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Highlights of the press briefing of Shri Ghulam Nabi Azad, Shri Mallikarjun Kharge, Shri Anand Sharma, and Shri Randeep Singh Surjewala

Shri Ghulam Nabi Azad, LoP (RS), Sr. Spokesperson AICC and former Union Minister, Shri Mallikarjun Kharge, MP, LoP (LS) and former Union Minister, Shri Anand Sharma, MP, Sr. Spokesperson and former Union Minister and Shri Randeep Singh Surjewala addressed the media.

 

श्री गुलाम नबी आजाद ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के कई हिस्सों में बाढ़ आई है। असम, गुजरात, राजस्थान विशेष रूप से प्रभावित हैं, बाढ़ की लपेट में आए हैं। कांग्रेस कमेटी के वाइस प्रसिडेंट श्री राहुल गाँधी जी 3-4 दिन के दौरे पर थे इन राज्यों के, ताकि लोगों की समस्याएं देखें। उसमें अपनी पार्टी के वर्कर्स को जोड़ें, पार्टी के लीडर को जोडें, लोगों की सहायता हो जाए ज्यादा से ज्यादा।

उन्होंने पहले असम का ,बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र थे, उनका दौरा किया और उसके बाद राजस्थान गए और राजस्थान के बाद वो गुजरात। विशेष रूप से उस जिले में गए, बनासकांठा, जो सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है और एक जिले में जहाँ सबसे ज्यादा बाढ़ की वजह से लोग मरे है, नुकसान हुआ, वहाँ गए। जहाँ मुख्यमंत्री खुद 5 दिन के बाद गए थे। 5 दिन तक मुख्यमंत्री नहीं गए, जब कांग्रेस पार्टी ने शोर मचाया तब मुख्यमंत्री वहाँ गए थे।

राहुल जी उसी जिले में गए थे और उसी जिले में धनेरा तहसील है, वहाँ गए। धनेरा तहसील में सबसे पहले उसी घर में गए जहाँ सबसे ज्यादा उस परिवार को नुकसान हुआ था।फिर दूसरे परिवार के घर गए और फिर तीसरे। उसके बाद एसीएम की जो मंडी है, जहाँ अनाज का नुकसान हुआ था बहुत मात्रा में, वहाँ मंडी के लोग, किसान और दूसरे लोग हजारों की तादाद में जमा थे, उनसे भी मिले। उसके बाद धनेरा लाल चौंक में 3-4 हजार लोग खड़े थे, जो माननीय राहुल गाँधी जी का स्वागत भी करना चाहते थे और चाहते थे कि वो हमें संबोधित करें। पार्टी के लोग भी थे जिनकी ड्यूटी लगनी थी, अलग-अलग जगह, जो बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र हैं, उनको समझाना था।

लेकिन दुर्भाग्य से राज्य सरकार की तरफ से उनकी सहायता होनी चाहिए थी, लोगों का सहयोग करना चाहिए था, विपक्ष को कहना चाहिए था कि आप हमें सहयोग करें। लेकिन दुर्भाग्य से उन्होंने उस मीटिंग को डिस्टर्ब करने का प्रयास किया, हर तरीके से। लेकिन माननीय राहुल गाँधी जी डिस्टर्ब नहीं हुए। उन्होंने जो जिम्मेदारी है, अपने वर्कस को देनी थी, वो दी। लेकिन मीटिंग के बाद जैसे ही वो निकल रहे थे, मोड़ से 50 मीटर, उस लाल चौक से, तो बीजेपी और आर एस एस की एक सोची-समझी साजिश के तहत, क्योंकि मोड पर गाड़ी की स्पीड कम हो जाती है, तो ये प्री-प्लान साजिश थी।

माननीय राहुल गाँधी जी गाड़ी में आगे फ्रंट सीट पर थे, उनके पी.एस.ओ. पीछे थे, उनके पी.ए पीछे थे। उनकी गाड़ी का कांच नीचे उतरा हुआ था, लेकिन पिछला कांच ,जहाँ पी.एस.ओ थे, वो बंद था। एक बहुत बड़ा बोल्डर सीमेंट कन्क्रीट का, तकरीबन डेढ़ केजी, फेंका। ये कोई वहाँ मिलने वाला नहीं था, ये पत्थर लाए गए थे। क्योंकि माननीय राहुल गाँधी जी की गाड़ी का शीशा खुला था, उन पर फेंका। अगर ये पत्थर उनके सिर पर आ जाता तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कितना बड़ा हादसा हो सकता था। लेकिन उनकी किस्मत अच्छी थी कि ये पत्थर पिछले काँच पर लगा। काँच टूट कर ये पत्थर गाड़ी के अंदर पहुंच गया।

तो इस तरह का मर्डर अटैक बीजेपी और आर.एस.एस ने कांग्रेस के उपाध्यक्ष माननीय राहुल गाँधी जी पर किया। इसकी हम मजबूती के साथ निंदा करते हैं और इससे ये भी सामने आया कि बीजेपी का मूड, बीजेपी पहले से ही मशहूर है इन कामों के लिए। आज से नहीं 1947 से, महात्मा गाँधी जी से लेकर आज तक हम देखते आए हैं। राहुल गाँधी जी एस.पी.जी प्रोटेक्शन में हैं, जिसमें प्रधानमंत्री, एक्स प्रधानमंत्री और श्रीमती गाँधी जी की फैमिली है। एक्ट ऑफ पार्लियामेंट के एक्ट से ये कानून बना है और ये सबसे नंबर वन कैटेगरी है, प्रोटेक्शन की, जिसकी पूरी जिम्मेदारी और जवाबदेही केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकार की होती है। राज्य सरकार पूरी तरह से असफल हुई है। पूरी तरह से नाकाम हुई है, एस.पी.जी की सुरक्षा देने में। इसलिए जहाँ हम इस बात की मजबूती के साथ निंदा करते हैं और कहते हैं कि केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकार असफल हुई है राहुल जी को सुरक्षा देने में। आने वाले समय में चुनाव होने वाले हैं, राहुल जी को ट्रैवल करना है, तो उनकी जिम्मेदारी, सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह से केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकार को लेनी होगी। अगर दुबारा ऐसी घटना होगी तो हम नहीं समझते कि देशवासी इसको बर्दाश्त करेंगे।

Shri Anand Sharma said as Shri Ghulam Nabi Azad Ji has said what happened yesterday in Gujarat is unacceptable in Indian democracy or in any civilized society. Not only that it deserves strongest condemnation, it is also an exposure of the intent, ideology and character of the BJP-RSS combined which believes in violence, intimidation and physical assaults on political opponents or leaders.  It is integral to their thinking and their political philosophy and their actions.

The State Government had a duty; the State Government cannot just wash its hands by saying that they offered a bullet-proof car. Car is meaningless. There had to be a complete arrangement. How could people in a pre-planned manner be present with stone and concrete missiles and let me make it very clear that this concrete missile is a weapon, it is not just a stone. If you look at it, one can fling it from a distance with force, it can even kill a human being. And it was not one but many which were thrown. There was the Police. What was the 'Bandobust'? That is what we want to ask?

BJP is using every possible mean to capture power everywhere and now we have elections coming in Gujarat. It is the duty of the political leaders and  Shri Rahul Gandhi has a right to go and stand in solidarity with the people who have suffered. He and the other Congress leaders cannot be prevented. What happened yesterday? What is happening for the last few months in various parts of the country an atmosphere of fear, intimidation and the cult of violence? We can say and we have apprehensions that there is galloping fascism in India and we want to make absolutely clear that Indian National Congress has a history of 132 years. We have seen challenges; we have seen ups and downs. Neither Shri Rahul Gandhi nor the Congress leadership can ever be intimidated or suppressed. We shall stand and speak and fight the BJP-RSS agenda and we will defend Indian democracy as it is.

एक प्रश्न पर कि जिस तरह से कहा जा रहा है कि राहुल गाँधी जी को बुलेट प्रूफ गाड़ी देने का ऑफर किया गया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया, श्री आजाद ने कहा कि बुलेट प्रूफ गाड़ी ठीक है लेकिन कभी-कभी नॉन प्रूफ गाड़ी भी इस्तेमाल करनी पड़ती है। आज जब ऐसे कार्यक्रमों में जाते हैं, हजारों की तादाद में लोग मिलते हैं, तो आप बुलेट प्रूफ गाड़ी में काँच नहीं खोलते हैं, कोई भी लीडर हो, माननीय राहुल गाँधी जी हों या कोई भी हो। हम पब्लिक के लोग होते हैं, काँच बंद करके लोग बाहर से चिल्लाते हैं, ये नहीं समझते हैं लोग कि प्रोटेक्टिव है या बुलेट प्रूफ है। आम जनता समझती है कि कितना अहंकार है, कि हम बाहर से शीशा खटखटाते हैं और अंदर बैठा लीडर शीशा भी नहीं खोलता। तो ऐसी जगहों  में हमेशा हर लीडर को, कोई भी लीडर हो, जो पब्लिक सैंसिटिव लीडर हो।जो पब्लिक सैंसिटिव नहीं है, जो ऊपर हैलिकॉप्टर से जा रहा है, उनके लिए बराबर ही है, लकिन जो पब्लिक का आदमी हो, पब्लिक सैंसेटिव्स की रिस्पेक्ट करता है, उसको शीशा खोलना पड़ता है और बुलेट प्रूफ में शीशा नहीं खुलता है।

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी ने इसी संदर्भ में कहा कि जो आजाद साहब ने कहा है उसका मैं पूरा समर्थन करता हूँ। ये घटना की निंदा करता हूं और ये जो हो रहा है ,ये देश के लोकतंत्र के हित में ठीक नहीं है और कहीं भी लोग मुसीबत में हैं, उनके पास जाना अगर ये गुनाह है और अगर कोई वहाँ जाता है, उनको इस तरह से ट्रीटमेंट देना, राज्य सरकार की भी ये जिम्मेदारी होती है और केन्द्र सरकार की भी जिम्मेदारी होती है, ये दोनों सरकार सुरक्षा देने में विफल रहे हैं। हम उसकी घोर निंदा करते हैं।

एक अन्य प्रश्न पर कि आप क्या जांच कर रहे हैं, क्या राहुल गाँधी जी पर ये हमला सोच-समझ कर या उनकी जान लेने के लिए किया गया था, श्री सुरजेवाला ने कहा कि एक बात सही है कि ये हमला जानलेवा था। अगर वो सारे पत्थर जो सीमेंट कॉन्क्रीट के थे, अगर वो श्री राहुल गाँधी जी के सिर या शरीर के ऐसे हिस्से पर लगते तो किसी भी प्रकार की चोट पहुंच सकती थी। बड़े पत्थर, बोल्डर सीमेंट कॉन्क्रीट के मोटर जब आप फेंके, तो आप निशाना बना कर फेंकते हैं। वहाँ पुलिस भी खड़ी़ थी और पुलिस के साथ-साथ भाजपा के कार्यकर्ता भी खड़े थे और हमने बकायदा उन भाजपा के कार्यकर्ताओं को नामित किया है जो FIR की अर्जी कल दी है। 4 लोगों को हमने आइडेंटिफाई करके उनका नाम बताया। जिनके नाम थे – जयेश दर्जी, मोड़ सिंह राव, मुकेश प्राग भाई ठक्कर, भगवान दास भाई पटेल और दूसरे कार्यकर्ता। परंतु कठपुतली पुलिस भाजपा सरकार के इशारे पर कोई मुकदमा भी दर्ज नहीं कर रही थी। आज भी ,इस समय भी ,ये वार्तालाप जारी है और ये पत्रकार वार्ता जारी है तो हमारे लोग धनेरा में पुलिस स्टेशन के बाहर पूरी रात से धरने पर बैठे हैं। प्रश्न ये है कि क्या गोडसेवाद मोदीवाद में बदल जाएगा? कहीं न कहीं दोनों हैं एक जैसे ही - हिंसा, डर, शारीरिक तौर से चोट पहुंचाना और जब नीतियाँ और रास्ता विफल होता दिखे तो फिर झुंझलाकर हिंसा का रास्ता इख्तियार कर लेना। शारीरिक हिंसा गोडसे के अनुयायियों का रास्ता 1948 जनवरी से रहा है और 2017 में भी वो लागू है। पर वो एक बात जान लें कि न गोडसेवाद 1948 जनवरी में कामयाब हो पाया और न मोदीवाद की हिंसा 2017 में कामयाब हो पाएगी। न श्री राहुल गाँधी और न कांग्रेस पार्टी, न हम दबेंगे, ना झुकेंगे और न डरेंगे बल्कि एक निर्णायक तरीके से जहाँ-जहाँ समस्या होगी, जैसे गुजरात में अकेले बनासकांठा में 61 से अधिक लोगों की जानें गई। 218 से अधिक लोग गुजरात में बाढ़ में मारे गए। अगर उनकी बात कांग्रेस नहीं उठाएगी, जब सरकार मूकदर्शक बनी है तो कौन उठाएगा?हमारी ये लड़ाई जारी है।

एक अन्य प्रश्न पर कि आप लोगों का आरोप है कि दहशत फैलाने के लिए इस तरह का हमला किया गया है, कर्नाटक के रिजो़र्ट में जो छापेमारी की है, केन्द्र सरकार ने कहा है कि इस तरह से सी.आर.पी.एफ का इस्तेमाल पहले भी किया है, श्री सुरजेवाला ने कहा कि विफलता सामने देख कर, राजनीतिक विफलता गुजरात में और राज्य सभा के चुनाव में होती हार को देखकर एक डरपोक भाजपा, कायराना हमलों पर उतर आई है। लेकिन डरपोक भाजपा के कायराना हमलों से न गुजरात की जनता डरेगी और न कांग्रेस पार्टी।

एक अन्य प्रश्न पर कि ऐसे में आप लोगों को भी अपनी सुरक्षा का ध्यान ज्यादा रखना चाहिए, क्या आप चाहेंगे कि आगे से नेता बुलेट प्रूफ गाड़ी में जाएं, श्री सुरजेवाला ने कहा कि राहुल गाँधी जी और कांग्रेस का नेतृत्व जमीन से जुड़ा है। हमारे लिए जनता की समस्या सबसे पहली प्राथमिकता है। देश की जनता और अखण्डता के लिए इससे पहले भी कांग्रेस के 2-2 प्रधानमंत्रियों ने अपनी कुर्बानी दी - इंदिरा जी और राजीव जी ने। राहुल गाँधी जी सुरक्षा का ख्याल रखते हैं लेकिन उनके लिए जनता की पीड़ा सुरक्षा से भी बढ़कर है। केवल एक गाड़ी लगा देने से सुरक्षा पूर्ण नही हो जाती। एस.पी.जी प्रोटेक्टी के लिए एक विशेष प्रोटोकॉल है और उस प्रोटोकॉल को एक षडयंत्र के तहत तोड़ा गया ताकि भाजपा के कार्यकर्ता हमला कर सकें, इसका जवाब भाजपा को देना पड़ेगा। 

On the question whether political conspiracy is behind this attack,  Shri Surjewala said this has to be examined. There is abject failure on the part of Shri Vijay Rupani and his administration and the tragic part is that a Chief Minister who failed to go to Banaskantha for 5 days when people were dying, instead of taking action against BJP's 'gundas', resorted to attacking Congress Vice President and Congress party on twitter. Is it not a tacit approval for this heinous attack on Congress Vice President Shri Rahul Gandhi? How can a SPG protectee be attacked under the watch of Gujarat administration and Government and say that we offered police vehicles and officials? Is SPG protection only providing a bullet proof vehicle and nothing else and now there are videos on social media where BJP people are being let off. The four people have been named by Congress party in FIR application that was submitted yesterday. Why no FIR is being lodged? Why Chief Minister is shirking from his constitutional responsibility. All these issues need to be examined in the interest of democracy.

 

 

Sd/-

(S.V. Ramani)

Secretary

Communication Deptt.

AICC  

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