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Highlights of the press briefing of Shri Ghulam Nabi Azad 29-4-2017

Created on Saturday, April 29, 2017 12:00 AM

  https://www.youtube.com/watch?v=Q0QNdCb97Z4&feature=youtu.be

ट्रिपल तलाक पर, पूछे गए प्रष्न पर मोदी जी द्वारा की गई टिप्पणी पर श्री आजाद ने कहा कि वे ट्रिपल तलाक के बारे में तीन चीजें बताएंगे। सबसे पहले प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि इसका राजनीतिकरण ना करें। मैं पूछना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री सबसे बडे़ चैम्पियन हैं राजनीतिकरण करने के, यह सबसे बड़ा राजनीतिकरण है कि भूल ना जाना, मैं इसके बारे में चर्चा जरूर करूंगा। और राजनीतिकरण कौन करता है। कभी एआईएडीएमके से कोई बात सुनी, डीएमके से कुछ सुना, बीजेडी से कोई बात सुनी, आप ने जेडी (यू) से कोई बात सुनी, समाजवादी पार्टी से आप ने कोई बात सुनी, बीएसपी के नेता से कभी कोई बात सुनी, कांगे्रस के नेता से कोई बात सुनी, टीएमसी के नेता से कुछ सुना? भारत के इतनी राजनीतिक पार्टियां हैं, एक नेता का नाम दे दो जिसने इनिषिएट किया हो।

24 घंटे भाजपा के लीडर माननीय प्रधानमंत्री से लेकर और आर. एस. एस. के वर्कर तक, प्रचारक तक उनका यह एजेंड़ा राजनीतिकरण का। मैंने एक भी किसी और पार्टी की तरफ से नहीं सुना है। ताक सबसे पहले, माननीय प्रधानमंत्री जी बाकियों को नसीहत ना दें, अपने आप पर कंट्रोल करके, अपनी पार्टी पर कंट्रोल करें।

दूसरा कोई भी मुसलमान जो कुरान पर यकीन रखता है, चलते-चलते कोई तलाक तलाक तलाक नहीं कहता है, मैं नहीं समझता कि कोई मुसलमान उसको अच्छा मानता है और मानना भी नहीं चाहिए। क्यूंकि यह षर्रियत और कुरान के भी खिलाफ है, इस्लाम के भी खिलाफ है।

भाजपा केवल राजनीतिकरण करती है ट्रिपल तलाक के उस तरीके को जिसे भाजपा पेष करती है, वो है ही नहीं, वो गैर कानूनी है वो स्टैंड नहीं करेगी ना घर में कहीं स्टेंट करेगी ना कुरान में कहीं स्टेंड करेगी और ना कानूनी रूप से स्टेंड करेगी। क्यूंकि यह तलाक, तलाक ही नहीं है कुरान के हिसाब से। वो एक लंबा प्रोसेस है। मेरे ख्याल से उस प्रोसेस को किसी ने समझा ही नहीं है। कुरान मंे लिखा गया है कि कैसे होना चाहिए। उसमें मौका दिया गया है, उसमें समय निर्धारित किया गया है। पहला, दूसरा और तीसरा मौका और उसमें समय निर्धारित किया गया है। यह ऐसा नहीं है कि आप चलते फिरते कर लें।

तीसरी चीज मैं यह बताना चाहता हूं, इस समाज में हजारों सालों से हमारे देष में रहा है, हमारे देष में कई धर्म हैं कई प्रथाएं हैं, कई कुरीतियां हैं, एक जमाने में हम किताबों मंे सती के बारे में पढ़ते थे-वो प्रथा खत्म हो गयी। पति मर जाता था, दूसरी षादी नहीं कर सकते थे, तो यह हिन्दु धर्म के 500 साल के बडे़ ट्रांसिषन से निकला, समाज में जो दिक्कतें आती थी, समय के साथ उसमें तबदीली आ गई।

इस्लाम जब से षुरू हुआ, उसमंे लोगों ने कई इंटरपे्रटेषन निकाली जो षायद मजहब के हिसाब से नहीं थी, कुरान के हिसाब से नहीं थी, उसमें तबदीलियां आ गई। एक प्रक्रिया चल रही है, पढे़ लिखे लोगों में क्या फर्क है, क्या नहीं है, तो एक हमारा जो समाज है- कोई भी धर्म हिन्दु धर्म हो, इस्लाम हो या ईसाई धर्म हो, उसमें जितना समय जाएगा, उसमें जो अच्छी चीजें हैं, उनको लोग रखते हैं, जो चीजें ठीक नहीं हैं, वो फेस आउट हो जाती है। तो मेरे ख्याल में भी जो असली चीज है, जो कुरान के मुताबिक है, लेकिन जो किसी मौलवी ने खुद बनाई है, वो नहीं रहेगी। तो जब समाज इस पर चर्चा कर रहा है, अदालत के विचाराधीन है, तो भाजपा को खामखाह में नया वोट बैंक बनाने की कोषिष नहीं करनी चाहिए, बहकाने की कोई कोषिष नहीं करनी चाहिए।

जम्मू-कष्मीर में बातचीत के विशय पर पूछे गए प्रष्न पर श्री आजाद ने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीष व दो न्यायाधीषों में भारत सरकार को बताया है और जो पत्थरबाजों को भी बताया है, मैं उसका स्वागत करता हूं। भारत सरकार को उन्होंने कहा है कि बातचीत करनी चाहिए लेकिन उसके साथ-साथ भारत सरकार का जो रवैया है, उसकी भी मैं निन्दा करता हूं।


एक तरफ से उच्चतम न्यायालय का कहना है कि बातचीत करो दूसरी तरफ से सरकारी वकील कहता है कि हम बातचीत नहीं करेंगे। क्या वायदा करके जम्मू-कष्मीर में भाजपा ने सरकार बनाई थी और षर्म की बात है कि सुप्रीम कोर्ट के कहने के बावजूद भारत सरकार का वकील कोर्ट को कहता है कि बातचीत नहीं करेंगे। कष्मीर कोई दूसरा मुलक नहीं है, कष्मीर हमारा अपना मुल्क है, क्या आप अपने मुल्क के लोगों से बात नहीं करेंगे?

खुद प्रधानमंत्री जी ने पाकिस्तान के साथ कितनी मीटिंग की, इनके एनएसए की कितनी मीटिंग हुई, दोनों प्रधानमंत्री मंे कितनी मीटिंग हुई, जब बात करनी नहीं थी तो इतनी मीटिंग क्यांे की। उनके षादियां क्यांे अटंेड करते थे। बर्थडे पार्टी क्यांे अटेंड करते रहे। वो षाल और आमों का आयात और निर्यात क्यों चल रहा था दो घरों के बीच में। और आज बात नहीं करना चाहेंगे।

ये राजनीतिक मामले, राजनीति से ही हल होंगे और होने चाहिए, यह अड़ियापन रवैया कि बात नहीं करेंगे वहां केवल सिविलियन ही नहीं मर रहे, हमारे जवान कितने मरे हैं, हजारों की तादाद में नौजवान मरे हैं, हजारों की तादाद में जवान भी मरे हैं। फौजी भी हमारे और लोग भी हमारे।

माननीय प्रधानमंत्री जी मैं निवेदन करूंगा कि कुछ महीने के लिए किसी और को यह काम सौंपे, आपको प्रधानमंत्री बनाया है, देष की जनता ने प्रधानमंत्री का काम भी करंे, आप पंचायत से लेकर संसद तक 365 दिन केवल प्रचार ही करते रहते तो प्रधानमंत्री या तो किसी और को इस कार्रवाई पर लगाएं, ताकि यह कष्मीर का मामला हो, पूर्वोत्तर का मामला हो, चाहे दूसरे मामले हों, जिसके पास समय हो, उसे लाएं।

On the question of the reaction of the Congress Party on the statements of  Government functionaries on Tax on Agriculture, Shri Azad said after some clarification, there comes some more statements. We have seen on earlier occasions such statements, contradictions and then ultimately whatever they contradicted, that had happened. So such statements from BJP are not new. We know how they opposed GST and now they became the champions of GST. You know number of Acts and rules which we wanted to bring in, which we wanted to pass, they opposed tooth and nail and then the BJP Government became the champion of those Legislations.

On the question of the leak of Dhingra Commission Report, Shri Azad said whatever Commission it may be, these Commission based enquiries are the political vendetta of the worst part, worst order.
 
BJP is playing worst as I said in the matter of political vendetta in the history of Indian politics. This is the political vendetta of the worst order. We can't believe that Government can go so low.


 
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