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Press Releases

Highlights of the press briefing of Dr. C.P. Joshi 16-03-2017


https://www.youtube.com/watch?v=iP5sPiimoE4

Dr. C.P. Joshi, General Secretary I/C, Sr. Spokesperson, AICC and former Union Minister addressed the media.

डॉ. सी.पी. जोशी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन संसदीय लोकतंत्र के लिए आत्मनिरीक्षण करने का दिन है। चुनाव परिणाम आने के बाद आज बहुमत से जनता ने जो फैसला दिया, पंजाब में नई सरकार बनी। हम मुबारकबाद देते हैं और आशा करते हैं कि नयी सरकार जनता की भावना के अनुरुप नया पंजाब बनाने के लिए हर वो कदम उठाएगी जिससे वहाँ की जनता की आशाएं पूरी हो सकें। हम आशा करते हैं कि विपक्ष और केन्द्रीय सरकार भी इस भूमिका में उनका साथ देंगे जिससे 'नया पंजाब' बन सके।

जैसा मैंने कहा कि आज का दिन संसदीय लोकतंत्र के लिए आत्मनिरीक्षण का है। मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं - अखिल भारतीय जनता कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेट्री की रुप में मुझे, रमेश चेनीथला जी और ऑस्कर फर्नाडिस जी को चुनाव परिणाम के बाद मणिपुर में सरकार बनाने की जिम्मेदारी के लिए पार्टी के परिपेक्ष्य से हमें नियुक्त किया गया था। मणिपुर एक बहुत सुदूर प्रदेश है। वहाँ पर जो राजनीतिक गतिविधियाँ थी उस समय उसके घटनाक्रम को आपके सामने रखूंगा जिससे आप समझ सकेंगे कि संसदीय लोकतंत्र के लिए आत्मनिरीक्षण का दिन क्यों है।

परिणाम निकलने के बाद 28 लोगों को कांग्रेस के उम्मीदवारों जो जीत मिली, ये जीत ऐतिहासिक दृष्टि से चौथी बार 15 साल से एक ही व्यक्ति के नेतृत्व में जो कांग्रेस पार्टी से मुख्यमंत्री थे। कांग्रेस पार्टी को 28 सीटों का समर्थन मिला - 28 में से 25 एमएलए वो हैं दुबारा जीत कर आए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने भी 60 सीटों पर चुनाव लड़ा और उन्हें 21 सीटें मिली। 1 टीएमसी का सदस्य, 1 जनशक्ति पार्टी का, 4 सदस्य NPF, 4 सदस्य NPP पार्टी के और 1 सदस्य निर्दलीय जीता, तो कुल 60 सीटें थीं। कांग्रेस पार्टी ने 12 तारीख को दिन में मीटिंग की और मीटिंग में नए नेता के रुप में और ईबीबो सिंह उनको चुना गया। ढ़ाई बजे के करीब ये चुनाव की सब प्रक्रिया पार्टी ने पूरी की और उस समय टीएमसी का सदस्य भी हमारे साथ थे। एक निर्दलिय सदस्य जो असम के पास के बॉर्डर से जीत कर आए थे। निर्दलिय सदस्य को कांग्रेस के प्रदेश के मंत्री गोहाटी से प्लेन में इम्फाल लेकर आए ताकि वो हमारी पार्टी में आ सके, क्योंकि वो हमारा समर्थन करना चाहते थे। संसद के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि जैसे ही वो इम्फाल एयरपोर्ट पर उतरे, CISF के 150-200 व्यक्तियों ने उस विधायक को जो कांग्रेस मंत्री के साथ आया, उसे एयरपोर्ट पर डिटेन कर दिया। मंत्री ने कहा ये मेरे साथ हैं, लेकिन उनको कहा कि नहीं आपका कोई लेना-देना नहीं है। तो भारतीय जनता पार्टी के साथ CISF ने उन्हें डिटेन रखा और उसके बाद स्पेशल प्लेन से उन्हें इम्फाल से गोवाहटी भेज दिया गया।

कांग्रेस पार्टी ने ये सब चीजें वहाँ के CISF के अधिकारियों के सामने रखी और कांग्रेस पार्टी का जो मंत्री था उन्होंने एफआईआर भी दर्ज की। हम जानना चाहते हैं और पूछना चाहते हैं कि CISF को भेज कर कैसे जनता के जनमत को चुराए जाने की कोशिश की जा रही है? क्या वो आतंकवादी थे, किसने उनको रोकने का आदेश दिया? क्यों CISF ने उनको डिटेंड किया और एयरपोर्ट पर रोक कर रखा और क्यों उन्हें स्पेशल प्लेन से भेजा और मणिपुर में नहीं आने दिया? इस घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी को ये मालूम था कि उनके 21 सदस्य हैं। NPP और NPF का अलायंस उस समय तक नहीं हुआ था और ना ही प्री अलायंस हुआ था। जो भी मुख्यमंत्री बने हैं वो उस समय भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता थे। जो जनता के बीच में जाकर प्रचार कर रहे थे कि हम चुनाव के बाद और पहले NPP और NPF के साथ समझौता नहीं करेंगे।

राम माधव जी जो उत्तर पूर्व के इंचार्ज थे, वो असम के मंत्री हेमंत विसवा शर्मा जी के साथ वहाँ मौजूद थे। शाम को लगभग 7:30 बजे बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेस की और बताया कि उन्होंने गवर्नर से मिलकर दावा पेश करने का मन बनाया है। वो माननीय गवर्नर महोदय के पास गए जहाँ उन्होंने NPF के 4 एमएलए की गैर-मौजदूगी में उन्हें अपने साथ बताया। इसके अलावा NPF के प्रदेश अध्यक्ष की जगह राष्ट्रीय अध्यक्ष के लैटरपैड पर 4 एमएलए को अपने पाले में दिखाया। बीजेपी के 21 सदस्यों का समर्थन राष्ट्रीय अध्यक्ष की जगह प्रदेश अध्यक्ष के पत्र पर दिखाया। साथ में 1 टीएमसी का सदस्य, 1 कांग्रेस का निर्वाचित एमएलए को भी गैर-कानूनी तरीके से अपने साथ होने का दावा पेश किया। निर्दलिय विधायक जो गायब कर दिया गया था, उसे भी अपने साथ दिखाते हुए 32 सदस्यों का झूठा बहुमत जोड़-तोड़ से बना दिया। यह सब तब हुआ जबकि उन्होंने इस समय तक भारतीय जनता पार्टी का कोई भी विधायक दल का नेता नहीं चुना था। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी ने इलेक्टिड लिडर श्री ईबोबी सिंह, पीसीसी प्रेसिडेंट मणिपुर, पीसीसी प्रेसिडेंट NPP, वहाँ के स्टेट के प्रेसिडेंट जो कि डेमोक्रेसी का सिस्टम है, उनका प्रस्ताव लेकर गवर्नर के पास गए कि हमारे पास 28 कांग्रेस के चुने हुए प्रतिनिधी हैं, इसके अलावा 4 NPP के विधायकों का समर्थन पत्र भी गवर्नर को दिया। (डेमोक्रेसी में यह परिपार्टी है कि उसका प्रेसिडेंट लिखकर देता है गवर्नर को कि हमारी पार्टी का ये इलेक्डिट लिडर है एमएलए नहीं जाते हैं।) 28 विधायक कांग्रेस के और 4 NPP के, स्टेट के प्रेसिडेंट के हस्ताक्षर पर 32 व्यक्तियों का कांग्रेस का बहुमत, ये क्लेम गवर्नर साहब को 12 तारीख को रात को 10 बजे के करीब कर दिया था।

दुर्भाग्य की बात है 13 तारीख को 2 बजकर 38 मिनट पर गवर्नर मोहदय ने कॉन्फ्रेस की, उसमें कहा कि 32 एमएलए का समर्थन है बीजेपी को और जबकि 13 तारीख को उस समय तक भारतीय जनता पार्टी ने कोई लिडर नियुक्त नहीं किया था। कांग्रेस पार्टी ने 12 तारीख को लिखकर भेजा और गवर्नर महोदय ने उनको आमंत्रित नहीं किया।

It is a manufactured majority because they have not elected the Leader and Governor is saying that the BJP has the support of 32 MLAs. Governor never invites party; Governor invites the individual - elected representative. 

ये बड़ा दुर्भाग्य है कि संवैधानिक पद पर बैठा हुआ व्यक्ति सरकार में बैठी हुई पार्टी के 32 आदमियों के बहुमत को बता रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने अपना लिडर चुना 13 तारीख को। इस तरह मैन्यूफेक्चर्ड मैज्योरिटी जिसमें ना NPP मौजूद था और ना ही दूसरे व्यक्ति थे, उन्होंने 21 को अपना समर्थन दिया और जब गवर्नर के पास गए तो NPP के सदस्य नहीं थे और NPF की तरफ से भी लैटर गया। तो इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति नहीं हो सकती।

जिस पार्टी के 28 विधायक चुने हुए हों, 4 NPP के विधायकों का समर्थन हो इसके बावजूद गवर्नर ने कांग्रेस के चुने हुए नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया और अपनी मैज्योरिटी बनाने के लिए कांग्रेस के एक एमएलए की भी परेड करा दी। जो निर्दलिय एमएलए थे उन्हें भी जोड़ लिया। दुर्भाग्य की बात है मुख्यमंत्री ने शपथ दिला दी एक ऐसे विधायक को जो कि कांग्रेस के चिन्ह पर चुनकर आया है। तो क्या उसकी सदस्यता समाप्त नहीं हो जानी चाहिए। मुख्यमंत्री विरेन्द्र सिंह जी खुद लिख रहे हैं गवर्नर को कि श्री शाम कुमार आईएनसी एमएलए को भी मंत्री बना दीजिए।

आज की तारीख में आईएनसी 28 एमएलए हैं। आईएनसी के इलेक्टिड आदमी यदि एमएलए डिफेक्ट करता है तो उसको डिस्क्वालिफाईड करने का अधिकार स्पीकर को है - 10 शेड्यूल के अंतर्गत।

इसी तरह आज गोवा में भी एक विधायक ऐब्सेंट रहे क्योंकि मुख्यमंत्री जी को एमएलए बनना है। तो संसदीय लोकतंत्र में चुनाव होंगे, किसी पार्टी को बहुमत मिलेगा, किसी को नहीं मिलेगा। लेकिन जो स्टेंडर्ड प्रेक्टिस पार्लियामेंट सिस्टम की है कि स्टेट पार्टी का लिडर लिखकर भेजता है, एमएलए नहीं जाते हैं। हाउस में एमएलए किसके साथ हैं या नहीं हैं ये फैसला सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के बाद हाउस में होता है। तो लेजिटमेट क्लेम, 15 साल की सरकार, 28 एमएलए चुने हुए और 2 अलग स्टेट के, पार्टी के अध्यक्ष का लैटर और कांग्रेस पार्टी का लैटर, 32 विधायकों को बहुमत होने के बाद भी गवर्नर मैन्यूफैक्चर्ड मैज्योरिटी को शो कर रहे हैं और उसके बाद लिडर चुने हों और शपथ दिलाएं। तो जो गरिमापूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति हैं उनको भी ये जानना पड़ेगा कि स्टेट का प्रेसिडेंट 4 आदमी को लिख रहा है और नेशनल प्रेसिडेंट दूसरे आदमी को लिख रहा है और गवर्नर के पास 4 आदमी आ ही नहीं रहे हैं, उनको भी काउंट कर रहे हैं। तो ये जो हुआ है वो चिंता का विषय है।

भारतीय जनता पार्टी जो मोरल की बात करती है और प्रधानमंत्री जी जब चुनकर आए थे, संसद की सीढ़ी को उन्होंने नमन किया था- हम उनसे अपेक्षा कर रहे थे कि संसदीय परंपराओं का निर्वहन करेंगे। राजनीतिक गतिविधियाँ जो नोर्थ ईस्ट बॉर्डर स्टेट हैं, वहाँ बड़ी तकलिफ के बाद कांग्रेस ने सरकार दी थी, वहाँ इस तरह से अगर राजनीतिक निर्णय किए जाएंगे तो आने वाले समय में बहुत बड़ी चुनौति होगी और चिंता की बात होगी। सभी राजनीतिक पार्टियों को इस संबंध में आत्मनिरीक्षण करने की जरुरत है। यदि बहुमत नहीं आए तो जो निर्णय है उसको माना जाए। सिंगल लार्जेस्ट पार्टी है, बहुमत है तो कौन मुख्यमंत्री बनेगा, ये उसका फैसला है- सुप्रीम कोर्ट ने फैसला भी दिया है। हम आशा करते हैं कि अगर स्थितियाँ स्पष्ट नहीं होंगी तो संसद में जनमत को इस तरह से नहीं खरीदा जाएगा।

हम आशा करते हैं प्रेस से जो कि समाज का चौथा स्तंभ है कि आने वाले समय में जनता के सामने इन तथ्यों को लाएं और देखें कि हमारे आरोपों में आधार है या नहीं। अगर नहीं है तो हम क्षमा मांगेगे। लेकिन आपकी जिम्मेवारी है कि देश की जनता को बताएं कि जो भी हुआ है वो गलत है और संसदीय लोकतंत्र को कैसे ठीक रख सकते हैं, ये हम सब की जिम्मेदारी है।

एक प्रश्न पर कि आपके विधायकों ने खंडन नहीं किया है कि वो बीजेपी के साथ हैं या नहीं, डॉ. जोशी ने कहा कि अगर इस पर कार्यवाही नहीं होती तो पार्टी में चुनाव होने का मतलब ही नहीं रह जाएगा। पार्टियों में सिस्टिम से चुने हुए प्रतिनिधी कैसे डिस्क्वालिफाईड होंगे, आया राम गया राम की स्थिति को रोकने के लिए 10 शेड्यूल है। तो जो पार्टी को छोड़ते हैं उनका क्या करना है इसका निर्णय करने का अधिकार 10 शेड्यूल में स्पीकर के पास है।

एक प्रश्न पर कि जब आपको पता था कि चुनाव के बाद निर्णय लेना है, तो आप जनरल सेक्रेट्री हैं, देर से क्यों पहुंचे मणिपुर में और आशंका थी कि बीजेपी सबकुछ कर सकती थी, डॉ. जोशी ने कहा कि चुनाव परिणाम 11 तारीख को, शाम को 6 बजे तक नहीं निकला था – सीटों की संख्या 22, 23, 25 के करीब चल रही थी। 12 तारीख को सुबह साढ़े 7 बजे फ्लाईट थी, उसमें मैं, रमेश जी और ऑस्कर फर्नाडिस जी साथ थे। वहाँ पहुंचने पर हमारे 28 विधायक मौजूद थे, एक टीएमसी का सदस्य मौजूद था, 29 आदमियों ने पार्टी के लिडर को चुना है। हम CISF से लड़ने नहीं गए थे। कांग्रेस पार्टी ने विधायकों के साथ में बैठकर निर्णय किया और जिसका नाम गया वो खुद मौजूद था।

एक अन्य प्रश्न पर कि मणिपुर में कितने दिन की सरकार रहेगी, डॉ. जोशी ने कहा कि गवर्नर के शपथ दिलाने के बाद कब मैज्योरिटी टेस्ट होगा ये दिन अभी निश्चित नहीं किया है। हमारी रणनीति संसदीय लोकतंत्र में जैसे जो दिल्ली में सरकार है वो संसद के लोकतंत्र के नियम का पालन नहीं करना चाहती, नियम और कानून में रेफरी की भूमिका की बजाए स्वयं पार्टी बन जाए, एक गरिमापूर्ण पद पर बैठा व्यक्ति है वो अपनी जिम्मेदारी का पालन ना करे, तो जनता को जागरुक करने का काम एक राजनीतिक पार्टी ही कर सकती है।

एक अन्य प्रश्न पर कि आप लिगल रेमेडिज क्या है, डॉ. जोशी ने कहा कि लिगल रेमेडिज ये है कि आपने शपथ दिला दी है तो आप कोर्ट में जाईए। भारतीय जनता पार्टी को उत्तराखंड के बारे में, अरुणाचल प्रदेश के बारे में फैसला मालूम है। 6 महीने की सरकार के बाद सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया लोकतंत्र के हक में। ये सबको मालूम है। सारे फैसले कोर्ट में ही करें। संसदीय लोकतंत्र में कोर्ट की भूमिका है, गवर्नर की भूमिका, पार्टी की भूमिका, पार्टी अध्यक्ष की भूमिका अगर सबकुछ कोर्ट में ही करेंगे तो लोकतंत्र कमजोर होगा। जब फैसला होगा तभी तो राष्ट्रपति के पास जाएंगे। पहले गवर्नर तारीख तो फिक्स करे।

On the question that all the criticism being leveled on the leadership and the Congress Party, Dr. Joshi said political narrative has changed in the country. In 2014 elections, the election management and political narrative completely changed. Shri Rahul Gandhi was the Leader who sensed it first and was also the one who changed the narrative of Bihar - Congress Party and RJD were together. It was Nitish Ji who came forward and after that Laloo Ji joined and see what was the result of Bihar. We successfully fought Bihar and BJP could do nothing about it.

In West Bengal, we entered into an adjustment of seats not alliance – and either it will be with TMC or with this alliance, where is BJP? It is Shri Rahul Gandhi who decided to go with Akhilesh Ji. You see in 2014, SP vote was only 23%, Congress vote share was 7.5% and vote of the BJP was 43%. They have more than 300 seats but their vote is not 43%, their vote has come down to 39% - 4% vote is reduced but still the alliance of Akhilesh Ji and Rahul Ji is having vote %age of 29%, it was because of very strong liking and disliking between Ms. Mayawati Ji and Akhilesh Ji, we could not have a Mahagathbandhan like Bihar but today I am telling you 23% of Mayawati Ji's vote and 29% vote of Samajwadi Party and Congress, even after having an anti-incumbency, totals to 53%. Wait for 2019, there will be no space to BJP in UP.

Dr. Joshi said they were good Managers. In 2004 how many seats they had? For 10 years we have given a good Government to the country. There are some vacancies where we have to replace some role - senior people who can be good organizers, young people who have good experience, so by the end of 2018, you will see that we are heading along with a proper strategy. Also none of the senior leaders said that Rahul Gandhi Ji is not our leader, everybody is saying that he is our leader.

On the question whether there will be a Mahagathbandhan, Dr. Joshi said we will do everything that is required to challenge and expose the Modi politics but these will be looking at the State specific political challenges. It can vary from state to state. We will see to it that in 2019, we will give formidable challenges to Narendra Modi and his brand of his politics and under Rahul Gandhi Ji.

Dr. Joshi further said what happened in Bihar – Bihar Nitish Ji contested independently, we will have every state wherever we can give a challenge to BJP, we will go in that direction.

It is a fact that the political narrative has changed and today we are fighting against the new narratives. In fighting that there is a space in few states, we are fighting with BJP, in few states and we have organizational weakness. We have to explore all possibilities.

On the question that from 2014 onwards the narrative has changed since 2013 Shri Rahul Gandhi is the Congress Vice President and will the Congress Party change its ideology, Dr. Joshi said Congress will never change its ideology but to fight this new kind of propaganda politics, we have to prepare ourselves to face the new challenges. That is why I have given examples of Bihar and West Bengal etc. We are aware about the challenges and asked as to who is the National Party which is standing against Mr. Modi; also takes this opportunity to ask you, it is the Congress Party which is primarily opposing the ideology of BJP today.  The legitimate central space is with Shri Rahul Gandhi Ji. In 2019, we will see and prepare as to how to defeat the BJP?

 
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