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Press Releases

Congress party press briefing along with youtube links on 3 Saal, 30 Tikdam 16-5-2017

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि मैं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से मेरे सभी सम्मानित साथियों का इस पत्रकार वार्ता में स्वागत करता हूं। देश 3 साल से असफलता की तपती सड़क पर नंगे पाँव चलने को मजबूर है। ना मील का पत्थर दिखाई देता है और ना मंजिल का रास्ता, नाकामयाबी के घावों पर नफरत का नमक और छिड़का जा रहा है। हमारे कुछ साथियों ने इस देश की ओर से कुछ लाईनें लिखी हैं, मैं आपको वो पढ़कर सुनाता हूं,

तीन सालों में  कुछ जीत खड़ी की है उन्होंने,
अर्थ व्यवस्था ,  रोजगार , खेत खलिहान , कारखाने ,
इन सब की हार की बुनियाद पर।
 

हरा कर युवाओँ की उम्मीदों को, किसानों - सैनिकों की  जिंदगियों को,
हरा कर महिलाओं-दलितों के सुरक्षा के भाव को,
कुछ जीत खड़ी की है  ।
 

इन तीन सालों में  रौंद कर देश के भाई चारे और सद्भाव को,
बाँट कर देश को  रंगों ,भाषा  और जात के नाम पर ,
कुछ जीत खड़ी की है ।

 

इतिहास की गौरव भरी उपलब्धियों को ,
भविष्य की असीम संभावनाओं को  हरा कर ,
कुछ जीत खड़ी की है ।
 

चुनिंदा, गढ़े हुए अभिनय से भरे हुए भाषणों से ,
झूठे-प्रचुर प्रचार से ,परिणाम विहीन वादों से,
कुछ जीत खड़ी की है ।
 

तीन सालों की उपलब्धियों में अपने दल की जीत और
देश की हर मोर्चे पर हार तय की है ।
हां ,ऐसे ही जीत खड़ी की है उन्होंने ।
 

और इसलिए 3 साल की 30 तिकड़म में उन्होंने इस सरकार के 3 साल को परिभाषित किया है।

https://www.youtube.com/watch?v=9CdniZ2QDC8

श्री ज्योतिर्दित्य सिंधिया ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि 2014 मंल जब इस देश में एक नई सरकार स्थापित हुई थी तो लोगों के लिए एक नई आशा की किरण पिरोने का काम, सपनों को दिखाने का काम भाजपा ने किया था। जन-जन ने आशांवित नजरिए से इस सरकार को देखा कि यह सरकार किसानों के लिए, महिलाओं के लिए, नौजवानों के लिए, समाज के हर वर्ग के लिए कुछ नया करके दिखाएगी। भारत एक ऐतिहासिक देश है, हजारों साल पुराना हमारा इतिहास है। अगर इस देश को हमें आगे बढ़ाना होगा तो एक सांम्प्रदायिक नींव पर, एक उदार विचारधारा की नींव पर, एक धर्मनिरपेक्षता की नींव पर इस देश की आर्थिक क्षमता को विश्व पटल पर हमें उजागर करना होगा। लेकिन पिछले 3 सालों में अच्छे दिनों के सपने पिरोकर जिस तरीके से इस देश के हर नागरिक के जीवन को असहाय रुप में तब्दील इस सरकार ने कर दिया है, उसके आधार पर इस देश की 125 करोड़ जनता के बुरे दिन से अच्छे दिन में तब्दील होने की आशा और सपनों को चूर-चूर करके इस सरकार ने छोड़ दिया है। असहिष्णुता का माहौल आज पूरे देश में निर्मित है और अगर कोई व्यक्ति या दल या नेता इस पर चर्चा करे तो उसे देशद्रोही का दर्जा दिया जाता है। ये सरकार सिखाने की कोशिश करती है कि क्या खाया जाए, क्या सीखा जाए, क्या पढ़ा जाए, क्या पहना जाए, एक रेजिमेंटिड़ सोच विचारधारा के आधार पर ये सरकार अपनी नीति आगे बढाने की कोशिश करती है।
 

एंटी रोमियो स्क्वॉयड का गठन, जहाँ हर एक व्यक्ति से पूछताछ की जाए, उसे परेशान किया जाए, यही इस सरकार की विचारधारा और नीति रही है। सबसे आश्चर्यजनक बात है जो आज हमने इस वीडियो में भी देखा कि जिस तरीके से एक दलित विरोधी सोच-विचारधारा आज पूरे देश में इस सरकार और उसके नुमाईंदों ने उत्तपन्न की है, जहाँ एक तरफ बाबा साहेब अंबेडकर जी की जयंति मनाने के लिए एक विशेष सत्र बुलाया जाता है, मऊ में कार्यक्रम किया जाता है, लंदन में अबेंडकर भवन खोला जाता है, लेकिन दिन-प्रतिदिन इस देश के करोड़ों दलितों भाई-बहनों के साथ अत्याचार किया जाता है और ये सरकार मूक-दर्शक के रुप में देखती रहती है।
 

मेरे प्रदेश में 50 दलित परिवारों ने इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है, लेकिन कोई सुनने के लिए तैयार नहीं है। प्रधानमंत्री जी मेरे प्रदेश में जाते हैं विश्व आदिवासी दिवस पर और विश्व उन्मूलन दिवस के पोस्टर निकाले जाते हैं, ये आदिवासी मुक्त और दलित मुक्त भारत चाहते हैं। हरियाणा की घटनाओं ने हमारे दिल की जंजीरों को झकझोर दिया है। रोहित वेमूला की घटना, गऊ माता के आधार पर जो ऊना में घटना हुई, जहाँ ये मानते हैं कि हर नागरिक के माथे पर कंलक है। आश्चर्य की बात ये है कि इनके नुमाईंदे कहते हैं कि जो हुआ वो अच्छा हुआ। जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग जब गैर-जिम्मेदार वक्तव्य देते हैं, मंत्रालय में बैठे हुए लोग जब दलितों के बारे में टिप्पणी करते हैं और सरकार मूक-दर्शक के रुप में बैठे जाती है तो इनकी नियत और सोच साफ हो जाती है।
 

मनमोहन वैद्य और मोहन भागवत कहते हैं कि आरक्षण समाप्त कर दो। साम्प्रदायिक सद्भाव की हमारी विचारधारा को पूरी तरह से तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, चाहे लव जिहाद की बात करो, चाहे घर वापसी की बात करो, चाहे कैराना हादसे की बात करो, चाहे सहारनपुर में आजकल आए दिन जो घटनाएं हो रही हैं वो हमारे सामने हैं, चाहे दादरी, ऊना या अलवर में जो घटना हुई हैं, मैं मानता हूं कि ये देश की उदार विचारधारा के उपर बहुत बड़ा कलंक है।

इन्होंने तो स्वतंत्र संस्थानों को भी नहीं छोड़ा। बात करते हैं ये मिनिमम गवर्मेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस की, लेकिन असलियत में होता है बिल्कुल विपरीत - मैक्सिमम गवर्मेंट, मिनिमम गवर्नेंस। हमने देखा इस साल की खादी की डायरी में से बाबू महात्मा गाँधी जी की तस्वीर को हटा दिया और प्रधानमंत्री जी की तस्वीर डाली गई और इस पर इनके हरियाणा के मंत्री कहते हैं कि ठीक किया क्योंकि जबसे बापू खादी की डायरी में रहे, खादी डूब रही है और बापू को तो रुपए के नोट से भी निकाल देना चाहिए क्योंकि तबसे रुपया डी-वेल्यू हो रहा है। अगर ये इनकी सोच-विचारधारा है, इस देश के राष्ट्रपिता के प्रति तो हम समझ सकते हैं कि ये किस तरह से इस देश को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

शिक्षा के संस्थानों पर वार, चाहे वो FTII  हो, NIT हो, हैदराबाद सैंट्रल यूनिवर्सिटी हो और जब मीडिया मुद्दे उठाते हैं तो आपको ब्लैक आउट करने की धमकी दी जाती है। यही नहीं लेकिन RBI जैसी संस्था जिसे इस देश में स्वतंत्र संस्था हम मानते हैं वो आज सरकार की उंगलियों पर नाच रही है। प्लानिंग कमीश्न जिसने 60 सालों से देश की आर्थिक नीति बनाई, आज वो लॉटरी और बंबर ड्रॉ की आर्किटेक्ट बन कर रह गई है।

यही नहीं अगर हम आंतरिक सुरक्षा का मामला देखें तो कश्मीर में क्या हालात बने हैं, नौजवान सड़क पर आ चुके हैं और बदले में प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि हमें किसी से कश्मीर के बारे में सीख लेने की जरुरत नहीं है और यही मैरिज ऑफ कन्विनियंस, कन्विनियंस की शादी पीडीपी और बीजेपी के बीच में है उसी की बदौलत आज जो कश्मीर की स्थिति हो चुकी है, क्या कश्मीर में नौजवानों को चैन और शांति के वातावरण का हक नहीं है। कौन सा कदम ये सरकार उठा रही है उनके विकास, प्रगति और रोजगार के लिए। पठान कोट के हमले के बाद आज भी 3000 ऐसे कैंप हैं, आर्मी के जो असुरक्षित हैं। 2000 करोड़ रुपए का आवंटन होना चाहिए, लेकिन आज तक इन्होंने एक रुपया भी खर्च नहीं किया। इतनी घटनाओं के बाद क्या एक भी चर्चा विपक्ष के साथ इन्होंने की? मुझे याद है कि जब घटना हुई थी यूपीए सरकार में, उस समय डॉ. मनमोहन सिंह और नेशनल सिक्योरिटी एडवाईजर शिव शंकर मेनन जी ने अरुण जेटली जी और सुषमा स्वराज जी से चर्चा की थी, लेकिन आज एक तरफा सरकार है। एक सोच, एक विचारधारा, एक अंग्रेजी कहावत है- It is my way or it is the high way.

नक्सलवाद की बात करें तो कितनी बढ़ोतरी हुई है पिछले 3 वर्षों में 12 सीआरएफ के जवानों ने अपने जीवन की आहुति दी, सुकमा की घटना जहाँ 35 जवानों ने जीवन की आहुति दी, लेकिन हर बार जहाँ घटनाएं होती हैं, हमारे फौज के जवान या सीआरएफ के जवान अपनी जान देते हैं तो ये कहते हैं कि मुँह तोड़ जवाब देंगे, लेकिन कदम कहीं नहीं दिखता इस सरकार का।
 

यूपीए सरकार ने कई योजनाएं निकाली थी- वन अधिकारी नियम, इंटिग्रेटिड एक्शन प्लान निकाला था, बैकवर्ड रिजन ग्रांट फंड निकाला था, नक्लसवादी क्षेत्रों के विकास और प्रगति के लिए, लेकिन इन सब पर पूरी तरह से इस सरकार ने पाबंदी लगा दी है। जहाँ तक इस सरकार की विदेश नीति की हम बात करें तो मौसम की तरह विदेश नीति बदलती रहती है। एक तरफ कहते हैं 56 ईंच की छाती पाकिस्तान को हम दिखाएंगे और दूसरी तरफ साड़ी-शॉल की डिप्लोमेसी होती है और शादी में अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए वहाँ पहुंच जाते हैं।
 

आज सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है कि पाकिस्तान के विरुद्ध हम कौन से कदम उठा रहे हैं?  MFN की ट्रीटी है, क्या उसको हम वापस नहीं ले सकते, क्या उनको आतंकी देश के रुप में विश्वपटल पर उजागर नहीं कर सकते लेकिन इनकी कथनी और करनी में जमीन आसमान का फर्क है। सीमावर्ती इलाकों में संघर्ष विराम का उल्लंघन, पिछले 3 वर्षों में 200 से अधिक हमारे जवानों ने अपने जीवन की आहुति दी है। 91 नागरिकों ने अपने जीवन की आहुति दी है और पूरे राष्ट्र में अगर हम देखें तो ये आंकड़ा 600 तक पहुंच जाता है। 1374 सीमावर्तीय इलाकों में संघर्ष विराम उल्लंघन हुआ है और जब हमारे जवानों की शहादत होती है, जब हम सरकार में थे तो सुषमा स्वराज जी ने कहा था- ‘एक सिर के बदले 10 सिर’, स्मृति ईरानी जी ने कहा था- कि ‘प्रधानमंत्री को चूडियाँ पहन लेनी चाहिएं’, राम माधव जी ने कहा था- कि ‘एक दांत के बदले में जबड़ा लेना चाहिए’ और प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा था कि ‘लव लैटर लिखना बंद करो भाषा से जवाब देना होगा, गुनाह पाकिस्तान करे और जवाब भारत सरकार दे और आज हम पूछना चाहते हैं कि जब हमारे सैनिकों की शहादत होती है तो आज हमारी भारत सरकार क्या जवाब देती है पाकिस्तान को? चीन हमें चारों तरफ से घेरने की कोशिश कर रहा है, अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ हो रही है, पाकिस्तान के साथ चाईना-पाकिस्तान ईक्नॉमिक कॉरिडोर की चर्चा हो रही है, ग्वादर पोर्ट में निवेश हो रहा है, श्रीलंका में निवेश हो रहा है, बर्मा में निवेश हो रहा है लेकिन आज हमारी सरकार केवल मूक-दर्शक की तरह बैठी है।

India is going through a troubled situation. China intrudes our borders. Pakistan kills our soldiers time and again but the Centre does not act.

ये वक्तव्य मेरा नहीं नरेन्द्र मोदी जी का था जो आज के वर्तमान के परिपेक्ष्य में अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूरे देश में महिलाएं असुरक्षित हैं। किसान आत्महत्या कर रहा है, आर्थिक क्षेत्र में देखें तो हमारे नौजवान बेरोजगार भटक रहे हैं। 2 करोड़ रोजगार देने का वायदा किया था, लेकिन पिछले 3 साल के आंकड़े देखें तो 2014 में 4 लाख 90 हजार रोजगार के अवसर, 2015 में 1 लाख 35 हजार और पिछले वर्ष केवल 1 लाख रोजगार के अवसर दिए हैं। तो आज मैं पूछना चाहता हूं कि देश की जनता जवाब चाहती है, देश की जनता अकाउंट चाहती है, देश की जनता इस असहिष्णुता के माहौल से मुक्ति पाना चाहती है और अच्छे दिन कब आएंगे इस प्रश्न का जवाब देश की जनता चाहती है? 3 साल, देश बेहाल, यही है भाजपा का कमाल।

श्री सचिन पायलट ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि जो आपने अभी वीडियो देखा और जैसा की ज्योतिर्दित्या सिंधिया जी ने कहा कि इन 3 साल के पूरे होने के बाद वायदे, जुमले, पोस्टर और विज्ञापन की आज क्या वास्तविकता है, हकीकत क्या है, हमें लगता है कि जो आपने इस वीडियो में देखा ये इस सरकार के पूरे 3 साल के कार्यकाल का समावेश है। लेकिन सबसे ज्यादा पीड़ा वाली बात ये है कि जो-जो शब्द आपने देखे इस वीडियो में उस पर आप ध्यान दें तो सबसे ज्यादा पीड़ा और दुख अगर किसी को हुआ है तो वो है इस देश का किसान वर्ग। पूरे देश में किसान के जो हालात हैं उसे ना तो को व्यक्ति इसको रेखाकिंत कर पा रहा है और ना ही वो मुखर तरीके से बाहर निकल कर आ पा रहा है। उसका कारण ये है कि जो ज्वलंत मुद्दे हैं, जो व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं, उन मुद्दों पर चर्चा ही नहीं है क्योंकि भावनात्मक मुद्दों, ऐसे मुद्दों को जो विवादित मुद्दें हैं, उनकी चर्चा करके भाजपा और सरकार लोगों का ध्यान भटका रही है।

अगर आंकड़ों की बात करें तो पिछले 3 साल में कृषि विभाग में जो कटौती हुई है, 2015-16 के बजट में कृषि मंत्रालय को 3 हजार 825 करोड़ रुपए कम दिए थे और लगातार उसका ईफेक्ट हो रहा है। आपने देखा कि मोदी साहब ने कहा था कि जितना इनपुट कोस्ट है खाद का, बीज का, तेल का, पानी का, बिजली का उन सबको जोड़ने के बाद 50 प्रतिशत मुनाफे वाला MSP तय करेंगे, ये सार्वजनिक रुप से पब्लिक मीटिंग में कहा था सत्ता परिवर्तन से पहले। हमारी सरकार केन्द्र मे रही और हमें फक्र है हमारी सरकार के उपर कि किसानों को, छोटे लघु किसानों को जो 2,3,4 बीके में खेती करते हैं, हल, ट्रैक्टर चलाकर अनाज पैदा करता है, इस देश का पेट पालता है। उस छोटे किसान की मदद करने के लिए हमने 72 हजार करोड़ रुपए का ऋण माफ किया था। ये राजनीतिक वायदा नहीं था। हमारी GDP बढ़ी, उद्योग आए, संसाधन आए और हमने सबसे छोटा जो सीमांत किसान है, बिना मागे उसका कर्जा माफ किया। बहुते से भाजपा नेताओं ने कहा था कि इससे किसान बिगड़ जाएगा, अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी, बैंको का बैंलेस बिगड़ जाएगा, ये उन नेताओं के बोल थे, लेकिन फिर भी हमारी सरकार ने उस कदम को उठाया और जनता आज भी उसे याद करती है।

भाजपा को देखिए और मुझे खुशी है कि अपने भाषणों में उन्होंने अरहर पर चर्चा की, अरहर दालों का नाम भी आपने उनके भाषण मे सुना। राज्य सरकारों ने लिखित में कहा है कि अरहर दाल को पैदा करने के लिए एक क्विंटल पैदा करने के लिए जो खर्चा आता है तेलंगाना में 6 हजार 800 रुपया प्रति क्विंटल, कर्नाटक में 5 हजार 100 रुपया प्रति क्विटंल की लागत आती है, सरकारी आंकड़े हैं, आंध्रप्रदेश में 5 हजार 700 रुपए प्रति क्विटंल की लागत आती है और MSP जो मोदी सरकार ने तय किया है वो है 5000 रुपये। लागत से भी कम, लेकिन दुर्भाग्य ये है कि जो MSP  तय की है 5 हजार 50 रुपया, उसकी भी प्रोक्योरमेंट पॉलिसी इतनी खराब है कि वो पैसा भी लोगों को नहीं मिल पा रहा है और 4200, 4500 रुपए प्रति क्विटंल पर वो दाल बिक रही है। प्याज का क्या हाल है, आलू को सड़कों पर फैंक रहे हैं। उत्त प्रदेश के गन्ना किसानों का क्या हाल है, कागजों में ऋण माफ हुआ है लेकिन गन्ना किसानों को फायदा पहुंचाने की बड़ी-बड़ी बातें की थी, लेकिन धरातल पर वो कहीं नहीं साबित हुई।
 

जो आर्थिक सर्वे 2016 का है उसमें सरकारी आंकड़े कहते हैं कि एग्रीकल्चर ग्रोथ नेगेटिव है। भाजपा सरकार ने धीर-धीरे जो इम्पोर्ट ड्यूटी थी, गेहूं पर, पहले 25 प्रतिशत थी, 15 प्रतिशत थी, 10 प्रतिशत थी अब शून्य कर दी है नवंबर 2016 में। अब किसान अपनी जान कैसे बचाए और जो MSP है 1600 रुपए क्विंटल गेहूं पर उस पर किसान की पार नहीं पट रही है। हमारी सरकार के समय प्राईस स्टेबलाईजेशन फंड था, जो डिस्ट्रेस में किसानों की मदद करने के लिए जिसका प्रयोग किया जाता था। प्राईस स्टेबलाईजेशन फंड अब बजट से ही निकाल दिया गया है।

प्रधानमंत्री जी ने फसल बीमा योजना की बड़ी-बड़ी बातें की, स्यॉल टेस्टिंग की बातें की गई हैं लेकिन 3 साल में आज किसान का ना केवल आर्थिक नुक्सान हुआ है, राजस्थान में 60 किसानों ने आत्महत्या की है, पहली बार राजस्थान में 60 किसानों ने आत्महत्या की। सरकार ने उनको कोई मुआवजा नहीं दिया और उसको छुपाने की पूरी कोशिश की।

सरकार के काम में इतना विरोधाभास है कि और कुछ कहने की जरुरत नहीं लेकिन मैंने शुरु में कहा था कि जो बेरोजगारी के सवाल है, महंगाई के सवाल हैं, किसान के सवाल हैं वो सब धीर-धीरे दबते जा रहे हैं क्योंकि चर्चा जो हो रही है घर वापसी की हो रही है, गौ-रक्षक किसे मार रहे हैं, मारपीट हो रही है और हमारे देश में लगातार 3 साल में जो बीफ एक्सपोर्ट है, वो बासमती से ज्यादा है। ये वो सरकार है जो गौ-माता, सरंक्षक के नाम पर वोट लेना जानती है लेकिन राजस्थान में साढ़े 5 हजार गाय गौ-शाला में दम तोड़ गई है, वहाँ पर कांग्रेस और सेवादल ने जाकर सेवा की, हमने जाकर चारा खिलाया। सरकारी प्रोक्योरमेंट में घपला हुआ और इसलिए सरकारी गौ-शाला में 5 हजार 400 गाय मर गई। जब गाय मरती है तो कोई भाजपा या आरएसएस का नेता सामने नहीं आता।

जयपुर के अंदर साढे 400 मंदिर तोड़ दिए बुलडोजर चलाकर, तब इन्हें मंदिरों की याद नहीं आई। आज भाजपा सरकार पूरी तरह से बेनकाब हो चुकी है और मुझे लगता है सारी बातें छोड़ कर जो जुमलेबाजी हो रही है, जिसको आपने खुद अपने कानों से सुना, उन बातों को विराम देकर अंत के जो 23-24 महिने बचें हैं इस सरकार के उनको अपना पूरा ध्यान केंन्रीरात करना होगा उन किसानों पर जिन्होंने इस सरकार पर विश्वास किया और माना कि हमारा भविष्य बेहतर हो सकता है लेकिन पूरे देश में जो माहौल बना है वो चाहे घर वापसी का हो, एंटी रोमियो स्कॉड का हो, वो देश में एक विचारधारा को थोपने का प्रयास किया जा रहा है। लोगों को आतंकित भी किया जा रहा है, अलग-अलग क्षेत्रों में। इंडिपेंडिड संस्थाएं हैं उनको अंडर माईन किया गया है और अपने ब्रूट फोर्स के दम पर भाजपा अपने आपको स्थापित करना चाहती है अलग-अलग प्रदेशों में। रिविर लिंकिग का बहुत बड़ा जुमला दिया था, मैं पूछना चाहता हूं कि 3 साल में कौन सी नदियों को जोड़ा गया है, कहाँ का डीपीआर तैयार हुआ है, कौन सा ब्लू प्रिंट तैयार हुआ है? कृषि क्षेत्र को पूर्णत: नजरअंदाज किया गया है।

दावे के साथ हम कह सकते हैं कि मोदी साहब जो लैंड एक्वीजिशन बिल पर आर्डिनेंस लाए थे, लोकसभा में हमारे सिर्फ 44 सांसद थे, लेकिन सारे विपक्ष के नेताओं के साथ मिलकर दबाव बनाया और लैंड एक्वीजिशन बिल को लागू नहीं करने दिया। पहला काम उन्होंने ये किया था कि लैंड को बदलो, आठ आर्डिनेंस लाए, नहीं हुआ, दिल्ली में हमने बड़ा सम्मेलन किया और सोनिया गाँधी जी और राहुल गाँधी जी के नेतृत्व मे पूरे विपक्ष ने विरोध किया और वो नाकामयाब हुए। इस सूट-बूट की सरकार ने केवल भाषणों में देश तब्दील करने का काम किया है लेकिन सच्चाई ये है कि देश में किसान आज बेहाल है और हम उम्मीद करते हैं कि ये सरकार इनकी आवाज सुनेगी और उनकी भलाई के लिए काम करेगी।

श्री आर.पी.एन सिंह ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि हम सबने एक वीडियो देखा और उसमें तमाम भाषण भाजपा नेताओं के देखे जो चुनाव से पहले थे। एक नारा तीन साल पहले इस सरकार ने दिया था राष्र्खवाद का कि किस तरह से पाकिस्तान के सामने कैसे यूपीए सरकार ने घुटने टेक दिए, चीन के सामने कैसे घुटने टेक दिए हैं और आंतरिक सुरक्षा की वजह से देश का अस्तित्व कमजोर हाथों में है। बहुत जल्दी में संक्षिप्त में कुछ आंकड़े आतंरिक सुरक्षा के बारे में आपके सामने पेश करना चाहता हूं। जम्मू-कश्मीर की बात सिंधिया साहब जी ने की, जम्मू-कश्मीर के क्या हालात हैं, उसको मैं बताना चाहता हूं- 90 के दशक में जब सबसे खराब हालात थे और जब चुनाव वहाँ पर हुए थे तो 43 प्रतिशत लोगों ने वोट डाले थे। 2014 में इस सरकार के बनने से पहले जब NC-Cong की सरकार थी, 65 फीसदी से ज्यादा लोगों ने अपने मत का प्रयोग किया था और आज जब चुनाव हुए तो कुल 7 प्रतिशत मत पड़े। आंतरिक सुरक्षा और कश्मीर के वायदे करने वाली बीजेपी सरकार इसका जवाब क्यों नहीं देती है? कितने लोगों की मौते हुई? ये शर्म की बात है कि अगर एक भी जवान देश का मरता है तो वो देश को शर्मसार करता है। परंतु जिस तरह से सीजफायर वॉयलेशन देखे और इन 3 सालों में छाती की बात करना नहीं चाहता हूं, 12 बड़े आतंकवादी हमले कश्मीर में होते हैं और वो हमले कहाँ होते हैं सिक्योरिटी एस्टेब्लिश्मेंट में, उरी में होते हैं, पठानकोट में होते हैं, कुपवाड़ा में होते हैं और वही सरकार जो हमको कमजोर कहती थी वो जांच के लिए किसको बुलाती है, आईएसआई जैसे संगठन को जांच कराने के लिए पाकिस्तान से बुलाती है।

प्रधानमंत्री पाकिस्तान जाते हैं दावत में और उसके बाद इतने बड़े हमले होते हैं, क्या यही राष्ट्रवाद है, क्या इसी राष्ट्रवाद की बात करते हैं जहाँ हमारे जवान रोज मारे जाते हैं। नौजवान हों, गरीब हों, किसान हों, उसकी बात नहीं होती है।

नक्सलवाद की बात करें झारखंड में, छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है और केन्द्र में भी है। जो नियत और नीति हमने नक्सलवादियों के खिलाफ बनाई थी, वो नियत और नीति नहीं केवल भाषण होते हैं।
 

आज महिलाओं के साथ क्या हो रहा है, सबको याद है वो दर्दनाक घटना जो निर्भया के साथ हुई थी, उस घटना के बाद 15 दिनों के अंदर महिला सुरक्षा बिल का संशोधन करके महिलाओं के लिए यूपीए सरकार कड़ा कानून लाई थी और उस समय भाजपा ने फिर हम पर उंगलियाँ उठाई थी, लेकिन आज अगर देखें जहाँ-जहाँ भाजपा की सरकारें हैं, वो हरियाणा हो, जिस तरीके से घटनाएं हम देख रहे हैं, उत्तर प्रदेश हो, मध्यप्रदेश हो, राजस्थान हो किस तरह की बर्बरता महिलाओं के साथ हो रही है। राष्ट्रवाद के नारे देने वाली ये पार्टी राष्ट्रवाद के बारे में भी सोचती नहीं है और ना ही राष्ट्र के बारे में,  देशवासियों के बारे में भी सोचती नहीं है। 3 सालों में ये सवाल खड़े होते हैं और यही जो सवाल हैं वो इस सरकार की विफलता को हम सबके सामने रखते हैं।

सुश्री सुष्मिता देव ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि सिंधिया जी ने पूरे देश का क्या हाल है वो विस्तार से बताया। सचिन जी ने किसानों के बारे में बताया और आर.पी.एन सिंह जी ने आंतरिक सुरक्षा के बारे में बताया। देश में आज सबसे ज्यादा नाराज कोई है तो वो इस देश का युवा है और ये चिंता का विषय है क्योंकि हम जानते हैं यूनाईटिड नेशन ने कहा है कि India is going to be the youngest Nation by 2020.

इसका मतलब ये है कि जो युवा है आज उसका 3 साल में ही क्या हाल हो गया है, शिक्षा के क्षेत्र में, स्वास्य्ह के क्षेत्र में, सोचने की आजादी के क्षेत्र में मोदी सरकार विफल है। अगर आज किसी देश को पीछे धकेलना हो तो पहला वार युवा पर ही होता है जो मोदी सरकार ने पिछले 3 साल में किया है। आप रोहित वेमूला के बारे में जानते हैं, पंजाब यूनिवर्सिटी में जो हुआ, पूना यूनिवर्सिटी में जो हुआ, जेएनयू में जो हुआ ह, NIT में हुआ है आप लोगों ने अपने अखबारों में लिखा है।

मैं मोदी जी से सवाल करती हूं कि देश के युवा ने ये उम्मीद रखी थी आपसे कि आप बेरोजगारों को नौकरी देंगे 6 करोड़ तीन वर्षों में, लेकिन आपकी सरकार ने सिर्फ साढ़े 4 लाख से भी कम नौकरी देने की सुविधा की है। मैं मोदी जी से पूछना चाहती हूं कि अगर आप उच्च शिक्षा में विश्वास रखते हैं तो 6000 से अधिक सीटें NIT, IIM IIT में क्यों खाली हैं, अगर आप विश्वास करते हैं कि हमारे देश का भविष्य स्कूल में है, शिक्षा में है तो मिड़-डे-मील को आधार कार्ड से क्यों जोड़ा जा रहा है? क्योंकि आज जो आंकडें हैं हमारे देश में स्कूल ड्रोपआउट बढ़ता जा रहा है। तो अगर हम बच्चों को, गरीब बच्चों को स्कूल से हटाएंगे तो सवाल उठता है कि 20,20 तक अगर ये देश युवा देश माना जाएगा, चाईना, पाकिस्तान से भी आगे माना जाएगा तो उनका भविष्य कहाँ है? मोदी जी ने देश के युवाओं को निराश किया है।

Ms. Divya said if you compare the ‘Nirbhaya’ incident that took place during the  UPA-II Government, our decisions were beyond politics. I think every citizen of India participated and the Hon’ble Congress President and the Hon’ble Congress Vice President reached out to the families went beyond politics at that point of time. We also set up the ‘Nirbhaya Fund’, we set up 650 Centers and we also set up the Fast Track Courts for these cases and if you compare that today, out of 650 centres, only 20 centers have been set up. Nirbhaya fund has not been spent and NCRB data says that only 22.2% are tried in rape cases as on today.
 

If you look at the cases that happened in Rohtak or in Gurgaon, the CM has not even visited the victims’ families. In Gurgaon case there has been no arrest so far. The comparison I am trying to make is that when the incident happened during UPA II, the BJP was all up in arm and taking us on. In the worse situation today, the BJP Government is not doing anything for the security of women.
 

She further said when Tarun Vijay made comments on South Indians; it not only reflected on his attitude towards South Indians, but it also reflected the attitude of the current BJP Government. They completely neglected the Southern India e.g. Karnataka - we asked for about Rs. 4,702 Crores for drought relief and received  only Rs. 1,786 crores and Tamil Nadu farmers are also protesting against drought, nobody from BJP visited them, PM did not have time to address their concerns.
 

If you look at Andhra Pradesh, they still have not been given the ‘Special Status’.  In Kerala BJP Government is trying to destroy the PDS system. Kerala was promised in turn for cash crop, they would be given rice, and they have not been given. Funds that were supposed for MNREGA amounting to Rs. 1,500 crores have not been given to them at all. So this is what the BJP Government has done. As far as women security is concerned, it raises serious question marks on BJP if you look at the kind of comments of their Leaders that also reflects on them. Their attitude towards women is regressive.

एक प्रश्न पर कि अब तक मोदी सरकार के विरुद्ध विपक्ष कोई कदम उठाने में क्यों कामयाब नहीं हो पाया, श्री सुरजेवाला ने कहा कि झूठ का मेकअप उतार कर सच का आईना भाजपा सरकार के बारे में दिखाना आज के इस प्रेसवार्ता का और अगले 24 महिने में जमीन पर जो व्यापक जन आंदोलन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस राहुल गाँधी जी, सोनिया गाँधी जी और कांग्रेस के नेताओं के नेतृत्व में तैयार करने का प्रयास कर रही है उसकी ये सतत् शुरुआत है। आप ये पाएंगे कि पूरे देश में एक व्यापक जन आंदोलन सभी उन ताकतों के साथ मिलकर, सभी उन देशवासियों के साथ मिलकर जो इस सरकार के उत्पीड़न का शिकार है और जो भारत के मूलभूत सिंद्धातों में विश्वास रखते हैं, उनके साथ मिलकर इस देश की जनता की आवाज बन अगले 24 महिनों तक जन-जन तक जाकर एक राष्ट्रीय आंदोलन का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस करेगी।

एक अन्य प्रश्न पर कि आने वाले राज्यों में आप अपना संदेश कैसे लेकर जाएंगे, श्री सिंधिया ने कहा कि भाजपा का कैंपेन जो होता है वो है - झूठ बोलो, बार-बार बोलो और जोर से बोलो। लेकिन अंग्रेजी में कहावत भी है, You can fool some of the people for some time, you can not fool all the people all the time. प्रश्न आपका था कि जिन राज्यों 2019 से पहले चुनाव होने वाले हैं, हमारा संकल्प है कि उन राज्यों में जो जमीनी स्तर की कठिनाईयाँ है, विफलताएं है उन सरकारों की उनका समावेश केन्द्र सरकार के साथ मिलाकर उन मुद्दों को केवल ना उठाना लेकिन कांग्रेस पार्टी की जो सोच, विचारधारा है, हमारी जो सकारात्मक पहल है, हमारी जो सोच है अगले 5-10 साल के लिए और सोच-विचारधारा जो निर्णायक है, उस विचारधारा के साथ हम जनता के समक्ष जाएंगे। उदाहरण के तौर पर आज मध्यप्रदेश में किसान बेहाल हैं, महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहा है, दलितों के साथ अत्याचार हो रहा है, विकास प्रगृति की कोई गति नहीं दिख रही है। केवल वर्तमान सरकार की आलोचना नहीं बल्कि कांग्रेस की नीति और सोच के साथ हमारा क्या रोड़मैप होगा विकास का जनता के समक्ष जाएंगे।

इसी संदर्भ में श्री पायलट ने कहा कि भाजपा आज सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी नहीं है वो सरकार चलाने वाला दल है और आप हमारी बातें छोड़ दीजिए, जो धरातल पर आंकडे हैं उससे भाजपा की सरकार मुँह नहीं फेर सकती। केवल मौजूदा सरकार की बुराईयाँ करके हम सत्ता में आएंगे ये हमारा मानना नहीं है। हमारा ये भरोसा है कि मेरे प्रदेश में ही नहीं, देश में एक बेहतर वैकल्पिक व्यवस्था का ब्लू प्रिंट हम तैयार करके जनता के समक्ष जाएंगे। झूठे वायदे थे 15 लाख रुपए खाते में, 2 करोड नौकरियाँ, 50 प्रतिशत मुनाफा किसान को ये सब झूठे साबित हुए हैं। आज जो वास्तविकता है, उतनी बात कांग्रेस करेगी और हम कहते हैं कि जिन राज्यों के नाम आपने लिए उन तमाम राज्यों में कांग्रेस सरकार बनाएगी क्योंकि आज बीजेपी सिर्फ चुनाव लड़ने की मशीन साबित हो चुकी है, वो पीडीपी से हाथ मिलाती है केवल उप-मुख्यमंत्री का पद लेने के लिए, हर जगह वो सत्ता पाने के लिए कोम्प्रोमाईज कर रही है। कांग्रेस पार्टी इतने सालों से अपने सिद्धांतों के बल पर काम करती आई है और हम जहाँ भी चुनाव के लिए जांएगे एक बेहतर व्यवस्था प्रदेशों में कैसे होगी उसका पूरा ब्लू प्रिंट जनता के सामने रखेंगे और पारदर्शिता के साथ लोगों के बीच चुनाव लडेंगे। काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती, आज कल तो इंटरनेट का जमाना है जो बोल दिया है वो कैपचर हो जाता है। जो बातें भाजपा के नेताओं ने बोलीं हैं उनको कोई झुठला नहीं सकता। हम मजबूती से आगे बढ़ेंगे और सच्चाई के साथ लड़ेंगे और चुनाव को जीतेंगे।

एक अन्य प्रश्न पर कि सरकार अपनी 3 साल की उपलब्धियों का बड़ा जश्न मनाने जा रही है क्या कहेंगे, श्री सिंधिया ने कहा कि इस वीडियो के तहत और हमारे वक्तव्य के तहत हमने सच्चाई आपके समक्ष और जनता के समक्ष रखी है। ये सच्चाई वो है जिसके आधार पर देश के हर नागरिक को अपना जीवन व्यतीत करना पड़ता है। भाजपा की आदत रही है मार्केटिंग की, जश्न की, अभी प्रधानमंत्री जी मेरे राज्य में गए थे, नर्मदा सेवा यात्रा का जश्न मनाने, मैं आपके शब्दों का प्रयोग कर रहा हूं। आस-पास के 15 जिलों में एक एक जिले में प्रशासन को 50 लाख से 1 करोड़ रुपए की अथोर्टी दी गई, वहाँ से जनता को ढोने के लिए। क्या से पब्लिक एक्सचैकर का मिसयूज नहीं है। मैं पूछना चाहता हूं कि इनकी रैली की इतनी फंडिग कहाँ से आती है? जश्न मनाना अलग बात है, लोगों की आँखो में धूल झोंकना अलग बात है लेकिन अगर पैर धरातल पर ना रहें तो वो जमीन आपके पैरों के नीचे से भी फिसल जाएगी और ये फैसला 2019 में देश की जनता लेकर ही रहेगी।

Asked about the raids going on the Opposition Leaders, Shri Surjewala said may we ask the BJP Government is VYAPAM not a corruption Scam and has Prime Minister taken action against Madhya Pradesh CM Shri Shivraj Singh Chauhan who was also the Medical Education Minister. May we ask the Prime Minister under what circumstances did Smt. Vasundhara Raje submit an affidavit in favour of a fugitive from law and told British authorities to not disclose that affidavit to Indian authorities. Has he taken action against Rajasthan CM? May we ask Hon’ble Prime Minister what action has he taken on the Gujarat State Petroleum Corporation Scam where Rs. 20,000 crore of exchequer money was lost when he himself was the CM of the State. May we ask the Prime Minister why is he shying away, if the yardstick is morality, why is he shying away from ordering an enquiry into the Sahara-Birla computer excel sheets in which none less than the PM himself has been named repeatedly about having taken bribe. May we also ask Prime Minister why he is not taking action against another one of his colleague the Foreign Minister who helped Lalit Modi escape the clutches of the Law? May we ask the Prime Minister to hold accountable the Finance Minister for Rs 9,091 crore of public exchequer money was swindled when Vijay Mallaya was permitted to escape? Who were the people in the Government who were helping Vijay Mallaya escape? The truth is that the entire landscape of BJP is mired with one corruption scam after another and the truth also is that revenge has become the DNA of BJP Government. We want to reiterate neither Mr. Chidambaram nor any Congress leader or any other leader of Opposition would be deterred, would be cowed down or would fear from this regressive politics of revenge and vendetta.

On another question on the progress on the Presidential candidate and  Mr. Nitish Kumar’s suggestion, Shri Surjewala said we are extremely proud of the fact that the current President of India Shri Pranab Mukherjee comes from the pedigree of a thought process and an ideology that has been the centre point of this country from its formation up till today and would be in future.

As far as candidate for the post of President and Vice President are concerned,  I have said so in the past and let me reiterate again. The post of President and Vice President is intrinsic to our democratic set up for not only is the President the Supreme Commander of our Armed Forces, he is also the protector of our Constitution. It is also the role of President or Vice president to counter the Government when it loses its way. So bereft of political partisanship, you need on these posts an individual who will be able to uphold the highest principles as enshrined in our Constitution. Congress President and Congress Vice President will confer with various people i.e. the leaders of other political parties and we will try and build a consensus around it. I assure as and when we reach a conclusion qua a specific candidature of an individual, we will be happy to inform you.




Please find below 3 साल, 30 तिकड़म youtube link :-

https://www.youtube.com/watch?v=9CdniZ2QDC8

 

 



 
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