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Press Releases

Highlights of the press briefing of Dr. Abhishek Manu Singhvi, MP and Spokesperson 22-05-2017

https://www.youtube.com/watch?v=GgZyD5krpfA

Dr. Singhvi said a lynching movement of innocent people has begun in BJP- ruled States. Lawlessness aided and abetted by the State has become the new India of today. This is the real new normal – not just the new normal you are being taught and told about this is the new India and new normal of the BJP. That is intolerance galore, innocents targeted, State-sponsored violence. This is the new norm. I am going to show you pictures in a moment. No one seems to have forgotten so quickly hands holded, blood soaked body and picture of a man begging for life and I am not talking of Gujarat, I am talking of Jharkhand. They are circulating all over.

This BJP-NDA Government is a Whatsapp Government, a Whatsapp driven Government. It thrives on emotions and vulnerabilities of the people and the uses it deliberately and mischievously to target those who may have different views, different ideologies. It has become the 'Pehchan', the modus-operandi and identity of the BJP. What is worse, it amounts to almost State-sponsored activity because every time we find, and some of these pictures in Media which show that the Police act as mute spectators. Law enforcement agencies are mute silent spectators - turning a Nelsonean blind eye but actually encouraging as there is no punishment, there is no fear, in fact therefore, is an encouragement. In Jharkhand, in fact, Police were present – seven people were killed by mobs and figure may increase – I was astonished and shocked to find that even an 80 years old grandmother of the victims was not spared – badly beaten. What is this India we are living - this un-Indian idea of the 'Idea of India'? Is it the India of mob justice, instant nearest tree hanging, lynching justice in the world's largest democracy which we are proudly practicing because the philosophy of the ruling dispensation encourage it. Is it a methodology used as an excuse, it is a mindset which covers up the real object which is anti-human rights which is anti-dalit, communal, which is divisive and which is anti-humanity.

This is my sad duty to remind you that Una in Gujarat when people were stripped, paraded naked, who were they, they were human beings like you and me.

Similarly Dadri and Mohammad Akhlaq are not just a statistics – they are imprinted through media into our collective memory. Gruesome incident and Union Minister Mr. Mahesh Sharma termed this gruesome incident as an accident. Is this an accident when people are picked, singled out, plucked out for instant mob justice on mere rumour, on mere suspicion, on mere finger pointing, on mere suggestion, on mere innuendoes, insinuation. 23 former Bureaucrats - some of them very senior level - urged the CM of Rajasthan to arrest those who killed Pehlu Khan. How long could it take? What happened – insensitivity happened, stony silence, inactivity and cover up followed - how many examples - from Jammu to Rajasthan to Haryana. They all happened to be BJP-ruled States is one part of the theory - whether it is Haryana gang rape of 20 years old in Rohtak, whose face was smashed with brick, whether it was the cow vigilantes' brutal assault on a nomadic family in Jammu - so many examples. The point is that multiplication of examples really does not convey the agony and pain of this country. So, we ask you again is this the new India, is this the new normal of Modi Ji where Modi Ji practices either great 'Jumlas', high-sounding sermons or eloquent silence. But in fact, this practice is license to kill which would make James Bond gush. Is this the New India which Modi Ji wants to create, the so unindian India where ruthless mobs take law into their hands, where lynching is instant. Is this the intolerance - intolerance of majoritarianism and they are all encouraged, supported indirectly or directly promoted by the regressive and intolerant remarks of the BJP Leaders and senior bureaucrats and we are not talking of ordinary people, we are talking of Leaders like senior, MPs, MLAs, senior office-bearers.

Ultimately this is because the object is to either get or cling on to power by these divisive tactics, practiced through subterfuge. I have many more examples and particularly remind you of Dabolkar, Pansare and Kalburgi examples where for months and years, the PM has practiced a stony silence and I also remember Rohit Vemula's example and I also remember the comments of Genl. VK Singh referring a Dalit child as a dog.

The rise of atrocities against Dalits has increased by 38% under the BJP Government at the Centre. Please note the year and the figure – 39,408 in 2013 and 54,355 in 2015 – this is the data of the NCRB - the highest were Rajasthan and Madhya Pradesh in the top four States as far as crime against Dalits are concerned.

 डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि मैं इस दयनीय स्थिति को वापस विस्तार से दोहराना नहीं चाहता। लेकिन जिसको भी भारत की अस्मिता, लोकतंत्र और गणंतत्र की थोड़ी सी भी चाह है, वो इस प्रकार के चीज से अपना माथा शर्म से हमेशा के लिए झुका कर रखेगा।

इस देश में सरेआम, खुल्लमखुल्ला फांसी लगाने का अभियान चल पड़ा है। सबसे बड़ा गणतंत्र विश्व का और कानून व्यवस्था के नाम पर ना कोई भय है और ना ही अनुशासन। क्या ये भारत की अस्मिता और आत्मा है और क्या ये भारत का नया नोर्मल है? मोदी जी का नया नोर्मल, बीजेपी और एनडीए का नया नोर्मल। क्या ये वो नोर्मल है जिसमें दोषरहित व्यक्तियों को किसी भी संदेह, उंगली उठाकर या किसी भी आरोप के आधार पर बिना न्याय मिले, क्षणिक न्याय मिल जाता है और तुरंत न्याय मिल जाता है और ये न्याय पेड़ वाला न्याय होता है।

आज इस सरकार का विजिटिंग कार्ड, अस्तित्व और व्यक्तित्व और इस सरकार की आईडिंटिडी जो हो गई है वो है असहिष्णुता। दुखद प्रसंग ये है कि इसमें प्रादेशिक और केन्द्र स्तर पर समर्थन प्रकट किया जाता है, सभी सरकारी व्यक्तियों के द्वारा।

अभी हाल में जो हमने देखा 7 व्यक्तियों की मृत्यु हुई है, पुलिस वाले खड़े हुए हैं। 80 साल की बुजुर्ग महिला के साथ भी मारपीट की गई है। दलित हो, अल्पसंख्यक हो, मानवता का कोई भी द्योतक हो, उनको कोई मतलब नहीं। इसमें एक गहरी बात छुपी हुई है जिसको छुपाने के लिए ये सभी ढोंग किए जाते हैं, कभी गाय के नाम पर, कभी धर्म के नाम पर वो हैं तीन चीजें- मानव अधिकार से असहिष्णुता, मानव अधिकार के विरुद्ध एक भावना, दलित और पिछड़ी जातियों के विरुद्ध एक भावना और हर चीज को साम्प्रदायिक बनाने की भावना। इन तीन चीजों पर सीधे और परोक्ष रुप से कई यंत्र-तंत्र बनाए गए हैं जिससे इनको आगे बढ़ाया जाए, प्रवोक किया जाए, समर्थन किया जाए। आपको अच्छे ये याद है कि दलित व्यक्तियों के कपड़े उतार कर कैमरे के समक्ष पीटा गया। किस प्रकार से अखलाक और दादरी हुआ सिर्फ संदेह के आधार पर। 23 वरिष्ठ सरकारी अफसरों, सेवानिवृत और जिनका कोई सरोकार नहीं राजनीति से, बार-बार राजस्थान के मुख्यमंत्री के अनुरोध किया कि पहलू खान के विषय में कि आप तुरंत गिरफ्तार करें। महीनें, हफ्ते निकल जाते हैं लेकिन कोई जवाब तक नहीं आता।

जम्मू से लेकर हरियाणा तक, चाहे गैंगरेप हो, महिला का चेहरा पत्थर से कुचल दिया जाता है या जम्मू में nomadic परिवार था, उसकी बात हो। आपके कैमरे के सामने था, वो अपने जीवन की भीख मांग रहे थे और ये 2017 वाले भारत में हो रहा है, क्या ये नया भारत है, क्या ये नया नोर्मल है?

मोदी जी ने सदैव पिछले 3 वर्षों में या तो जुमले सुनाए हैं या महान व्यापक वक्तव्य दिए हैं या फिर बड़ी विशेष चुप्पी बड़े crucial और संवेदनशील मुद्दों पर। एक तरफ मोदी जी ये कहते हैं और दूसरी तरफ उनकी पार्टी के लोग, उनके समर्थक ऐसे लाईसेंस टू किल को कार्यांवित करते हैं जिससे जेम्स बांड को भी शर्म आ जाए। ये बहुमत की एक विचित्र परिभाषा है जो गणतंत्र और लोकतंत्र के विरोधी हैं। ये जो नई परिभाषा है, बहुमत की, ये असहिष्णुता को छुपाने के लिए है। इन सबको छुपाने के लिए कई सांसद, मंत्री महोदय, वरिष्ठ अधिकारी बीजेपी और योगी जी के अलग-अलग स्तर के लोगों की सभी टिप्पणीयों की एक सूची, हमारे पास है जो आपके समक्ष रखी है। ये क्रूर, साम्प्रदायिक हैं और सरकार ने उनके विरुद्ध कभी कुछ नहीं किया, सिवाए सर्मन देने के।

हम बात करते हैं ठोस तथ्यों की। 2013 से 2015 में लगभग 38 प्रतिशत वृद्धि हुई है दलितों के विरुद्ध क्रिमिनल एट्रोसिटी के विषय में। 39 हजार से 54 हजार है ये आंकडा।  आज दिन प्रतिदिन हम देख रहे हैं वो बहुत ही विकृत परिभाषा इस देश की है।

परेश रावल के अंरुधति राय पर ट्वीट पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री सिंघवी ने कहा कि आपका प्रश्न महत्वपूर्ण है और एक प्रकार से जो मैंने कहा है उसको प्रमाणित किया है। मेरी जो दुर्भाग्यपूर्ण, लंबी और दुखद सूची है आपने उसमें एक और उदाहरण जोड़ा है। ये मामला इस बात का नहीं है कि किसी ने क्या कहा किसी के बारे में। इस कमरे में कई ऐसे लोग हैं जिनमें मैं भी शामिल हूं जो अंरुघति राय की कई चीजों से बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं। लेकिन जो Voltaire की कहावत है कि गणतंत्र और लोकतंत्र की परिभाषा, कसौटी पर कि जब आपसे चाहे मैं बहुत बुरी तरह से भी असमहत हूं, तब भी आप खड़े होकर मेरी असहमती जाहिर करने के मानवाधिकार हक का समर्थन करें। ये चीज आज भारत से हटाई जा रही है, परोक्ष रुप से कम सीधे रुप से ज्यादा। इसके बहुत से उदाहरण हमने दिए एक आपने दिया। जब तक इस बात को समझा नहीं जाएगा वर्ष प्रतिवर्ष परिभाषा परिवर्तित होगी और भारत को अपना सर शर्म से झुकाना पड़ेगा।

एक अन्य प्रश्न पर कि पुलवामा में आज पाकिस्तान का राष्ट्रगान गाया गया है, क्या कहेंगे, श्री सिंघवी ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने हमेशा भर्त्सना की है इस प्रकार की राष्ट्र विरोधी चीजों की। जो पहले हुआ है उसकी भी हमने भर्त्सना की है, लेकिन ये मुद्दा वो नहीं है। जो मूल मुद्दा है मीडिया उसको कई कारणों से भूल जाते हैं। पिछले 3 वर्षों से क्या ऐसी वारदातों में वृद्धि दोगुना-चौगुना नहीं हुई है? आप आंकड़े देख लीजिए। सबसे ज्यादा राष्ट्रवाद के सबक मैं सिखाता हूं और मेरी ही सरकार में ये होता है, ये विडंबना नहीं है क्या, केन्द्र में भी मेरी सरकार और राज्यों में भी मेरी सरकार, दिन प्रतिदिन, हर क्षण यही सिखाया जाता है कि राष्ट्रवाद क्या होता है, राष्ट्रवाद की परिभाषा सिखाई जाती है। ताने कसे जाते हैं, अपमान किए जाते हैं और आपकी नाक के नीचे ऐसा हो रहा है। आप असमर्थ क्यों हैं? आप जुमले देने में समर्थ हैं, उपदेश देने में समर्थ हैं, सिर्फ वाक्यों को बदलने में समर्थ है या फिर जमीनी स्तर पर भी कुछ करने में भी समर्थ हैं?

हुर्रियत पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री सिंघवी ने कहा कि हुर्रियत के साथ बातचीत होनी चाहिए, नहीं होनी चाहिए उनको कब हाउस अरेस्ट पर रखना चाहिए, कब डिटेंशन में, कब उनके कारण पाकिस्तान से बातचीत तोड़नी चाहिए और कब नहीं। इन सबको एक नीति में पिरोना आवश्यक है। हमारा ये मानना है कि इनमें से कोई भी नीति सही हो सकती है। लेकिन इस सरकार का दुर्भाग्य ये है कि पिछले 3 वर्षों में अगर सोमवार है तो नीति उत्तर की है, मंगलवार है तो नीति दक्षिण की है। हफ्ते में 8 बार नीति बदलती है। ये सबसे दुर्भाग्य की बात है। कोई भी एक नीति बनाकर उस पर रहना, आपने देखा कि कैसे हुर्रियत के कारण कैंसिल हुई, अलाउ हुई, फिर हुर्रियत से ही जाकर मिलेंगे भारत से बाहर। फिर लंच हुआ पाकिस्तान के साथ। तो ये सब जो ज़िग-ज़ैग है, यू-टर्न है इससे गलत संदेश जाता है।

कश्मीर में सभी लोग केवल सरकार व सत्तारुढ़ दलों को छोड़कर चिंतित हैं। बहुत ज्यादा चिंतित है, विपक्ष के सभी हिस्से और वो हिस्से विपक्ष के जो आपस में सहमत नहीं हैं कई मुद्दों पर। ये राष्ट्र के लिए बहुत बड़ा महत्वपूर्ण बिंदु है पिछले 3 वर्षों में। कई स्तरों पर बात हुई है, आप विपक्ष की बात क्यों कर रहे हैं, खुद बीजेपी के कई सेक्शन, बीजेपी के पूर्व वित्त मंत्री इसमें हैं विपक्ष के साथ। ये सकारात्मक चीज है। इसमें राजनीतिक द्वेश की भावना से कुछ नहीं हो रहा है। लेकिन इसका क्या स्वरुप है, किस प्रकार से होगा उस पर नहीं जा सकते। निश्चित रुप से ये बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है और सरकार पिछले 3 वर्ष से इस पर अवहेलना कर रही है।

एक अन्य प्रश्न पर मणिपुर के मुख्यमंत्री के बेटे के मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है उस पर क्या कहेंगे, श्री सिंघवी ने कहा कि ये चौंकाने वाली बात नहीं, बहुत ही दर्दनाक बात है, अगर आप उस परिवार की तरफ से देखें जिसके विषय में ये हुआ है। आप मणिपुर की सड़क पर दिन दहाड़े छोटे से झगड़े पर गन निकाल कर शूट कर देते हैं। मर्डर का चार्ज नहीं लगाया जाता है, डायल्यूट किया जाता है, Man slaughter - culpable homicide not amounting to murder का चार्ज लगाते हैं और जनवरी 2017 में साढ़े 4 साल के ट्रायल के बाद सजा मिलती है। 2017 के बाद आज मई साढ़े 4 महीनों में आपको बेल मिल जाती है और उसका विरोध भी नहीं किया जाता। सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बात इसमें प्रोसिक्यूशन ऐजेंसी कौन है, सीबीआई। केन्द्र भी आपका, प्रदेश भी आपका, तो ये प्रश्न उठता है कि क्या माननीय मुख्यमंत्री जी ने इसलिए पद संभाला था, इसलिए दल-बदल किया था, इसलिए अस्थिरता पैदा की थी। अस्थिरता द्वारा आपने सरकार बनाई थी, इसलिए की थी ताकि अपने लड़के को रिहा करा सकें? जितने भी आपको मोदी जी के उपदेश मिलते हैं, फरमान और जुमले मिलते हैं वो स्वच्छ और सुशासन के शब्द हैं या ये नई स्वच्छ और सुशासन की परिभाषा है जहाँ पर जोड़-तोड़ करके ये सरकार बनाई है और शायद इस सरकार के बनाने का एक उद्देश्य आपके सामने परिभाषित हो रहा है।

3 तलाक पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री सिंघवी ने कहा कि इसमें दो पहलू हैं। एक तरफ तो अटार्नी जनरल ने कहा है कि अगर स्ट्राईक डाउन करते हैं तो हम नया कानून लाएंगे। ये प्रश्न उत्तर उस सुनवाई के दौरान भी हुआ था कि अगर आपने तलाक की पूरी प्रक्रिया को ही हटा दिया, असंवैधानिक करार दिया तो जहाँ पर नोर्मल तलाक है A और B के बीच में तो वो तलाक कैसे होगा, तो उसके उत्तर में कहा था कि हम कानून लाएंगे। लेकिन एक और प्रश्न है जो आप भूल गए- वैंकेया नायडू जी ने कहा कि अगर नहीं किया तो हम कर देंगे स्ट्राईक डाउन एक कानून लाकर। तो प्रश्न ये हुआ कि पिछले 36 महीनों से क्या कर रहे थे आप? उसी से हमारा प्रश्न उठता है कि आपने इतना मूल्यवान समय सुप्रीम कोर्ट का नष्ट क्यों किया? कानून ही ले आते, पूरी सुनवाई क्यों की? आपके अटार्नी जनरल एक आवाज में बोल रहे हैं, केन्द्रीय मंत्री, वरिष्ठ मंत्री दूसरी आवाज में बोल रहे हैं। लेकिन हम समझते हैं कि सभी आवाजें एक चीज के लिए हैं, इसे साम्प्रदायिक की भावना भड़काने के लिए कह लीजिए या विभाजन के लिए कह लीजिए, उसको प्रेरित करने के लिए है, वोट की राजनीति के लिए है।

On the question of reaction of the Congress Party on Mr. Paresh Rawal, BJP MP's comments on Ms. Arundhati Roy, Dr. Singhvi said it is an important question, you have just validated it. The point of your question is larger and that is not that - I or you have to agree with Arundhati Roy. There are many people in this room who disagree with her including me.

It is precisely the definition of democracy that even when you violently disagree with someone, you will defend to death their right to disagree with you. She is a citizen of this country and for an MP, for the smallest ordinary citizen to express this view shows the mindset which has been and now that you have raised the question, consistently since 2014 they have an anti-NGOs mindset. They may disagree with you, what is the problem.

On the question on Manipur CM's son, Dr. Singhvi said let me tell you that a man is convicted in 2017 - blunder No. 1 he is charged not for murder but for man slaughter. No. 2 – he is given 5 years and No. 3 apparently he is let off on bail and No. 4 from what we hear, the bail was not opposed. Now the question I am asking you - did this person become CM, did he break parties and defect only to ensure his son's freedom?  What is the object of the political shenanigans we saw in Manipur or is it contemplated that you pick up someone and shoot in road rage. And you are prosecuted and then in 2017 after four years convicted only of man slaughter and that too only 5 years. I think it is very sad and what pictures we have seen of the old mother and the family, is extremely tragic. The most important is that all the homilies that Mr. Modi gives, the NDA gives or the BJP gives, Goa and Manipur, you remember the actual results and this is the true face of the BJP who gives you homilies and sermons on clean governance.

 On the situation in Kashmir and especially the incident in Pulwama, Dr. Singhvi said let me make it clear that in the sad trajectory since 1987 in Jammu & Kashmir and we now are roughly 30 years down the line, things have never spiraled out of control to the extent they have now under this Government for 2-1/2 years. Secondly, it is tragic because there is a tremendous theoretical synergy in between the same colour of Government at the Centre and the same coluor of Government in State which rarely happens in J&K.  Even in spite of that we are in shambles. Civilian casualties, police casualties, and terror incidents numbers you see. Fourthly given this fact and every segment of the Opposition is very-very sensitively and gravely concerned about this rise, perhaps everyone except the Government of the State and the Centre. Therefore, it is not surprising that initiatives are being undertaken for this purpose. Initiatives have been taken by even former BJP Ministers – whether inside or outside the 'Margdarshak Mandal'.

And therefore, in case the Government abdicates its constitutional duties for a sensitive State as J&K, it is but natural for Opposition that otherwise may differ across the board on many issues to get together and try their best although they were powerless beyond a point.

Regarding the violence in this connection, Dr. Singhvi further said we have as Congress Party condemned all symbolic, direct, indirect and other activities which are intended to promote separatism. We have condemned it and I repeat its condemnation but it raises a far more important question and that is that we have had the highest, largest number of homilies and sermons on Nationalism from this Government both at the Centre and at the State for the last 36 months. Never before have we been taught about so much about Nationalism - true or fake - and yes under the nose of this Government for the last 36 months, never before has J&K spiraled out of control with such incidents happening. So, follow up your question with the second question – why how is it happening, why is this Government failed at the State as well as at Centre level and yet shamelessly giving us sermons on Nationalism.
 

Sd/-

(S.V. Ramani)

Secretary,

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