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Press Releases

Highlights of the press briefing of Dr. Abhishek Manu Singhvi, MP and Spokesperson 19-05-2017

https://www.youtube.com/watch?v=EGynZRSMwIc&feature=youtu.be

Dr. Singhvi said while the BJP Government is planning a multi-thousand Crores birthday bash, interestingly of course, all acronyms are focused on Modi Ji. So they are calling it Making of Developed India otherwise Modi Fest - Making of Developed India as MODI and also making all kinds of claims with advertorial blitz. On the one hand this is going on, on the other, India, the youth of India, the people of India are facing a grave future, a bleak future and today I am pegging on the issue of number of jobs - Job Creation or all this touting of growth which is nothing but jobless growth. In fact, if you see the Government published figures and they are not my figures, they are not political party figure, they are Government published figure, you can only be reminded of the phrase  'Much ado about nothing'.
 

अपने मुँह मियाँ मिठ्ठू, अपनी बढ़ाई करके अपने आप खुश होना।

In several public rallies Mr. Modi would tell voters each and every time that just give BJP a chance to improve their lives with new jobs and I will give you one quotation, you have many of them - in 2013-2014, one of them says  "I can't do much about those in their 50s but I want to transform the lives of those in their 20s who are seeking new employment”.

Similar quotes are there in the BJP election manifestos and specifically in writing promising 2 Crore jobs every year. This is the claim, this is the 'दावा', and this is the false promise. Actually on the ground, we are having a 'Pink Slip Season' – you know Pink Slips are supposed to signify termination of employment. Every other quarter alarming figures are published showing (a) little or no growth or abysmal growth and (b) pink slips season. Labour Bureau has published it. In eight Labour Intensive Sectors and they are most vital Sectors of our economy - Construction and FMCG etc. etc. The growth is 1.1%. In Numbers, it is 1,35,000 jobs. If this is 'Achhe Din', then obviously the Government's definition of 'Achhe Din' is 'Achhe Din without Jobs', 'Achhe Din Jobs Bin'. I want to give you very recent history – not old history – within memory – recent past – recent published figures of jobs Creation in Lakhs in the last 5–6 years.

In 2009-10 Job creation was 8.7 lakhs. In 2010-11 9.29 lakhs. If you go from 2011-12, it is 3-1/2 Lakhs, 2013-14 it is 4.21 Lakhs, in 2014-15 it is 1.35 lakhs and in 2016-17 it is again 1.35 lakh - more or less static. Manufacturing, Construction, Trade, Transport; Hotels, Restaurants, IT, BPO - India was the toast of the globe in the BPO and IT Sectors. These are the figures from these 8-9 core sectors.

In this 'Jumlebazi' of this Government, I want to ask a few questions through the Media – what is it that they are celebrating? In the next few days, we are going to pan out in the country telling the disaster faced by each sector. It is important to be specific, it is important to nail the lies of the Government, it is important to be factual, it is important to pin point.

It is easy to avoid reality with 'Jumlebazi' but everyone is asking you what is it that they are celebrating? Are they celebrating Joblessness or they are celebrating Jobless Growth. What is the point of 6% growth or 7% growth, although it is only claimed and although it is only under the new series when admittedly the growth of Sectoral employment in the 9 most vital or the 8 most vital sectors of the country is only 1%. It is called Jobless Growth or growth without jobs. Is it this Joblessness or Jobless Growth or job losses or unemployment that the Government is celebrating?

The credibility of the Government, they are all linked – Bank Credit Growth - which is directly linked with the Business Growth which is directly linked to Employment Growth is at the lowest at 5.3% in 2016-17 and it is the lowest in last 63 years. The IIP data, which is the Industrial Data counting Industrial Growth – Production - all this 'Make-in-India' is mere all or the 'Skill India' is there – the IIP data shows flat trajectory or flat growth line of 0.6% till January 2017, close to a mere half a percent.

डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते कहा कि  ये बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि इतने बड़े व्यापक स्तर पर बधाईयों के साथ अपनी पीठ थपथपा कर जश्न मनाए जा रहे हैं, हजारों, लाखों-करोड़ के जश्न तीसरी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में। अपनी पीठ थपथपा रही है मोदी सरकार और इस कार्यक्रम को कहा जा रहा है- Making of Developed  India यानि MODI फेस्ट। इसका औचित्य क्या है, लाखों-करोड़ों का खर्चा, इश्तिहारों का एक आक्रमण, एक तूफान, वायदों के पुलिंदे लेकिन सच्चाई से मीलों से दूर और जो सच्चाई आपको बताने वाला हूं उससे सिर्फ दो चीजें याद आती हैं कि अपने मुँह मियाँ मिठ्ठू, अपनी बढ़ाई करके अपने आप खुश होना।

आपको मोदी जी के वो सब वाक्य याद हैं जो आपने 2013-14 में सुने, प्रचुर मात्रा में सुनें। उनके चुनावी घोषणा पत्र में लिखित रुप से 2 करोड़ रोजगार प्रतिवर्ष देने का वायदा किस बेशर्मी से तार-तार किया गया है। सच्चाई ये है कि आज जिसको आप विकास कहते हैं, जिसको आप विकास मानते हैं, नए आंकड़ों के आधार पर और सरकार के आधार पर, कभी 6 प्रतिशत कहते हैं कभी 7 प्रतिशत कहते हैं, लेकिन ये बात आधारित है कि रोजगार का विकास 1 प्रतिशत है। 1 प्रतिशत, बड़ा स्पष्ट है कि वो बिना रोजगार वाला विकास है। बेरोजगारी की ये बढोतरी है वो दुर्भाग्यपूर्ण और चौंकाने वाली है।

पौने 9 लाख था 2009-10 में नए रोजगार जो बनाए गए थे (2009-10 में 8.7 लाख था)। 2010-11 में सवा नौ लाख और 2014-15 में 1.35 लाख। ये मैं आपको सटीक फीगर बता रहा हूं। कहाँ 9 लाख और कहाँ 1.35 लाख? 7 गुना फर्क। 2 वर्ष से ये चल रहा है और ये सब संबंधित है, आपसी पारस्परिक संबंध रखते हैं। 63 वर्ष में सबसे न्यूनतम विकास है बैंक के क्रेडिट का, जो बैंक देते हैं, क्योंकि बिना बैंक के रुपए दिए गए। औद्योगिक विकास नहीं हो सकता, उद्योग की रफ्तार नहीं बढ़ सकती और उद्योग की रफ्तार के बिना रोजगार नहीं बढ़ सकता। 63 वर्षों में सबसे न्यूनतम दर बैंक क्रेडिट की अगर है तो अब है, 2016-17 में 5.3 प्रतिशत। IIP का जो विकास है वो बिल्कुल न्यूनतम है 0.6 प्रतिशत यानि आधा प्रतिशत, जनवरी 2017 तक।
 

हम ये सब आपके द्वारा इसलिए पूछ रहे हैं कि जुमलेबाजी जरुर कीजिए मोदी जी, वायदे जरुर कीजिए, बहकाइए और बरगलाइए जरुर लेकिन कृपया साथ-साथ ये जरुर बताईए देश को कि आप किस चीज का जश्न मना रहे हैं, किस चीज की बधाई आप दे रहे हैं? Job  Loss के लिए, बेरोजगारी बढ़ाने के लिए? क्या ये आवश्यक है इतना बड़ा खर्चा करना? आप आशिंक रुप से रोजगार बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल करते। आप क्या ठोस कदम उठा रहे हैं रोजगार बढ़ाने के लिए, औद्योगिक प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए और बैंक क्रेडिट की दर बढ़ाने के लिए? ये आपके माध्यम से हम और पूरा देश पूछना चाहते हैं।
 

एक प्रश्न पर कि भाजपा 3 सालों का जश्न मनाने जा रही है, क्या कांग्रेस पार्टी के पास ऐसी कोई योजना है जो मोदी सरकार के दावों को नकार सकें, श्री सिंघवी ने कहा कि अगले 2 हफ्तों में आप देखेंगे कि भारत के विभिन्न भागों में हम सब लोग स्वयं अलग-अलग जाकर इन बिल्कुल निराधार, बेईमानी, बरगलाने वाले दावों और वायदों का पर्दाफाश करेंगें और दिल्ली के बाहर जाकर ये बताएंगे। चाहे कृषि क्षेत्र हो, राष्ट्रीय सुरक्षा हो, जम्मू-कश्मीर का मुद्दा हो या अन्य मुद्दे हों। जागरुकता आपके माध्यम से व्यापक तरीके से विभिन्न भागों में होनी चाहिए। प्रादेशिक शहरों में ये बहुत ही आवश्यक है। 
 

अलग-अलग शहरों में जाते हैं मोदी सरकार की वायदा खिलाफी के बारे में कांग्रेस पार्टी तुलानात्मक आंकड़े देगी। रोजगार के हमने 2 आंकडे दिए।  8.7 लाख और 1.35 लाख का फर्क, ये क्या है? जम्मू-कश्मीर में 10 वर्ष में पर्यटन था, वोटिंग थी, रोजगार की जिंदगी चल रही थी, एक जो समता थी, स्थिरता थी, काम करने की शक्ति थी और जमीनी सच था वो आज से भिन्न था या नहीँ? निश्चित रुप से था।
 

एक अन्य प्रश्न पर कि बीजेपी सरकार में कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं के ऊपर कार्यवाही की जा रही है, क्या कहेंगे, श्री सिंघवी ने कहा कि ये सत्य नहीं है। आप अगर अवसरवादी और सिलेक्टिव जांच करेंगे, आपको मालूम है कि ईडी ने और सीबीआई ने 34 लीडर के विरुद्ध कार्यवाही की है और उसमें से 30 विपक्ष के हैं। जनार्दन रेड्डी के केस में ईडी ने कुछ नहीं किया था, 500 करोड़ तो उन्होंने शादी में खर्च किया, उनको छोड़ दिया गया। सहारा में आपने खुद ने क्या तहकीकात की? 34 में से 30 आरोप लगाएंगे विपक्ष के ऊपर। आपने व्यापम को सीबीआई को सौंपा, डेढ़ वर्ष पहले सुप्रीम कोर्ट से डांट खाकर, लेकिन आज डेढ़ साल में सीबीआई ने क्या किया उसमें, कुछ हुआ? हिंदुस्तान का सबसे बड़ा मल्टीस्टेट स्कैम है, मृत्यु हैं उसमें पैसा है, क्या किया गया उसमें? GSPC  में क्या किया? Selective Prosecution, opportunistic Prosecution से माहौल अपनी गलतियाँ छुपाने के लिए बना सकते हैं, क्योंकि आप सरकार में हैं, लेकिन हकीकत नहीं बदली जा सकती है
 

 On the question of NIA investigation on receiving funds from across the border by Hurriyat, Dr. Singhvi said I want to Say two things – first and foremost - it is extremely serious, it is gross, brazen patent and deserves the strongest action in the shortest possible time and in the most effective manner. This undermines National Security directly and completely. But the second point is no less important and that is what we are seeing everyday-homilies, preachings, lectures, sermons being given by none less than High Government functionaries to which the entire country, in a bemused, amused manner, asks itself and the Nation asks itself that whom are you giving lectures to - you are the Government in Centre, you are the Government in J&K and yesterday I saw Minister of State giving a lecture on the subject. For the last 3 years both Central and State Governments individually and in coalition have done nothing and today you are lamenting.
 

 And last third point I want to add is that this is serious no doubt but there is never and I repeat very clearly and categorically that there has never been such a rapid, accelerated tragic decline in governance in 36 months as there has been in last 36 months in J&K from any trajectory, any paradigm, be it casualties, violence, lack of governance, lack of decision making, lack of co-ordination, security scenario different departments and Ministers pulling in directions, no consistency of policy etc. etc. In 36 months we have seen the most rapid decline.

After all, we were there for ten years in Kashmir. We had external infiltrations but never before have we seen this kind of tragic state of affairs which makes the heart of every Indian bleed.            

 

Sd/-

(S.V. Ramani)

Secretary

AICC

 
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