22.11.2014 को सहारा पर छापे में 137 करोड़ रु. जब्त किए गए। इसका परिणाम यह हुआ कि इंकमटैक्स सेटेलमेंट कमीशन ने 137 करोड़ रु. की राशि पर ही कर लगाने का आदेश जारी किया।

इससे भी ज्यादा चौंकानेवाली बात यह है कि सहारा समूह को पेनल्टी तथा सजा से पूरी रियायत दे दी गई। आयकर कानून की धारा 271 के तहत 100 से 300 प्रतिशत की पेनल्टी तथा धारा 276 के तहत सजा का प्रावधान है। तो फिर सहारा समूह को यह रियायत क्यों दी गई?

 

(iv) इंकमटैक्स सेटेलमेंट कमीशन ने 22.09.2016 को निम्नलिखित खुलासा किया :- 

‘‘8.......... अभी तक जो कागजात और कंप्यूटर प्रिंटआउट जब्त किए गए हैं, उनसे साफ होता है कि कैश की लेन देन की गई है। विभाग का मानना है कि रिकॉर्ड किए गए बयानों तथा तृतीय पक्ष से की गई पूछताछ के आधार पर ये कागजात सबूत के तौर पर प्रयोग करने योग्य हैं........... बंदोबस्त आवेदन में पेश की गई 1.70 करोड़ रु. की आय की गणना तथा जब्त किए गए कागजातों की उपयोगिता के लिए आगे जांच किए जाने की जरूरत है, जो बाद की पेशियों में की जा सकती है...’’ 

यहां तक कि सेटेलमेंट कमीशन ने अपने दिनांक 10.11.2016 के आदेश (संलग्नक ।.1) में स्वीकार किया है कि पैसे की लेनदेन साबित करने वाले इन दस्तावेजों तथा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का मालिक सहारा समूह है। हालांकि यह भी कहा गया है कि विभाग को इसकी पुष्टि करने वाले प्रमाण भी इकट्ठे करने थे। गौरतलब बात है ‘‘... 245क्;4द्ध की पेशियों में हमने जो कागजात देखे, वो पैसा लिए या दिए जाने के सबूत पर ज्यादा प्रकाश नहीं डालते हैं। हमने यह भी देखा कि विभाग ने कोई भी पुष्टि करने वाला प्रमाण इकट्ठा नहीं किया...... इस मामले में प्रतिपक्ष के बयानों को ध्यान से सुनने के बाद हम इस फैसले पर पहुंचे हैं कि इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि इन दस्तावेजों का मालिक कौन है। लेकिन कागजात तथा इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज सबूत के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं, यह बात प्रमाणित नहीं हो सकी...’’ 

उपरोक्त बातों पर गौर करने के बाद क्या यह बात साफ नहीं हो जाती है कि इंकमटैक्स सेटेलमेंट कमीशन के दिनांक 22.09.2016 के आदेश में रिकॉर्ड किए गए सहारा कागजातों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच नहीं की गई?

क्या मोदी सरकार इस बात का जवाब दे सकती है कि दिए गए पैसे को प्रमाणित करने के लिए इसकी पुष्टि करने वाले सबूत इकट्ठे क्यों नहीं किए गए? क्या ऐसा इसलिए है क्योंकि इस मामले में शक की सुई सीधे प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी के ऊपर है? क्या इस बात से यह साफ नहीं हो जाता कि सच्चाई पर पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्यों की अनदेखी की गई?

 

(v)  क्या यह सही नहीं है कि फाईनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) ने दिनांक 28.04.2013 को सहारा समूह के 4574 बैंक खातों में संदेहास्पद लेन-देन की सूचना दी थी, जिसकी जानकारी दिनांक 03.05.2013 को बैंक खातों के विवरण के साथ एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट को भी दी गई? एफआईयू एवं ईडी के दो आदेशों की प्रति क्रमशः संलग्नक ।.2 एवं ।.3 में संलग्न है।  

मोदी सरकार ने इस मामले की जांच क्यों नहीं की और सहारा समूह के 4574 बैंक खातों के बारे में मिली महत्वपूर्ण जानकारी पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की

क्या प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी को देश की 125 करोड़ जनता को इन सवालों के जवाब नहीं देने चाहिए?

 


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