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Highlights of the press briefing of Shri P L Punia, MP 20-3-2017

 

 https://www.youtube.com/watch?v=CCWJLxKepjg&feature=youtu.be

श्री पी. एल. पुनिया ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज हम आपके सामने 'किसानों के मुद्दे' को रखना चाहते हैं। संसद के भी दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया गया। वैसे तो वित्तिय वर्ष खत्म हो रहा है। दूसरी तरह फसल कटाई का समय भी शुरु हो चुका है। ये एक ऐसा समय होता है जब किसान, मजदूर बहुत प्रसन्न होता है उसकी समृद्धि बढ़ने वाली होती है। आर्थिक सुदृढ़ता ना केवल उसके परिवार के लिए बल्कि पूरे देश और समाज के लिए होती है। अगर किसानों की फॉर्म सेक्टर की प्रोग्रेस सही होती है तो क्रय शक्ति ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ जाती है। इन्डस्ट्रीयल सेक्टर, प्रोडेक्शन और मार्किट सेक्टर पर प्रभाव पड़ता है। परंतु इन सबके बीच में किसान आज सबसे बुरी दशा में है।

 
अभी 2015 के NCRB  के आंकड़े रिलिज हुए। उसमें जिसमें फॉर्मरस/ कल्टिवेटर और एग्रीकल्चर लेबर को शामिल करते हुए, (12602 में 8060 फॉर्मरस कल्टिवेटर हैं और 4595 एग्रीकल्चर लेबर हैं) दिखाया है कि 12,602 कुल किसानों ने 2015 में आत्महत्या कर ली। हमारा जो अन्नदाता है, किसान है उसकी हालत दयनीय है और किस प्रकार से सरकार के द्वारा किसानों की उपेक्षा की जा रही है।


भारत सरकार कहती है कि फॉर्म सेक्टर, एग्रीकल्चर सेक्टर में 6 प्रतिशत ग्रोथ रेट है, लेकिन वास्तविकता कुछ और है। कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक, मणिपुर से लेकर महाराष्ट्र तक किसान आत्महत्या कर रहा है। दक्षिण में देख लीजिए, तमिलनाडू के किसान जंतर- मंतर पर बैठे हुए हैं। मरे हुए किसान जिसने आत्महत्या की थी, उनकी हड्डियाँ प्रतीक के रुप में लेकर बैठे हैं जो दिखाता है कि वहाँ के किसानों की दशा क्या है। इसी तरह से आँध्रप्रदेश है, तेलंगाना है, केरल है वहाँ पर भी इसी तरह की स्थिति है। उत्तर-पूर्व में आत्महत्या जैसी बातें सुनी ही नहीं जाती हैं। मैं समझता हूं कि दशक के बाद 4 गुना किसानों के आत्महत्या की बढ़ोतरी के आंकड़े आए हैं। 21 से बढ़कर 95 किसानों ने आत्महत्या की जिसमें असम में 84, अरुणाचल प्रदेश में 7, मेघालय में 2, मणिपुर में 1 और त्रिपुरा में 1।


अगर बड़े राज्यों का देखा जाए तो महाराष्ट्र की स्थिति तो जगजाहिर है। वहाँ पर तो 4291, कर्नाटक - 1579, तेलंगाना - 1400, मध्यप्रदेश - 1290, छत्तीसगढ़ – 954, आँध्र प्रदेश – 916, तमिलनाडू- 606 और ये किसान मजबूर होकर इस कदम को उठाता है। एक इंसान को अपनी जान सबसे ज्यादा प्यारी होती है। अगर एक किसान उसको भी खोने को तैयार है तो विषम परिस्थितियाँ सामने आई हैं, उसके चलते ये कदम उठाया। वर्तमान सरकार के द्वारा जो वित्तिय सहायता दी जानी थी, वो नहीं दी। इसी को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस पार्टी ने बिजली के बिल को माफ और ऋण माफी का कैंपेन चलाया। किसानों ने खुद कहा कि उनका कर्ज माफ होना चाहिए। राहुल गाँधी जी ने खुद किसान पत्र माननीय प्रधानमंत्री जो से मिलकर डेलिगेशन के साथ दिया, लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।


न्यूनतम समर्थन मूल्य की बहुत बात हुई। 2014 में मोदी जी ने अपने भाषण में कहा कि MSP Cost + 50% Profit ये हम फिक्स करेंगे। यहाँ तक कि उन्होंने अपने घोषणा पत्र में इसका उल्लेख किया। लेकिन 34 महिने बीत जाने के बाद भी ये सरकार उसकी तरफ ना कोई पहल कर रही है, ना स्टडी कर रही है और ना ही समीक्षा। उल्टा जब सुप्रीम कोर्ट में इनसे पूछा गया कि MSP Cost + 50% जो स्वामिनाथन कमीशन कि रिपोर्ट के आधार पर देना तय था तो इसके बारे में आपका क्या कहना है। सरकार बनी थी, फरवरी 2015 में एफीडेविट इन्होंने दाखिल किया, तब इन्होंने स्पष्ट रुप से कहा कि हम इस फार्मूले से सहमत नहीं हैं। तो ये जले पर नमक छिड़कने वाली बात इस सरकार ने की कि हम जगह-जगह जाकर घोषणाएं करेंगे, किसान प्रभावित होकर इनको वोट देंगे और जब सरकार बन गई तो सरकार बनने के बाद इन्होंने कहा कि इससे हम सहमत नहीं है।


संसद के दोनों सदनों में आज ये सवाल उठाया गया और राज्यसभा में तो खासकर महाराष्ट्र के बारे में कहा गया कि 117 ऐसे मामले आए जिनमें किसानों की फसल अच्छी हुई, बारीश अच्छी हुई लेकिन बाजार में उनको कीमत अच्छी नहीं मिली। आपने देखा होगा अभी पीछ कि सड़कों पर टमाटर फैंके जा रहे हैं, प्याज फैंके जा रहे हैं।


लोकसभा में शरद यादव जी ने कहा था कि गेहूं को खरीदने वाली ऐजेंसियाँ गेहूं नहीं खरीद रही हैं जिससे बाजार में किसान औने-पौने भाव में मजबूर हैं बेचने के लिए। पहले इसी तरह से खरीफ की फसल के लिए बात उठी। धान की फसल के लिए बात उठाई कि 1400 रुपया प्रति क्विंटल जाना चाहिए और 900-1000 रुपए में किसान बेचने के लिए मजबूर है। तो MSP का मुद्दा बहुत ही महत्वपूर्ण है। किसानों के डिस्ट्रेस के बारे में सरकार को सोचना चाहिए। किसानों का कर्ज माफ होना चाहिए। उत्तर प्रदेश के चुनाव अभी खत्म हुए हैं और प्रधानमंत्री जी ने जगह-जगह जाकर कहा था कि जब हमारी सरकार बनेगी तो पहली कैबिनेट मीटिंग में किसानों का कर्ज माफ होगा। उनकी पहली मीटिंग हो चुकी है लेकिन किसानों के कर्ज माफी के बारे में कोई संकेत नहीं है। सरकार बनी है हम उनका स्वागत करते हैं, बधाई देते हैं। वो सफल होंगे तो वहाँ के लोगों का भला होगा। 5 साल वो इधर-उधर की बातें करने की बजाए वो किसानों की भलाई के बारे में सोंचे और 2014 से जो-जो वायदे उन्होंने किए हैं उनके उपर पॉलिसी बनाएं और आवश्यक कदम उठाएं।


एक प्रश्न पर कि पंजाब में आपने भी तो किसानों के कर्ज को माफ करने की बात की थी, उस पर क्या कहेंगे, श्री पुनिया ने कहा कि 2008 में हमने किसानों की हालत देखी, उनकी जरुरतें समझी, समीक्षा की और तब कर्ज माफ का निर्णय लिया। तब कोई घोषणा या आश्वसन हमने नहीं दिया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने वायदे के अनुसार कैबिनेट में ये निर्णय क्यों नहीं लिया। हम जो सवाल उठा रहें हैं क्योंकि प्रधानमंत्री जी ने स्वयं कहा था कि जिस दिन सरकार बनेगी उसकी पहली कैबिनेट मीटिंग में किसानों के कर्ज माफी पर निर्णय लेंगे। हमें तो ऐसा लगा कि प्रधानमंत्री जी ने, भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश के किसानों को लेकर पूरी समीक्षा कर ली है, पूरा मामला तैयार है, बस सरकार की बागडोर हाथों में आते ही ये उस प्रस्ताव को मंजूरी दे देंगे, बस हमने उनके वायदे को याद दिलाते हुए उसी मांग को दोहराया है।


एक अन्य प्रश्न पर कि क्या आप योगी आदित्यनाथ पर प्रश्न उठा रहे हैं, दूसरा किसानों के लोन पर है, श्री पुनिया ने कहा कि हमने कोई शिकायत दर्ज नहीं की है। प्रधानमंत्री जी प्रचार के दौरान स्वयं जगह-जगह जाकर कह रहे थे कि पहली कैबिनेट मीटिंग में किसानों का कर्जा माफ होगा, हम तो उसकी बात कर रहे हैं। हम मानते हैं कि राज्य सरकार कोई निर्णय लेती है तो सभी तथ्य जुटाकर और समीक्षा करके निर्णय लेती है। लेकिन जिस तरह से प्रधानमंत्री जी कह रहे थे उससे लग रहा था कि वो पहले ही तैयारी कर चुके हैं। तो मैंने ये कोई शिकायत दर्ज करने के इरादे से नहीं कहा। ये सरकार लोगों के लिए होती है। जब देखते हैं कि घोर संकट है, आत्महत्याएं हो रही हैं, अच्छी फसल होने के बावजूद भी हो रही हैं। आपको याद होगा 2008 में 73 हजार करोड़ रुपया माफ किया था तो ऐसा नहीं है कि बैंको को कहा था, केंद्र सरकार ने अपने बजट से बैंकों को भुगतान किया और बकायदा जो किसान थे उनके पासबुक में एँट्री की कि इनका बकाया बैंलेंस जीरो है। तो इस पर बहुत डिबेट हो सकती है। इसके पक्ष में पूरे जनमानस की तरफ से आवाज उठती है।


एक अन्य प्रश्न पर कि कल जब यूपी में शपथ समारोह हुआ तो उसमें मुलायम सिंह यादव के साथ जुगलबंदी दिखाई दी, क्या कहेंगे, श्री पुनिया ने कहा कि शपथ समारोह में सभी राजनीतिक दलों के लोगों को बुलाया गया। प्रधानमंत्री जी हैं, शिष्टाचार के नाते वो भी सबसे मिल रहे थे और बाकि के लोग भी उसमें शामिल थे। मैं नहीं समझता उसमें कोई गंभीर बात हैं और ना ही ऐसे मंचों पर ऐसी गंभीर बात होती है।

 

नरेश अग्रवाल के बयान पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री पुनिया ने कहा कि कॉपरेटिव बैंक और लैंड डेवलपमेंट बैंक का ऋण माफ किया। जो शर्तें थी उसके हिसाब से बहुत ज्यादा लोगों को उसका लाभ नहीं मिला। लगभग 4000 करोड़ की धनराशि उसमें खर्च हुई थी। तो ये जो वायदा है ये तो इन्होंने फॉर्म लोन को वेव करने के लिए किया है। फॉर्म लोन तो हर जगह है, कॉपरेटिव बैंक के माध्यम से, लैंड डेवलपमेंट बैंक हैं और ग्रामीण बैंक हैं, किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से। तो ये फॉर्म लोन हैं। तो देखते हैं इसमें आगे क्या होता है, तभी इसमें समीक्षा होगी।       

On the question that UP CM has put a ban on red beacon cars, Shri Punia said Punjab Government was the first one to take a decision to do away with the red and blue beacon. It is a good decision and I think rest of the country must follow it.

 
On the question of the reaction of the Congress Party that outside the office of UP Congress office a poster has appeared announcing a reward of Rs. 5 lakhs for searching Prashant Kishore, Shri Punia said I do not think anybody from the Congress Party is looking for him. Election is over and I think everything is now settled and people keep on playing this game. We have nothing to do with that.


On the issue of any review in the Party, Shri Punia said the Congress Party at the State level has already carried out the exercise and reviewed with each and every candidate, the winning seven MLAs, and rest of the candidates who lost and it was a daylong deliberations yesterday and I think at the national level, the review will take place once our senior leader Shri Rahul Gandhi Ji is back from abroad.

 
On a further question as to what were the deliberations yesterday in the meeting  and under whose leadership what was the prima-facie conclusion and whether it was discussed that we should not have entered into the alliance with Samajwadi Party, Shri Punia said the outcome of the review is supposed to be shared with Congress Leadership. It will be shared with them upon their return. He added that senior leaders would get together and express their views. Decision will be taken only after a detailed review. Yesterday, it was chaired by Pradesh Congress Party Committee, President Shri Raj Babbar and we were all there. 


 
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