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Highlights of the press briefing of Dr. Abhishek Manu Singhvi, MP 17-04-2017

Created on Monday, April 17, 2017 12:00 AM  डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी ओडिशा में कहते हैं कि Fabrication issue है- उनमें से एक मुद्दा है EVM का, इलैक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन का, हम समझते हैं कि कुछ ज्यादा ही विरोध कर रहे हैं प्रधानमंत्री जी और शायद उनकी पार्टी विशेष रुप से खुद फैबरिकेशन और मैन्यूपलेशन से भयभीत है। मैं आपके समक्ष बड़े निष्पक्ष भाव से कुछ तथ्य रखना चाहता हूं। आप निर्णय कर लें कि क्या न्यूनतम स्तर पर ये आवश्यक नहीं है कि जब तक ये मुद्दा पूरी तरह से हल नहीं हो जाए तब तक EVM का उपयोग होना चाहिए? मैं आपके सामन तथ्य रख रहा हूं।

Dr. Singhvi said on 8th October 2013 Hon'ble Supreme Court gave a 15 page detailed judgment i.e. final decision in the matter of Shri Subramanian Swamy Vs. Union of India. He read Para 29 of that order which said "From the material placed by both the sides, we are satisfied that the paper trail is an indispensable requirement of free and fair elections. The confidence of the voters in the EVMs can only be with the introduction of the paper trail. EVM with VVPAT system ensures the accuracy of the voting system with intent to have the fullest transparency in the system and to restore the confidence of the voters, it is necessary to set up EVMs with VVPAT system because vote is nothing but an act of expression which has immense importance in a democratic system”.
 
ये SC ने कहा था। 3 साल होने में 5-6 महिने बचे हैं। आज 30 महीने के बाद 58 हजार लगभग VVPAT मशीन हैं जबकि कुल EVM मशीन हैं - 16 लाख। यानि SC का आदेश 5 प्रतिशत भी लागू नहीं हुआ है। अभी उत्तर प्रदेश में 20 कॉन्सिटिट्यूएंसी में 403 से VVPAT मशीनें लगी थीं। कल 24 घंटे पहले चुनाव आयोग ने तीसरा या चौथा पत्र लिखा कि हमें तुरंत इसी महीने या 2 महीनों के अंदर 3 हजार करोड़ रुपए चाहिए, अगर 2019 के चुनाव में आप सभी जगह EVM के साथ VVPAT चाहते हैं। 2 साल से 3 हजार करोड़ रुपए की मांग चुनाव आयोग केन्द्र सरकार से कर रहा है, जो वो नहीं दे रही है। आज 10 हजार VVPAT एक वर्ष में एडिशनल add हो रहे हैं। अगर 16 या 15 लाख EVM का गेप है उसे कवर करना है तो डेढ़ सौ वर्ष लगेंगे पूरी तरह सभी EVM मशीनों को VVPAT से जोड़ने में।
 
Dr. Singhvi said Hon'ble Supreme Court had said that paper trail is indispensable; it is only with the introduction of paper trail that EVM would be a confidence measure of the voter and it is necessary for fullest transparency.
 
न्यूनतम ये मान लीजिए कि EVM सही है, तो मेरा प्रश्न है आपके माध्यम से कि जब तक EVM के साथ आप VVPAT नहीं लगाते तब तक पेपर बैलेट होना चाहिए। ये सही है कि नहीं है? SC कहता है कि EVM प्रभावशाली तभी होंगे जब उनके साथ पेपर ट्रैल हो। आज 58 हजार EVM के साथ पेपर ट्रैल है। 16 लाख कुल EVM हैं, उसमें से साढ़े 15 लाख के साथ VVPAT है ही नहीं। 150 वर्ष लगेंगे और आप पैसे दे नहीं रहे हैं, 3 हजार करोड़ चाहिएं, 2019 के चुनाव के लिए। चुनाव आयोग ने कहा है कि आज चाहिए। तो जब तक आप ये नहीं कर सकते, आप असमर्थ हैं तो आप पेपर बैलेट का प्रयोग क्यों नहीं करते? ये मांग है कि EVM रखिए, लेकिन ये तब रखें जब आप VVPAT लाएंगे।

एक और रोचक पहलू है- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुल 50 देशों ने, फिर 31 देशों ने प्रयत्न किया EVM का, भारत के बाहर। हर प्रकार के प्रयत्न किए। 30-35 में 8 देश बचे, उन 8 में से 6 वापस उसी बैलेट सिस्टम पर चले गए, बचे 2, आज सिर्फ एक देश है भारत से अलग, जो EVM वोटिंग करता है- वो है दक्षिण अफ्रिका। मूल मुद्दा ये हैं कि विश्वभर में 30 देशों ने प्रयत्न किया, आज एक देश है भारत के अलावा। जर्मनी के सबसे उच्च स्तरीय सवैंधानिक न्यायालय ने इसको निरस्त कर दिया। कई प्रयत्नों के बाद, कई वर्षों के लिए EVM के बाद वो पेपर बैलेट पर चले गए हैं वापस। फ्लोरिडा में वापस चले गए, आयरलैंड में, नीदरलैंड में प्रयत्न किया, लेकिन वापस पेपर बैलेट पर चले गए। तो मित्रों जब तक आप EVM के साथ VVPAT नहीं लाते तब तक पेपर बैलेट क्यों नहीं का जा सकता?

अब मैं आपके समक्ष एक रिपोर्ट रखता हूं ये है- 2010 में यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में सबसे व्यापक स्टडी हुई। लगभग 40 पन्नों की स्टडी मेरे पास है। उसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर के लेखक हैं- हरि प्रसाद जी, एलेक्स हैंडरमैंन, रॉक कांग्रेक्ट स्काट, एनि वास्ट्रो, अरुण कांगिपति, सांई कृष्णा, नितिंदा इत्यादि 4-5 देशों से और भारत से ये स्टडी की गई है। मैं इसके दो हिस्से पढ़ता हूं-

In 2010 University of Michigan carried an intensive study which included eminent Authors from five continents including India said in the first paragraph that "We conclude that in spite of machines' simplicity and minimum software computing base, they are vulnerable to serious attacks that can alter election results and violate the secrecy of the ballot. We demonstrate two attacks implemented using customized hardware which is available which could have been carried out by dishonest election insiders or other criminals with only brief physical access to the machines”.

The summary of the last paragraph said "it is highly doubtful that these problems can be remedied by simple upgrades to the existing EVMs or to Election procedures. Merely making the attacks, we have demonstrated more difficult will not fix the fundamental problem. India's EVMs do not provide transparency. So voters and Election Officials have no reason to be confident.

Option Number 1 that has been adopted in other countries is to use a Voter Verifiable Paper Trail which is VVPAT which combines an electronic record stored in a DRE with a paper vote record that can be audited by hand. Existing EVMs do not have this software. But it would be possible to add a VVPAT by interposing on the cable.

यही बात कही थी SC ने। मैं एक प्रश्न वापस पूछ रहा हूं कि मान लीजिए कि EVM सही है तो उसकी विश्वसनियता के लिए अति आवश्यक है कि जब तक आप VVPAT 3 हजार करोड़ व्यय करके उन 16 लाख EVM के साथ नहीं लगा सकते तब तक आप पुराना सिस्टम रखीए, बाद में बदल दीजिए, SC ने भी यही बात की थी।

लाल कृष्ण आड़वाणी जी ने 2014 के पहले  बहुत बार लिखित और मौखिक रुप से इसका विरोध किया। स्वामी जी ने तो याचिका फाईल की। इसके बहुत व्यापक रुप से आरोप और आक्षेप आए थे 2010 वाले गुजरात चुनाव में। जिनको आप लोगों ने प्रकाशित किया था, उसके डिटेल मेरे पास हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि ये EVM हमने नहीं दिए थे, वडोदरा डिस्ट्रिकट रिटरनिंग ऑफिसर ने कनफर्म किया कि मैन्यूपलेशन हुआ था। 2016 में असम में 190 EVM रिप्लेस किए गए मुख्य फंक्शनिंग के लिए। पूणे में सब जानते हैं 1 परिवार के 29 लोग वोट देने गए। सब मजाक में कहते, आपके समक्ष कहा है कि अगर मान भी लें कि बीवी के साथ जरुरी नहीं फोरग्रांटेड लेना कि आपके लिए वोट करेगी, लेकिन उस व्यक्ति ने कहा कि मेरा खुद का वोट नहीं आया, मेरे किसी परिवार का नहीं आया। भींड में क्या हुआ, आप जानते हैं। तो मैं ये कहना चाहता हूं कि ये बहुत ही मूल, संवैधानिक, तत्वाधिन और सिंद्धात वाली बात है।

1975 में आज से 50 वर्ष पहले जो निर्णय है SC का - Indira Nehru Gandhi vs Shri Raj Narain , संविधान की खंडपीठ है 5 जजेस की, उसमें कहा है कि हिंदुस्तान का सबसे मौलिक, प्रभावशाली, कानूनी जो एक औजार है, ब्रह्मास्त्र है वो है - बेसिक  स्ट्रक्चर डॉक्ट्रिन। संविधान के मूल तत्वों के ढांचे का जो आर्ग्यूमेंट है, उन्होंने कहा कि मूल तत्वों बैसि स्ट्रक्चर डॉक्ट्रिन की आधारशिला है। लोकतंत्र-गणतंत्र- उसकी आधारशिला है निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव और उसकी आधारशिला है- निष्पक्ष और स्वतंत्र EVM। तो EVM की जहाँ बात करते हैं तो भारत के मौलिक, प्रभावशाली, मूल लोकतांत्रिक, गणतांत्रिक ढांचे के ऊपर प्रश्नचिन्ह डालता है। मैं नहीं समझता कि आज हमारे पास विवाद का स्कोप है, इसलिए कि ये मान भी लें कि EVM आप रखना चाहते हैं तो जब तक आप SC के कॉनफिडेंस मेजर को नहीं लेते, यानि हर EVM के साथ VVPAT तब तक आप इसे नहीं कर सकते।

Dr. Singhvi added that the said the Hon'ble Prime Minister started yesterday by saying that there are many fabricated issues and one of them he raised was the EVM issue. I would respectfully remind the Hon'ble PM and the Ruling Party that Yes, they are rightfully scared and fearful because the fabrication and manipulation may lie somewhere else and that is why they want to bury this issue deep.

I want to start by reading to you Para 29 of the Hon'ble Supreme Court order in October 2013 - almost 2-1/2 years ago, 30 months ago the Hon'ble SC used three phrases for EVMs - it is 'indispensable' to have paper Trail. It is only a 'Paper Trail' - word 'Only' - which will give and restore confidence and that this is vital for full transparency and confidence. I have read to you the full paragraph.

In 30 months this Government has denied the Election Commission the funds to do any installation of VVPAT to accompany the 16 lakh EVMs - 16 lakh EVMs roughly exist in this country against which  58,000 VVPATs is the total number. It is less than a drop in the ocean. Yesterday - 24 hours ago, which is why this is very topical and important - the Election Commission, in its third letter, demand lament, cry anguish said we need Rs. 3000 Crore now today to be able to  use VVPATs in 2019 Elections; 30 months have passed. And I have no doubt that for the future 30months also the Election Commission will not get Rs. 13 crore leave aside  Rs. 3000- crores. What are you doing then, you are going to go ahead with EVMs without VVPAT, is it not a direct violation of the Hon'ble Supreme Court order - Paragraph 29 - For 60 years, we have had paper ballots, please go back to paper ballots and when you have given the funds, when you installed the VVPAT, come back with the EVM - what is the problem? The problem is that for some reason and many of us can guess the reason this Government is disinterested in having either a VVPAT or in giving money to the Election Commission to get VVPATs.

We have now an International rich experience before us – more than     50 countries targeted project for EVMs - 30 operationalized it – 8 actively pursued it, 6 of those 8 have reverted. 6 of those 8 have reverted to Paper Ballot. It is not a small thing I am saying – no country in the world other than India and one more country, South Africa – does EVM voting, not a single country in the world. Why is that? The German Supreme Constitutional Court declared it unconstitutional not evocative of sufficient faith and trust.

Netherlands tried several pilot projects persisted and then scrapped and reverted and retracted. Ireland did exactly the same. Florida tried it repeatedly, retracted and scrapped.

It is not a question of being obstinate as this Government to be. It is a question which in 1975 the Supreme Court said is a part of the basic structure of the Indian Constitution. The basic structure of the Indian Constitution includes democracy that is the pillar and democracy is not possible without free and fair elections and free and fair elections are not possible at the minimum even with EVMs but with Paper Trail VVPAT. We have shown you that at the rate of 10,000 new VVPAT machines per year, it will take 150 years to have a VVPAT accompanying every EVM.

The Election Commission itself has asked for Rs. 3,000 Crore. There are only 58,000 out of 16 lakhs - a drop in the ocean.

Mr. Advani has vexed eloquent every time the BJP is out of power about malfunctioning EVMs. Dr. Swamy has gone to the Hon'ble Supreme Court and got an order 30 months ago.

The first allegation arose - not the first but serious allegation against arose in the 2010 Gujarat Civic elections. The Returning Officer said that we cannot take responsibility for the EVMs. It is malfunctioning.

190 EVMs were replaced in the Assam 2016 elections. The funniest was, as you all know - Bhind and Pune In Pune - 29 Members of a family found not a single vote from their family to its own candidate and the candidate lamentfully, sorrowfully remarked that even if I did not get my wife's vote, I should have got my own vote which I have put myself. That was not reflected in the EVM.

Uttar Pradesh hardly a month ago had 20 constituencies out of   403 constituencies on VVPAT. So where does this leave us? It leaves us with very cogent, serious, logical, deep, strong and fundamental objections questioning the very efficacy and purity of our electoral process and, therefore, for one of the world's largest democracy. Why should the Government treat it as an adversial issue? Why is it not possible to revert to Paper Ballot at least till such time you give one VVPAT accompanying one EVM? At least till that time, the Paper Ballot is tried, tested and age old method. There is no reason given except 'Zid' and except perhaps a vested interest. I have read to you and I am not reading again detailed studies. One of the most detailed studies is of the 2010 study of University of Michigan.

The Authors are seven Authors of International repute including 2 Indians. They say that the EVM is easily capable of being tampered with and they have given two live demonstrations on paper in the Article about how they have tampered with two cases. They have concluded that there are three options – the first and the best option is to have at least, if you insist, do not have the EVMs, it is the best idea, if you insist on EVMs, insist for VVPAT. Now look at our irony – look at our tragedy India neither has Paper Trail nor has Paper Ballot.

इसलिए माननीय मोदी जी और माननीय सरकार इसे आप Fabrication issue नहीं कहिए। इसमें शायद अंदर ही दाल में कुछ काला है और फैबरिकेशन कहीं और हो रहा है।

एक प्रश्न पर कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तो कांग्रेस ने इसको लेकर कोई कदम क्यों नहीं उठाया, श्री सिंघवी ने कहा कि ये स्टडी जब आई उसके बाद SC ने इसे बड़े व्यापक रुप से देखा। ये निर्णय आने के बाद तो चुनाव शुरु हो गए थे। 2014 से यदि इस सरकार को EVM के साथ VVPAT लगवाना था, तो आपने 30 महीनों में 3 हजार करोड़ देकर VVPAT कहाँ लगवाई? 2014 से 2017 वाले उत्तर प्रदेश के चुनाव में, जो बड़ा चुनाव था सब जगह VVPAT होना चाहिए था। कल के पत्र में चुनाव आयोग ने कहा है कि चुनाव से पहले उन्हें VVPAT चाहिए, तो पैसे चाहिए। आज हम आपको बता रहे हैं कि विपक्ष के डेलिगेशन का एक प्रभाव है ये है कि चुनाव आयोग अभी बोल रहा है कि 2019 चुनाव आने वाले हैं इसलिए उन्हें VVPAT लगाने के लिए 2 वर्ष चाहिए, तो सरकार अभी दे 3 हजार करोड़ रुपए। जिस सरकार ने ढाई वर्ष में नहीं दिए, क्या आप समझते हैं कि वो सरकार क्या अब देगी?

तीन तलाक के मुद्दे पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री सिंघवी ने कहा कि मैं आपके समक्ष स्पष्ट कहना चाहता हूं और पहले भी कहा हमारे कहने में कोई कमी नहीं है, अगर सुनने वाले अपने कान में रुई डाल देंगे और आँखे बंद कर देंगे तो मेरा काम उनको सुनाने का नहीं है। मैं फिर भी दोहरा रहा हूं और जो ना सुनने वाले हैं वो भी सुन लें वापस- कांग्रेस पार्टी सुधार, बदलाव, संशोधन के अग्रणी पंक्ति में रही है लगभग 70 वर्ष से। हम नहीं रुक सकते हैं अग्रणी पंक्ति से। जब जवाहर लाल नेहरु जी और पटेल जी को जब अपनी खुद कांग्रेस पार्टी से जबरदस्त युद्ध लड़ना पड़ा था और देश के कई वर्गों से वो युद्द लड़ना पड़ा था, जब वो हिंदु कानून में संशोधन लाए थे, मध्य 1950 में। हम ये नहीं भूल सकते कि मनमोहन सिंह जी की सरकार, सोनिया गाँधी जी नेतृत्व वाली सरकार यूपीए-1 में, जैंडर जस्टिस के विषय में, समानता के विषय में एक बहुत क्रांतिकारी संशोधन आया था यानि मानवाधिकार, बिंदु, महिलाओं को जो बराबरी के हों पुरुषों से, ये 70 वर्ष में नहीं हुआ था, ये हम लाए थे। मैं वापस दोहरा दूं कि हम समानता, न्याय, समन्वय और समतल जमीन के लिए खड़े हैं, पुरुषों और महिलाओं के बीच, जिसको जैंडर जस्टिस कहा जाता है। ये सिद्धांत हमारे अनुसार उतना ही लागू होता है मुस्लिम महिलाओं को जितना कि किसी और महिला को। हम फिर दोहरा रहे हैं कि SC के समक्ष मामला एक्टिव है, लगभग 3 हफ्ते के अंदर ये आने वाला है, सब-ज्यूडिस है और ये हर्ष की बात है, आदर की बात है और एक प्रकार से अच्छी बात है कि सभी वर्गों ने बार-बार दोहराया है कि हम उच्चतम न्यायालय के निर्णय को सर्वोपरी मानेंगे और नतमस्तक होंगे। इन सबके बीच ये ना हमारा अधिकार है, ना आपका और ना ही उनका जिनके आँख बंद है, कान बंद है कि SC के निर्णय को अवरुद्ध करने का प्रयत्न करें या उससे पहले राजनीतिक खेलें या सनसनी फैलाएं जिनकी आवश्यकता नहीं है क्योंकि उच्चतम न्यायालय में ये बात है और वो उसको सुन रहा है।

एक अन्य प्रश्न पर कि कांग्रेस के कुछ लोग EVM का समर्थन कर रहे हैं, क्या कहेंगे, श्री सिंघवी ने कहा कि ये बात सही है कि कुछ लोगों का निजी मत भिन्न रहा है। जब कांग्रेस सामूहिक रुप से बात करती है, ड्रॉफ्ट को चुनाव आयोग को हस्ताक्षर के साथ भेजती है, जब 17 सर्वदलिय पार्टियों के साथ जाती है और जब खुले रुप से, औपचारिक रुप से समर्थन करती है BSP की SC मे याचिका का, तो निश्चित रुप से वो कांग्रेस का मत आप जानते हैं। जिनका मत भिन्न है उनका निजी मत है, क्योंकि गणतांत्रिक, लोकतांत्रिक सिस्टम में ऐसा हो सकता है।  

On the question if the Congress Party will boycott the elections in case the Government does not meet your demand, Dr. Singhvi said he would not at all suggest that at this stage, you are going far ahead of the story. At the moment, there is absolutely no reason for reasonable, balanced, right thinking people, who value democracy, to not agree to our most reasonable demand and therefore, let us not speculate.

Today there is no answer - stunning silence or pejorative addictives are the answer by the Hon'ble Prime Minister but no answer to a simple question - till such time as you fulfill the Hon'ble Supreme Court mandate, why don't you have Paper Ballot otherwise instantly give Rs. 3,000 to the Election Commission and within a few months have VVPAT for each EVM. No answer to either of these basic points.

On a question to up the attack on the Government, Dr. Singhvi said as a Party, we have been a responsible Party sober Party but a firm party. We have first and foremost raised it through the media in the general public domain.

Secondly and this is all in two weeks, we have drafted a detailed representation to the Election Commission. It is a detailed one.

Thirdly and that is separate – we have interacted and I am myself have been a part of those meetings with almost every non-NDA party, parties which do not agree with each other, parties which fight with each other in States. You have the example of TMC and Left Parties.

Fourthly - a very detailed delegation and 90 minutes meeting where I was present with the EC.

Fifthly, a delegation to the Hon'ble President of India which apart from other issues includes the EVM issue.


Sixthly a Petition in the Hon'ble Supreme Court in which we appeared and openly supported although filed by the BSP, we said we are standing in support in which the Hon'ble Supreme Court had issued Notice and is now coming up on 8th of May. I do not think any responsible Party, without being an archical, can do more in the space of two to three weeks and we are proud of the way we have behaved because we will insist on raising the issue of principle before the people who are concerned about democracy in the world's largest democracy.

On the statement of the Prime Minister that Opposition is anti-backward; Dr. Singhvi said if referring to a Select Committee is stalling and making it anti-backward, then I cannot correct the Prime Minister's definition which is political and self-serving. Prime Minister should not apply his own definition to his own party because by that definition he becomes pro-corrupt in opposing Lokpal and referring it in those days in the Rajya Sabha - first the Parliamentary Select Committee of which I was the Chairman and after that report which had near unanimity again a second time referring it to a Select Committee. Is the Prime Minister's Party therefore, pro-corruption? I think what you say was sensationalism and what you do for political opportunism for vote banks should not be confused with stalling and being anti-backward.  

On a related question as to why do the Congress Party not give feed back to the Government, Dr. Singhvi said there is no question of Congress Party adopting anybody's stand.  I have given you my own stand to the extent that stand matches mine, they have to check it either way. Our stand is crystal clear. We are not at all concerned about the Government's stand or anybody else's stand. We are making the Congress Party stand and I cannot think lack of ambiguity or lack of equivocation what I have said but Yes, unlike some segments especially the Ruling party, we do not believe in pre-empting, in delaying in obstructing and most importantly in sensationalizing.

 
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