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Press Releases

Highlights of the press briefing of Shri Manish Tewari 19-4-2017

Created on Wednesday, April 19, 2017 12:00 AM


Shri Tewari said between the May of 2014 and the April of 2017 India needed to create about 350 million jobs to meet the flow of about a Million young Indians who join the employment stream every year.

As my colleague was pointing out on Saturday that in the first 2 years – first 24 months - of the NDA Government - only 4.4 lakh jobs were created. So, what you require was 240 million jobs in the first two years and what this Government created was only 4.40 lakh jobs.  What this means is that every employment opportunity whether in India or abroad is extremely precious for every young Indian and it is in this context that the decision taken by the Trump Administration in order to drastically scale back on the H1B Visa programme as well as the decision taken by the Australian Government to scrap what is called the 457 temporary Work Visa is extremely disappointing but what is even more disappointing is the fact that this Government – the NDA-BJP Government – which had made tall promises to young Indians in the election campaign of 2014 has completely failed to work with both the American and the Australian Government to try and convey to them the Indian point of view.

Since the H1B programme started in 1990, India has been the single biggest beneficiary of that programme as also of the 457 temporary work permit issued by the Australian Government since it commenced.

So, therefore, these barriers to entry which are going up while you want to have globalization of capital, globalization of labour is something which should have been rigoursly taken up by the current Government.

Now what makes the situation all the more alarming is that as per Report which was done by a Civil Society Group, in the past three years India has lost 55,000 jobs per day. There is actually an attrition of 55,000 jobs per day rather than jobs being added at the minimum rate of a Million a month, which is what India requires.

The World Bank says that 69% of all Manufacturing jobs in India are threatened by automation and robotization. Here is the Prime Minister talking about Make-in-India. With empirical statistics put out by the World Bank, to rather than Make-in-India adding jobs, there is a possibility that 69% of the jobs in the Manufacturing sector over the next one decade will be lost to automation.

So, rather than wasting their time on absolutely medieval, reactionary and symbolic issues, this Government needs to understand the economic crisis which is engulfing this country and they need to work with the international community to find innovative ways e.g. the global Work Visa for skilled and Educated Indians are ideas which the Government needs to work with the international community rather than doing that whatever employment opportunities were available, even though it was in the form of immigration or skilled people, this Government has completely and absolutely failed to preserve and protect it despite NASSCOM and other Industry bodies making noise over the last two months trying to independently lobby the US Government on H1B, the silence of this Government has been absolutely deafening and we do hope that this Government realizes that young Indians are not forgiving to those who do not honour their promises and complete it.

श्री मनीष तिवारी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि मई 2014 और अप्रैल 2017 के बीच भारत में कम से कम साढ़े 3 करोड़ नौकरियों की जरूरत थी क्योंकि लगभग 10 लाख नौजवान हर महीने जो रोजगार की स्ट्रीम में शामिल होते हैं। जैसे कि हमारे सहयोगी ने शनिवार को आपको बताया था कि पहले 2 वर्ष में जहाँ भारत को 3.5 करोड़ नौकरियों की जरुरत थी, ये सरकार सिर्फ 4.4 लाख रोजगार ही उपलब्ध करा पाई है। इससे एक चीज बहुत साफ तौर पर प्रमाणित होती है कि जो वायदे एनडीए, भाजपा सरकार ने, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारत के नौजवानों के साथ किए थे कि 'सबका साथ सबका विकास' का मतलब होगा कि हम 2 करोड़ नौकरियाँ हर वर्ष उत्पन्न करेंगे, रोजगार के साधन पैदा करेंगे, ये सरकार उस वायदे पर पूरी तरह से विफल रही है।

इस संदर्भ में और इस परिपेक्ष्य में अमेरिका की सरकार ने H1B वीज़ा को लेकर और आस्ट्रेलिया की सरकार ने 457 अस्थायी वीज़ा प्रोग्राम को लेकर जो फैसले किए हैं, उसका सबसे अधिक नुकसान भारत के नागरिकों को होगा। इस बात के बावजूद जो इन्डस्ट्री बॉडिज हैं, NASSCOM है उन्होंने इस बात को बहुत जोर-शोर से उठाया। अमेरिकी सरकार के साथ भी उठाने की कोशिश की, लेकिन भारत की एनडीए सरकार का रवैया पूरी तरह से नकारात्मक रहा है। सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं की गई कि आप अमेरिका की सरकार के साथ या आस्ट्रेलिया की सरकार के साथ किसी तरह से बातचीत करके भारत का पक्ष इन देशों की सरकारों के समक्ष रख दें और ये परिस्थिति इसलिए बहुत चिंताजनक हो जाती है क्योंकि एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 3 वर्ष में 10 लाख नई नौकरियाँ पैदा करने की जगह भारत 55 हजार नौकरियाँ प्रतिदिन खो रहा है और अगर आप वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों को संज्ञान में लें तो उनका कहना है कि मैन्यूफेक्टरिंग सेक्टर में 69 प्रतिशत नौकरियाँ ऑटोमेशन से और रोबोटाईजेशन से अगले दशक में समाप्त हो सकती हैं।

आज एक तरफ आर्थिक स्थिति पूरी तरह से चरमरा गई है, नई नौकरी का कहीं नामोनिशान नहीं है और जो कुछ रास्ते खुले हुए थे, चाहे वो बाहरी देशों में क्यों ना खुले हों, उनको बचाने में ये सरकार पूरी तरह से विफल रही है। हमें उम्मीद है कि ये सरकार इस बात से आगाह रहेगी कि जो वायदे उन्होंने भारत के नौजवान नागरिकों के साथ किए थे 2014 के चुनाव प्रचार में, अगर वो उन वायदों को पूरा करने में विफल रहे और पिछले 3 वर्ष का जो ट्रैक रिकोर्ड है वो इस विफलता को प्रमाणित करता है, नौजवान वोटर इस सरकार को माफ करने वाले नहीं हैं।

एक प्रश्न पर कि बाबरी मस्जिद पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आप क्या कहेंगे, दूसरा क्या उमा भारती जी मंत्री पद से इस्तीफा देंगी, श्री तिवारी ने कहा कि जहाँ तक फैसले का सवाल है जब सुप्रीम कोर्ट ने एक विस्तृत फैसला दे दिया है तो उसमें ना कुछ जमा करने के लिए है और ना कुछ घटाने के लिए है। सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा है कि कानून सर्व-माननीय है और हमारा ये मानना है कि कानून को अपना काम करना चाहिए। जहाँ दूसरा सवाल है- प्रधानमंत्री जी नैतिकता का बहुत गुणगान करते हैं, दुहाई देते हैं तो इस फैसले के बाद जो उनकी नैतिकता है उसको उस कसौटी पर कसा जाए। ये हम प्रधानमंत्री जी के विवेक पर छोड़ते हैं कि जो सुप्रीम कोर्ट ने इतना विस्तृत फैसला लिया है उसके ऊपर वो किस तरह से नैतिक प्रतिक्रिया जाहिर करते हैं। जहाँ तक वित्त मंत्री जी का सवाल है, अगर आरोप पत्र करने पर इस्तीफा मांगा जाए तो कई कांग्रेस नेताओं के इस्तीफे हो जाते। वो शायद भूल गए हैं कि कांग्रेस के मंत्रियों के ऊपर एफआईआर छोड़ो, आरोप पत्र छोड़ो अगर महज एक लांछन तक लगा था, तब भी इस्तीफे हो गए थे।

एक अन्य प्रश्न पर कि लाल बत्ती पर कैबिनेट के फैसले पर क्या कहेंगे, श्री तिवारी ने कहा कि जहाँ तक मेरी जानकारी है 10 दिसंबर 2013 को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था इस मामले में और सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर से निर्देश दिए थे कि किन-किन गाडियों के ऊपर लाल बत्ती की अनुमति है और किन-किन के ऊपर नहीं है। तो अगर साढ़े 3 साल के बाद भाजपा उस पर राजनीति करने की कोशिश कर रही है और नैतिकता का डंका बजाने की कोशिश कर रही है तो इससे अधिक हास्यास्पद कुछ नहीं हो सकता। उसके कुछ अँश क्रियांवित भी कर दिए गए थे। उसके ऊपर साढ़े तीन साल के बाद कैबिनेट में फैसला करके ये जो बताना चाह रहे हैं, ये बहुत ही हास्यास्पद है।

एक अन्य प्रश्न पर कि उमा भारती जी ने कहा है कि हमने जो भी किया है सामने किया है, कुछ छुपा कर नहीं किया, क्या कहेंगे, श्री तिवारी ने कहा कि ये बात उनको जाकर अदालत में कह देनी चाहिए, जब उनको पेश किया जाएगा।

एक अन्य प्रश्न पर कि क्या आप राष्ट्रपति जी से अपील करेंगे कि महामहीम राज्यपाल कल्याण सिंह जी को इस्तीफा देना चाहिए, श्री तिवारी ने कहा कि अगर आपको याद होगा कि इन्हीं महामहीम राज्यपाल को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के लिए एक दिन की सजा सुनाई थी और जेल भी भेजा था तो सवाल ये पैदा होता है कि क्या ऐसे व्यक्ति को जिसने सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की हो, उनको राज्यपाल बनाया भी जाना चाहिए था कि नहीं, ये बुनियादी सवाल पैदा होता है और ये इसलिए पैदा होता है क्योंकि इस सरकार में नैतिकता नाम की कोई चीज नहीं है। जिस तरह की प्रतिक्रिया संघ की तरफ से आती रही है, किसी प्रतिक्रिया से आपको कहीं भी संवेदनशीलता की या किसी जिम्मेवारी की रत्ती भर भी बू आती है? इस्तीफे उनसे मांगे जाते हैं जो नैतिकता में विश्वास करे। इस सरकार का जो 3 साल से चाल-चलन और चरित्र रहा है वो अनैतिकता का और असंवेदनशीलता का जीता-जागता प्रमाण है।

एक अन्य प्रश्न पर कि EVM के साथ VVPAT लगाने के लिए चुनाव आयोग की फंड की मांग को सरकार ने मान लिया है, क्या कहेंगे, श्री तिवारी ने कहा कि पहली बात तो ये है कि सरकार कभी निर्णय ना करती अगर सरकार के ऊपर दबाव ना बनाया जाता। अगर सभी राजनीतिक दल इक्कट्ठे होकर सुप्रीम कोर्ट ना जाते, सरकार को नोटिस ना दिया जाता, अगर चुनाव आयोग की तरफ से सरकार को 10-10 पत्र ना लिखे जाते तो सरकार ये जो पेपर ट्रेल वाली मशीन है, इसके ऊपर कोई कदम उठाने वाली नहीं थी। मुझे आज ये सुनकर बहुत हंसी आ रही थी, वित्त मंत्री जी प्रैस वार्ता कर रहे थे और कह रहे थे कि जो लोग हारते हैं वो EVM का मुद्दा उठाते हैं। तो मैं उनको याद दिलाना चाहता हूं कि 7 जुलाई 2009 में श्री लाल कृष्ण आडवाणी जी जो उनके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे 2009 के चुनाव में, उन्होंने सार्वजनिक तौर से बयान दिया था कि इन EVM मशीन को त्याग देना चाहिए और हमें पेपर बैलेट पर वापस चले जाना चाहिए। तो क्या वित्त मंत्री जी का ये मानना है कि वो जो आडवाणी जी का बयान था वो हार से निराश होकर दिया गया था। ये एक बहुत ही संज्ञान का मुद्दा है कि जो डेमोक्रेसी के स्टेकहोल्डरस हैं, डेमोक्रेसी की जो प्रक्रिया अपनाई गई है, उसमें भरोसा और विश्वास है की नहीं। तो सवाल EVM का, सवाल VVPAT का नहीं है, सवाल प्रक्रिया में भरोसे का है और जब तक चुनाव आयोग वो भरोसा दुबारा से पैदा नहीं करता, तब तक हमारा ये मानना है ये सवाल उठता रहेगा।

On the question of the jobs being lost rather than being created, Shri Tewari said of the data released by PRAHAR (Delhi based Civil Society Group) who have done a Report in 2016 and in that Report they have indicated that in the past 3-4years, on an average, we have been losing 55,000 jobs per months rather than there being employment generation and even if you go by the Reports which has been put out by the Government in terms of the statistics of the Labour Deptt. etc. they actually point to an extremely alarming and a very dismal situation insofar as employment generation is concerned. You have an economy which is stagnating, you have no employment which is being created and whatever employment opportunities are there, this Government has been unable to preserve it.

Shri Tewari further added that there are certain things which are before the core national interest of this country and at the core of that core is to give sustainable employment to the young people of India. And therefore, the economic track record of this Government which has been abysmal and dismal, if you dehash the statistical jugglery of changing the base year from 2004-05 to 2011-12 in terms of calculating growth of GDP, you have a situation when the Indian GDP is only growing by 5% and this is completely unsustainable rate of growth given the demographic challenges of India. So, therefore, we will talk facts, I will not like to use the word 'alternative truth'  but the facts about the performance of this Government to the young people of India. 

On the reaction of the Congress Party on the statement of Ms. Uma Bharati on Hon'ble Supreme Court's judgment in Babri Masjid case, Shri Tewari said obviously the Hon'ble Supreme Court decision has rattled the Hon'ble Minister and therefore, she is trying to shoot from the hip and I do not think that such a reprehensible preposterous statement needs to be dignified with a comment.

The Congress Party, the former UPA Government has repeatedly expressed regret about what happened in 1984 in Delhi and unlike the current people who are now in Government, who have been completely unapologetic of the pogroms which have happened under their watch, and insofar as the current statement is concerned, it just shows that the Government and especially the Minister in question is completely and absolutely rattled.

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