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Press Releases

Press briefing of Dr. Abhishek Manu Singhvi, MP 10-03-2017


https://www.youtube.com/watch?v=BPWB0M0geU8&feature=youtu.be


Dr. Singhvi wished everybody a very happy and warm Holi.


 
Dr. Singhvi said whoever wins tomorrow respectively in the different States, it will be a victory for democracy, it will be a victory for voters, a victory for the winning party, a victory for the winning candidate and a victory of India. Having said that, let me reiterate very categorically that we are supremely, strongly and comprehensively confident of victory in each of the States on our own and in Uttar Pradesh in the alliance form. But more than that, we are proud that we have fought elections with a straight bat. We have fought elections on the front foot and we have fought elections without resorting to subterfuge, to divisiveness or to manipulation, I don't think something for which each and every party can claim credit for.
 
A word on the Exit Polls – those who do not learn the lessons of history are condemned to repeat its errors - 2009 elections are a classic example when most Exit Polls got it not only wrong but grievously wrong. And even those who went towards the Congress Party underestimated by more than 25-30% and  I do not want to say it, you will recall as to how many of you not individually you but collectively you stopped doing Exit Polls after that.
 
In Bihar less than two years ago, most Exit Polls gave the alliance110-115 seats. We got over 180 in the alliance. In Tamil Nadu pollsters again got it completely wrong. So let us keep our balance, let us respect democracy, let us respect the intelligence of voters and treat it only as an attempt by someone - may be bonafide – but the reason why Exit Polls, though definitely better than Opinion Polls, get it wrong frequently is that they are most successful in a homogenous society - homogeneity in income pattern, in living standards. They are automatically far-far less than accurate in Planet Earth's most diverse part i.e. India. Diversity is another synonym for India and no Exit Polls can match the dynamism of Indian diversity, even more so, in States like UP and Bihar which even within India are more diverse than other States. So, as I said earlier, let us look at it, not only with a pinch of salt, perhaps with a bucketful of salt, perhaps with a tub of salt. Let me reiterate that demonetization will remain a historical blunder irrespective of results. Let me reiterate that the kind of language used in the campaign by top BJPfunctionaries including the President of that Party and the Prime Minister of the country. The kind of idioms employed the kind of symbolism created, the kind of divisiveness, atmospherics attempted. These are not going to be condoned by any result any which way and these are and will remain against the Idea of India and against the ethos of India.

The Prime Minister must be singled out to having been acted in a worse proportion to the stature of office he holds, in worse proportion in terms of cheap tactics, hitting below the belt and analogies which do not behove the high Office of the PM of this great country and stooping not to conquer but stooping to divide, stooping to debase and devalue, stooping to insult. I think these will remain important takeaways from the Nation as we await the results because ultimately we are all servants of democracy and instruments of democracy and only tomorrow ultimate emperor of the democracy – the voter – will decide. 


डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए सभी को होली की शुभकामनाएं दी। कल कोई भी जीतता है, विजय कहीं भी होती है, सबसे पहले वो गणतंत्र और लोकतंत्र की बहुत भारी विजय होगी। उसके बाद वो विजय उस पार्टी के लिए जो जीतती है, उस कैंडिडेट के लिए और वोटर के लिए है अहम रुप से और अंततोगता बहुत अहमियत के साथ भारत के लिए। ये विजय ही है, एक प्रकार से ये हार किसी के लिए नहीं है। ये कहने के बाद मैं आपको बड़े स्पष्ट रुप से कहना चाहता हूं कि हम पूरी तरह से विश्वास रखते हैं, हौसला रखते हैं, धैर्य रखते हैं और हम पूरी तरह से ये मान कर चलते हैं कि व्यापक रुप से विजय हमारी है। हर प्रदेश में और उत्तर प्रदेश में अलायंस के रुप में।

हमें अत्यंत गर्व है और संतोष है कि हमने ये पूरा चुनाव एक बड़े सीधे बैट के साथ अगर क्रिकेट का उदाहरण लिया जाए तो, किसी सिंद्धात के साथ समझौता किए बगैर, बिना विभाजन की राजनीति कार्यांवित कर, बिना धोखाधड़ी के और बिना अपमान की राजनीति से। एग्जिट पोल पर मैं कहना चाहता हूं कि इतिहास को भूलना आसान है। 2009 इतना दूर नहीं है। 2009 में कितनी बड़ी गलती हुई थी एग्जिट पोल के द्वारा, शायद हम भूल गए हैं बहुत जल्द। यहाँ तक की आपने ही घोषणा कर दी थी कि हम एग्जिट पोल ही नहीं दिखाएंगे। दूर की बात नहीं है। अभी दो वर्ष से कम की बात है बिहार में कई एग्जिट पोल ने 110-115 के आंकड़े दिए, गठबंधन के 180 से ज्यादा आए। तमिलनाडु में हुआ है। कई बार हुआ है। इसका कारण है। इसका एक स्टेटिस्टिकल कारण है, सामाजिक कारण है, एक एतिहासिक कारण है। सरल रुप से कारण ये है कि एग्जिट पोल ऑपिनियन पोल से बेहतर होता है लेकिन एग्जिट पोल कारगर होता है, प्रभावशाली होता है, जहाँ आमतौर से समानता है समाज में। समानता इंकम की मान लीजिए, जीवन के स्तर की मान लीजिए, शैली की मान लीजिए। समानता के उपर ही एग्जिट पोल आधारित होता है।

विश्व में सबसे ज्यादा विविधता भारत में है। वह विविधता उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे प्रदेशों में और भी ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे संदर्भ में एग्जिट पोल के उपर आधार या आभार रखना पूर्णत: सही नहीं होगा। ये आपको इतिहास ने भी सिखाया है और वास्तविकता भी सिखाती है।

अंत में मैं ये बात कहना चाहता हूं कि कुछ गलतियाँ, महा भूल रहेंगी, गलतियाँ ही रहेंगी, चुनाव के परिणाम कुछ भी हों। अगर ऐतिहासिक एक जबरदस्त भयंकर गलती हुई है तो वो नोटबंदी की हुई है। चुनाव के परिणाम से वो गलती बदलेगी नहीं। जैसे मैंने शुरु में कहा कि विजय हमारी है। न वो चीजें बदलेंगी जो इस चुनाव में विशेष रुप से बीजेपी और विशेष रुप से बीजेपी के शीर्षस्त नेतृत्व एक पहचान हो गए हैं। जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग हुआ, जिस प्रकार के संकेतात्मक अपमानजनक शब्दों का प्रयोग हुआ। बार-बार भारत की अस्मिता और आत्मा को एक विभाजन की नीति और सोच से प्रेरित करने का प्रयत्न हुआ और जिस प्रकार से एक छोटी सी बात पर इतने बड़े महान देश के सम्मानित पद पर आसीन माननीय प्रधानमंत्री जी ने व्यंग्य किया, आक्रमण किया, मैं नहीं समझता ये उस पार्टी को,  उस पार्टी के अध्यक्ष को शोभा देता है या इस देश के प्रधानमंत्री को शोभा देता है। ये अटल सिंद्धात है, इनका चुनाव से संबंध नहीं है, ये सिंद्धात मानना हमारे भारत के लिए उसके गणतंत्र को बनाए रखने के लिए अति आवश्यक है।

एक अन्य प्रश्न पर कि आपने कहा कि नोटबंदी एक भयंकर भूल थी, अगर बीजेपी कल जीत जाती है तो क्या कांग्रेस मानेगी की नोटबंदी जैसी भयंकर भूल, भूल नहीं थी, श्री सिंघवी ने कहा कि भयंकर गलती आर्थिक नियम के विरुद्ध, सामाजिक कष्ट देने वाली, विश्व भर में किसी के समर्थन ना करने वाली चीज गलत ही रहेगी। चाहे आप चुनाव हारें या चाहे जीते। अगर मैं गाली-गलोच की या विभाजन की राजनीति करुंगा और किसी प्रकार से जीत जाउंगा तो उससे गाली-गलोच या विभाजन की राजनीति सही सिद्ध नहीं होती है। ये पहली बात समझना अति आवश्यक है। वही मापदंड अप्लाई कर रहे हैं हम नोटबंदी में। बिल्कुल हम संदेह नहीं रखते कि हम जीत रहे हैं, लेकिन ये कहना कि अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री या वो लोग जिनको अत्यंक कष्ट हुआ है, या हमारा आर्थिक ढांचा GDP से 1-2 प्रतिशत तो गिरने वाला है या विश्वभर की सोच इससे बदल सकती है कि जो आपने ऐतिहासिक भूल की है वो सही साबित हो गई है क्योंकि आप एक चुनाव जीत हए। ये मैं बड़ा स्पष्ट कहना चाहता हूं इसलिए ये मैंने पहले ही कहा।

On the question of Shri Rajeev Chandrashekhar's Private Member Bill, Dr. Singhvi said there were a diverse set of Speakers, as some of us including me suggested that though it is well intentioned, though it deserves to be commended for making the awareness attempt, it may not achieve anything extra because each and every one of the consequences prescribed in the Bill - stoppage of visa, stoppage of travel, stoppage of trade, stoppage of Most Favoured Nation, stoppage of fishing, there are 10-12 things given, each of these is possible by a mere executive notification even today.

So this Bill will add nothing more unless you provide for a calibrated set of consequences in case of Pakistan's complicity in any particular act. So, it is a symbolism, it is a sentiment, it is an expression of hope. To that extent, it has its place but beyond that, in terms of an Act of Parliament which has the consequence of compulsion or coercion on the Government, it has no value. In my address, I said that he should come up with a new Bill which has this kind of model which I suggested in the House.

 
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