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MEDIA

Press Releases

Highlights of the press briefing of Shri Partap Singh Bajwa, MP 17-03-2017

https://www.youtube.com/watch?v=Al7EWRDGwnA&feature=youtu.be                                                        

 

Shri Partap Singh Bajwa, MP addressed the media. 

श्री प्रताप सिंह बाजवा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज एक महत्वपुर्ण मुद्दा मैं आपके सामने लेकर आया हूं जिसपर राज्यसभा में भी चर्चा हुई। गोवा में पिछले दिनों सरकार बनी है और इसमें माननीय गवर्नर साहिबा का रोल है - उनके खुद के छपे हुए बयान हैं, जो पूरी तरह से उनकी संवैधानिक जिम्मेवारी के विपरीत है। संविधान में गवर्नर का रोल बिल्कुल स्पष्ट है। परंतु जो बयान छपे हैं उनको देखने से लगता है कि वो गवर्नर का रोल कम कर रही हैं, मुख्यमंत्री का रोल ज्यादा निभा रही हैं। ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। आज हमने राज्यसभा में इस पर चर्चा की मांग की, लेकिन हमें समय नहीं दिया गया। हम सबसे पहले ये बात बताना चाहते हैं कि जो सरकार वहाँ बनी हैं वो गैर-कानूनी है। गवर्नर ने एक साक्षात्कार में स्वयं कहा है कि- "She heard they could not elect their legislative Party Leader nor get enough support.”  

हम गवर्नर साहिबा से पूछना चाहते हैं कि आपने ये रिपोर्ट कहाँ से ली? क्या आपकी कांग्रेस पार्टी से कोई बात हुई? आपको क्या ये जानकारी आकाशवाणी से मिली या फिर आपने अंदाजा लगा लिया कि कांग्रेस के पास मैज्योरिटी नहीं है और इनका लिडर का चुनाव नहीं हुआ है।  

Shri Bajwa said in such circumstances Governor has to directly either talk to the Advocate General of India or apprise Hon'ble President of India with the status report. What we find unconstitutional here is that instead of seeking directions from either of them, she says that at 6.30 pm I get a call from Mr. Parrikar where he wanted to meet me. I called him. 

सविंधान ये कहता है कि अगर गवर्नर के सामने कभी ऐसी समस्या आए तो वो सीधा एडवोकेट जनरल ऑफ इंडिया से बात करें या फिर राष्ट्रपति जी को अपनी रिपोर्ट दें कि ये परिस्थिति है, आप बताईए कि हमें ऐसी परिस्थिति में क्या करना चाहिए? बजाए इसके उन्होंने कहा कि मैं पार्रिकर जी से मिली, मैंने उनको बुलाया और उनकी सारी बात सुनी, उनके एमएलए साथ में थे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 'मैं एक साईकोलोजिस्ट हूं', ये भी हमने पहली बार सुना कि गवर्नर के साथ साईकोलोजिस्ट का होना जरुरी है, जिससे उन्होंने कहा कि मैंने अंदाजा लगा लिया कि ये हस्ताक्षर सभी ठीक हैं और रिपोर्ट भी सही है। उसके बाद एडवोकेट जनरल ऑफ इंडिया और राष्ट्रपति जी से बात करने की बजाए उन्होंने वित्त मंत्री जी से बात की।  

Shri Bajwa said she then gives a call to the Hon'ble Finance Minister of India Shri Arun Jaitley Ji who is nowhere connected with this issue. He is a party; he is a BJP Minister in the present Government at Centre. This shows beyond doubt that it was the Government of India which was prevailing upon her. 

अगर ये खबर समाचार पत्रों में नहीं छपी होती और शोर-गुल्ल नहीं हुआ होता तो हमारी  बात किसी ने नहीं सुननी थी।

सरकार बनने के बाद हम सुप्रीम कोर्ट में भी गए जहाँ कहा गया कि आपने अपना लिडर नहीं चुना। अब जब ये सब बातें गवर्नर जी की तरफ से आ रही हैं तो प्रश्न उठता है कि एडवोकेट जनरल ऑफ इंडिया और राष्ट्रपति जी से जो जानकारी पूछनी चाहिए थी बजाए उनके गवर्नर साहिबा ने भाजपा के केन्द्रीय मंत्री श्री अरुण जेटली जी से पूछी, जो कि एक तरह से गैर-कानूनी है क्योंकि इस विषय में राय देने का अधिकार उनका नहीं है। ये असंवैधानिक तरीके से काम किया गया है।   

इस विषय पर हमारी 3 महत्वपूर्ण मांगे हैं जो हम आपके सामने रख रहे हैं।  

Shri Bajwa said that this reveals that the Constitutional Head of Goa in this case the Governor had acted on the directions of Shri Arun Jaitley Ji.  Therefore, the Indian National Congress demands following three – 

  1. These revelations demonstrate that the act of the Governor to consult the Union Finance Minister and not the President of India, is a serious matter of constitutional impropriety and an unpardonable dereliction of duty. 
  1. Since the Union Finance Minister Shri Arun Jaitley could not have advised the Governor with respect to Government Formation, why should the Prime Minister not take action against the Finance Minister? Or are we to assume that he was authorized by the dirty tricks department of the BJP? 
  1. We urge the Honourable President of India to exercise his powers under Art 156 (1) and immediately dismiss the Governor of Goa for abdicating her Constitutional responsibilities and oath of secrecy. Recently, the President of India had dismissed the Arunachal Pradesh Governor for similar acts of impropriety. 

It has already happened just a couple of months earlier. A similar situation arose where we are extremely thankful to uphold the Constitution of India. The Hon'ble President has acted and acted swiftly. We are again requesting the Hon'ble President through a petition in this regard.  Their role has been completely defied. This is not right and unconstitutional. 

आप पत्रकारों के माध्यम से हम अपनी शिकायत / पेटिशन माननीय राष्ट्रपति जी के संज्ञान में डाल रहे हैं।  उन्हें इसके खिलाफ सख्त कदम उठाना चाहिए। एक के खिलाफ एक्शन लेंगे तो बाकि गवर्नर भी ठीक रहेंगे। संविधान में बकायदा गवर्नर का रोल लिखा गया है। ये जो कुछ हो रहा है ये बिल्कुल गलत है। इसलिए हमने इस मुद्दे को आपके सामने रखा है।  

एक प्रश्न पर कि क्या आप सिर्फ गोवा के गवर्नर के बारे में कह रहे हैं, श्री बाजवा ने कहा कि गोवा के गवर्नर ने ये खुद कबूल कर लिया है। मणिपुर की जो बात है तो वहाँ अभी राजभवन में शक्ति परिक्षण की तारीख की घोषणा ही नहीं की है और अगर कोई ऐसी गैर-कानूनी बात वहाँ से भी निकल कर आती है तो हम जरुर आवाज उठाएंगे। गोवा के गवर्नर ने जो किया है वो बिल्कुल ही असंवैधानिक है, जो हमने आपके सामने रखा है।  

मणिशंकर अय्यर जी के बयान पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री बाजवा ने कहा कि मणिशंकर अय्यर जी के बयान का उनका निजी बयान है, उन्होंने क्या कहा है क्या नहीं, मैं उस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। 

श्री मोदी द्वारा किसानों के ऋण माफी के संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री बाजवा ने कहा कि इस देश का लंबे समय से पेट पंजाब, हरियाणा और वेस्टर्न यूपी के किसान गेहूं देकर, चावल देकर, कॉटन देकर, चीनी देकर भरते रहे। आप देखिए 2006 में यूपीए-1 ने किसानों का  77 हजार करोड़ रुपया माफ किया था। आप यूपी के किसानों का ऋण माफ करना चाहते हैं तो हमें इस पर कोई आप्पत्ति नहीं है, हम इसका स्वागत करते हैं क्योंकि यह हमारी मांग थी। हमारे नेता राहुल गाँधी जी ने यूपी के अलावा देश के बाकि हिस्सों के किसानों के लिए भी ऋण माफी की मांग की थी। सबसे ज्यादा किसानों की आत्महत्याएं हुई हैं वो पंजाब और महाराष्ट्र में हुई हैं। मैं आपको बताना चाहता हूं कि पिछले 3 महिने से तमिलनाडू के किसान दयनीय हालत में जंतर-मंतर पर बैठे हुए हैं अपने लोगों की आत्महत्याओं के विरोध में। इससे ज्यादा और घीनौनी बात क्या हो सकती है? मोदी जी को हम बताना चाहते हैं कि कच्चे तेल से मोदी सरकार को 2 लाख करोड़ रुपया बच रहे हैं। अगर आप 35-40 बड़े उद्योगपतियों का 1 लाख 14 करोड़ का कर्जा माफ कर सकते हैं, ब्याज माफ कर सकते हैं। तो कृपा कीजिए कि जो प्रोफिट आपको वहाँ से आ रहा है, उसमें से किसानों की मदद कीजिए। आप सिर्फ एक प्रदेश के किसानों को मत देखिए, देश के सभी किसानों की तरफ ध्यान दीजिए। हमारा सिर्फ यही कहना है। राहुल गाँधी जी ने पंजाब में भी किसानों के बारे में ध्यान देने के लिए कहा था। कश्मीर से कन्याकुमारी तक आप इसे लेकर जाईए और इसका फायदा देश के सभी किसानों को मिलना चाहिए। 

On the question whether the Indian National Congress is going to meet the President of India along with a delegation, Shri Bajwa said this would be decided by the senior Leaders of the Party who will be meeting in this regard. We will discuss it on priority after the media revelations have come out which are very serious and totally unconstitutional. 

 On the question of loan waiver as promised by the Prime Minister on the line of Uttar Pradesh, Shri Bajwa said that firstly I would like to welcome Prime Minister's decision to waive loan of farmers of Uttar Pradesh at the same time, farming community in every State of India. I would like to reminder him that State like Punjab, which has been contributing for the last 70 years the maximum to the central pool to feed the millions of Indians. We would want that Prime Minister should think about waiving the loan of all the farmers of the country. 

On the question that loan waiver was started by the UPA Government, Shri Bajwa said that the present Congress Government in Punjab is committed to the cause of the farmers. What we are demanding is to not to confine it to only Uttar Pradesh? We should take it to the whole of the country from, Kashmir to Kanyakumari and farmers from every corner should be benefitted. 

On the question of managing the finances by the Punjab Government, Shri Bajwa Said Punjab is not bankrupt. The policies of the Akali Government were bankrupt because everything was going to the pockets of the most corrupt regime ever since the independence of India. Once Punjab would be back on its own within five years, the economy is coming back and we are committed to extending this loan waiver of Rs. 67,000 Crore. This is the commitment of the Government of Punjab. We will do it. We will find ways and means to do this. It was the Congress Party which is committed to the farmers and had waived loans to the extent of Rs. 77,000/- crore.


 
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