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Highlights of the press briefing of Shri Kapil Sibal, MP

 

श्री कपिल सिब्बल ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि  आज बहुत अहम मुद्दा, ऐतिहासिक मुद्दा मैं आपके सामने पेश करूंगा। मैं नहीं समझता कि हिंदुस्तान के इतिहास में, शायद विश्व के इतिहास में ,जो यहाँ हो रहा है शायद ये कहीं हुआ हो।

 

आपको याद है जब प्रधानमंत्री जी ने नोटबंदी का फैसला लिया तो उन्होंने कहा कि 4 वजहों से मैंने फैसला लिया - एक तो मैं करप्शन खत्म करना चाहता हूं, एक मैं काला धन खत्म करना चाहता हूं, साथ-साथ में मैं फेक नोट खत्म करना चाहता हूं और आतंकवाद खत्म करना चाहता हूं। तो न आतंकवाद खत्म हुआ, न फेक नोट खत्म हुए, न काला धन खत्म हुआ और जहाँ तक करप्शन का सवाल है ट्राँसपेरेंसी इंटरनेशनल ने अभी मई मे रिपोर्ट निकाली, एशिया पेसेफिक रीजन में कि हिंदुस्तान सबसे करप्ट देश है। तो ये 4 वजह थीं, लेकिन इसके पीछे मकसद क्या था? कई महीनों से मैं सोच रहा था कि इसके पीछे मकसद क्या था, आज वो मकसद हमारे सामने आ गया है।

 

आज हम आपको दिखाएंगे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की वेबसाईट पर जाओगे कि पैसा बोलता.आरबीआई, वहाँ आपको दिखेगा कि 2 किस्म की करंसी नोट नोटबंदी द्वारा जनता को दिए गए। एक 500 रुपए का नोट, जिसकी चौड़ाई 66 मिलीमीटर है और लंबाई 150 मिलीमीटर। एक 2000 रुपए का नोट, जिसकी चौड़ाई 66 मिलीमीटर है और उसकी लंबाई 166 मिलीमीटर है। ये आर.बी.आई की वेबसाईट पर है। आर.बी.आई की वेबसाईट पर जो नोट के फीचर्स हैं, डिजाइन हैं वो भी आर.बी.आई की वेबसाईट पर दिखेगा, मैं आपको दिखा दूंगा।

 

अब ताज्जुब की बात ये है कि इस दौरान हमें ऐसे नोट मिले जिसकी चौड़ाई ही अलग थी, लंबाई ही अलग थी। अगर 150 मिलीमीटर की लंबाई 500 रुपए के नोट की, तो जो हमारे हाथ में है नोट वो 153 मिलीमीटर का है, कोई 151 मिलीमीटर का है, उसके जो फीचर हैं नोट में वो भी अलग-अलग हैं, डिजाइन भी अलग-अलग है।

 

तो सवाल ये उठता है कि ये क्यों, किसलिए? क्योंकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की प्रिंटिग प्रेस तो 4 ही हैं, दो वो खुद चलाती है, एक देवास में चलाती है ,जहाँ से नोट प्रिंट होते हैं, एक महाराष्ट्र, नासिक में है और बाकी 2 प्रिंटिग प्रेस हैं- एक कलकत्ता में है और एक मैसूर में है। ये तो एक सारा डिजिटल मामला है। अगर नोट छपता भी है तो एक डाई बनती है, फीचर्स  बनते हैं, डिजिटाइल होता है, कम्प्यूटराइज होता है और सारे कम्प्यूटर के द्वारा नोट छपते हैं। तो ये कैसे हो सकता है कि अलग-अलग तरह के नोट छपे ? 500 रुपए के नोट भी अलग हैं, 2000 रुपए के नोट भी अलग हैं। तो ये कैसे हुआ, किसलिए हुआ, ये सवाल उठते हैं? किसी को फायदा पहुंचाने के लिए हुआ? कहाँ छपे ये नोट? हिंदुस्तान में छपे या बाहर छपे? डिजाइन में अंतर क्यों था? किस प्रिंटिग प्रेस में छपे?  और अगर छपे तो आर.बी.आई को मालूम था, क्योंकि ये नोट जेनुइन हैं।

 

जब हमें ये नोट मिले, तो मैंने मशीन खरीदी ताकि मैं जनता के सामने कोई ऐसी बात न करूं जिसमें कोई तथ्य न हों। मशीन खरीदी, मशीन में सारे नोट चैक किए, सब जेनुइन, मुझे लगा कि शायद मेरी मशीन खराब है। तो मैं बैंक चला गया। वहाँ मैंने कुछ नोट चैक किए, वो सब सही। तो 2 किस्म के नोट रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया छापे, दोनों सही, दोनों के साईज अलग, दोनों के फीचर्स अलग, डिजाइन अलग, ये कैसे हो सकता है?

 

आप किसी भी अंतर्राष्ट्रीय करंसी, खास तौर पर डेमोक्रेटिक वर्ल्ड की देखेंगे तो उनमें कोई अंतर नहीं दिखेगा। हमारी करंसी 100 रुपए के नोट में अंतर नहीं दिखेगा। तो सवाल सबसे बड़ा उठता है, ये अंतर क्यों? हमें शंका है, हम कुछ कह नहीं सकते, क्योंकि ये तो जांच के बाद पता चलेगा, जब वित्त मंत्री जी और प्रधानमंत्री जी सफाई देंगे, क्योंकि उनके बिना बात आगे नहीं बढेगी न।

 

आपको याद है कि नोटबंदी के बाद सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें दिखती थीं और उनमें ऐसा लगता था कि भाजपा के कार्यकर्ताओं के पास कई नोट पहुंच गए हैं, जनता लाइन में खड़ी थी और इनके घर में नोट थे। हम नहीं जानते कि ये कैसे हुआ, ये तो यही बताएंगे, लेकिन इनके यहाँ नोट कैसे पहुंचे और पहले कैसे पहुंच गए?क्योंकि जनता तो नोट खून पसीने से कमाती है, मशीनों से तो जनता नोट नहीं कमाती है। तो ये कैसे हुआ? 2000 रुपए के नोट कैसे इन लोगों के पास पहुंचे? अगर आप चुनावों में देखें - उत्तर प्रदेश के चुनावों में देखें, दूसरे चुनावों में देखें तो इनके पास इतनी तादाद में नोट थे, ऐसा लगता ही नहीं था कि इस देश में नोटबंदी जैसी कोई चीज है। जिस तरह से भाषण हो रहे थे, खर्चा हो रहा था, मीटिंग हो रही थी, जिस तरह से लोगों की संख्या थी, ऐसा लगता ही नहीं था कि इस देश में नोटबंदी का फैसला भी हुआ है, सब भाजपा के लिए, कैसे और क्यों?

 

आप जब देखोगे, तभी आपको पता चलेगा, जो मैं कह रहा हूं। हर नोट के नीचे फीचर्स अलग – अलग हैं, हम स्लाइड में आपको दिखाएंगे। तो सवाल ये उठता है कि सरकार बताए कि कौन-कौन सी प्रिंटिग प्रेस में कौन-कौन से नोट छपे?अभी तो यही नियम है, जो हमें बता रहे हैं कि जो पुराने नोट हैं वो कितने बदले, कितने नहीं बदले, ये तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भी हमें आंकड़े नहीं दे रही है। तो कौन सी प्रिंटिग प्रेस में छपे, अगर छपे क्या सारी प्रेस हिंदुस्तान में ही थी या बाहर भी थी। अगर बाहर छपे तो कैसे छपे, किसने छपवाए? अगर हिंदुस्तान में छपे तो कौन सी प्रिंटिग प्रेस में छपे और इतना अंतर कैसे आ गया? अगर अंतर है तो ये तो इनको जानकारी होगी क्योंकि कई अंतर हैं।

 

मैं तो आपको कहूंगा, इस देश के नागरिकों को कहूंगा कि अपने जेब में देखिए और नोट निकालिए, आपकी जेब के नोट में भी अंतर दिखेगा। मैं देश की जनता से आग्रह करुंगा और आपसे भी आग्रह करुंगा। आप ध्यान से देखिए, उनका साइज और फीचर्स देखिए। हमारी एक वेबसाइट होगी, उस पर आप अपलोड कीजिए, तो ये खुलासा होना चाहिए। देश के सामने ये सच्चाई आनी चाहिए। तो अगर आर.बी.आई को मालूम था तो उन्होंने अपनी वेबसाइट पर क्यों नहीं बताया कि अलग चिन्ह के नोट हैं, अलग साइज, अलग फीचर्स के नोट हैं? ये तो बताना चाहिए। अगर ऐसा हुआ है तो इसका मतलब है कि एक फेक नोट भी फीचर्स के साथ चल जाएगा क्योंकि जेनुइन नोट के अलग फीचर हैं तो फेक नोट के भी फीचर्स अलग हो सकते हैं। तो सच क्या है, ये बहुत जरुरी है और इसका स्पष्टीकरण प्रधानमंत्री जी दे सकते हैं। वित्त मंत्री की जिम्मेदारी है कि एक ही किस्म के नोट जनता को मिले ताकि देश की जनता को ये संदेह न हो। क्योंकि आम आदमी कन्फ्यूज हो गया कि ये नोट सही है या नहीं तो आर.बी.आई कह सकता है कि आपको सही नहीं लगा तो आप वापस कर दीजिए, ताकि जनता फिर कतारों में खड़ी हो जाए, नोट वापस देने के लिए।

 

तो ये कुछ बातें मैं आपके सामने रखना चाहता था। मैं आपको प्रेजेंटेशन देता हूं कि ये कैसे हुआ। ये गंभीर मामला है, छोटा-मोटा मामला नहीं है।


Shri Sibal said this country's financial structure cannot be put to question. This is a Sovereign Nation. No country can afford its financial structure to be put in question because it has global ramification and no country can afford that. So, I think the quicker this Government and the Prime Minister actually give an explanation to the people of this country as to how this has happened, the better it would be for the citizens of this country.

 

He gave a presentation on the issue and explained to the Media through the video the difference in the features worth noting in the real and the fake ones.

 

Latent image of denominational numeral shaded distance from the white border is greater and the block is located just above the shading below Mahatma Gandhi and distance from the white border at the bottom is less and the block merges in to the shading below Mahatma Gandhi.


प्रधानमंत्री जी देश की जनता को निम्नलिखित सवालों के जवाब दें-

 

RBI ने 500 व 2000 के जो नोट छापे हैं उनके डिजाइन, साइज और फीचर्स में अंतर क्यों है?

 

एक ही सीरीज़ के कन्सेक्युटिव नोट्स में अंतर क्यों है?

 

RBI की वेबसाइट पर दिए गए नोट्स के साइज और डिजाइन मार्केट में चल रहे नोट्स के साइज और डिजाइन में अंतर क्यों है?

 

क्या अलग-अलग साइज, डिजाइन और फीचर्स के सारे नोट बिना RBI की अनुमति से छापे गए थे?

 

अगर RBI की अनुमति से छापे थे तो देश की जनता से ये तथ्य छुपाए क्यों गए?

 

क्या ये नोट देश के अंदर छापे थे या देश के बाहर और अगर देश के बाहर छापे थे तो क्यों छापे थे और अगर देश के अंदर छापे थे तो कहाँ और कितने छापे थे?

 

इस तरह के अलग – अलग साइज, डिजाइन और फीचर्स के नोट हमारे बैंक्स क्यों और कैसे चला रहे थे?

 

हम सवाल पूछते हैं कि ये कैसे हो सकता है, बताएं कि बड़ा नोट कहाँ छपा था? ये है उसका साईज जो RBI की बेवसाईट का है। कहाँ छपा, किसने छापा, डाई किसने दी, प्रेस कहाँ थी, कितनी तादाद में छपा और बिना केन्द्र सरकार की अनुमति के हो ही नहीं सकता, क्योंकि RBIके नियम कहते हैं कि डिजाइन और फीचर्स सब सरकार की अनुमति से होता है।

 

और नोट आ गए, 500 रुपए के नोट का साइज अलग है। बॉर्डर साईज पतला है, दूसरा छोटा है। एक और 500 रुपए का नोट है, इसमें थोड़ा और अंतर है। मतलब कि साईज ही अलग हैं कई नोट के।

 

अब सवाल उठेंगे कि ये कैसे हुआ, क्यों हुआ, किसकी अनुमति से हुआ, कौन जिम्मेदारी है, किसने हाँ की, RBI का किसने साथ दिया? जब तक प्रधानमंत्री जी स्पष्टीकरण नहीं देंगे, देश की जनता के मन में ये सवाल रहेंगे और ये देश के लिए ठीक नहीं है। 

 

एक प्रश्न पर कि जिस तरह से ये मामला सामने आया है, इसके RBI और सरकार की क्रेडिबिलिटी पर सवाल उठते हैं और नोटबंदी के बाद पैरेलल फेक करंसी चली है, श्री सिब्बल ने कहा कि ये जो मैंने प्रेजेंटेशन दी है, ये बहुत संजीदा सवाल उठाती है। इसके पीछे मकसद क्या था, ये मैं नहीं बता सकता। हम सोच सकते हैं, बात नहीं कर सकते। आपके मन में भी वही सवाल है, मेरे मन में भी सवाल है। सवाल सबके ऊपर उठता है। RBI अकेले ऐसा क्यों करेगा, लेकिन स्पष्टीकरण होना चाहिए। आप अपनी जेब से नोट निकालिए, अंतर आपको खुद दिखेंगे।

 

एक अन्य प्रश्न पर कि जनता अगर नोट देखती है तो कैसे पता चलेगा, श्री सिब्बल ने कहा कि वो अंतर सबको दिख जाएगा। साइज में भी अंतर है।  

 

एक अन्य प्रश्न पर कि 100 रुपए के नोट से 500 और 2000 का नोट छोटा हो सकता है, श्री सिब्बल ने कहा कि ये मैं नहीं जानता। ये RBI का निर्णय है लेकिन 100 रुपए के नोट में आपको कोई अंतर नहीं दिखेगा।

 

एक अन्य प्रश्न पर कि RBI की इसके पीछे क्या मंशा रही होगी, श्री सिब्बल ने कहा कि इसके बारे में मैं नहीं जानता, इस पर टिप्पणी मैं नहीं कर सकता। क्योंकि मेरे मन भी सवाल उठ रहे हैं, उनका जवाब बहुत जरुरी है और अगर जवाब नहीं मिलेगा तो बहुत बड़े सवाल उठेंगे। संसद में हमने सुबह 11 बजे उठाया था ये मुद्दा, 2 बजे फिर उठाएंगे, कल भी उठाएंगे। जब तक देश के प्रधानमंत्री जवाब नहीं देते, तब तक उठाएंगे।

 

एक अन्य प्रश्न पर कि आपने जब ये मुद्दा उठाया तो बीजेपी मंत्री का कहना है कि आप देश की जनता को गुमराह कर रहे हैं, श्री सिब्बल ने कहा कि ये गुमराह करना है तो आप नकवी जी से बोल दीजिए, कौन देश को गुमराह कर रहा है, ये तो वक्त ही बताएगा। किसने कहा कि 4 वजहों से हम नोटबंदी कर रहे हैं, वो 4 वजह गलत निकलीं। असली मकसद क्या था, ये तो वक्त ही बताएगा।

 

एक अन्य प्रश्न पर कि क्या इसमें किसी घोटाले की बू आ रही है, श्री सिब्बल ने कहा कि मैंने सवाल आपके सामने, देश की जनता के सामने खड़े किए हैं। घोटाले की बू आएगी, वो आएगी।

 

एक अन्य प्रश्न पर कि अगर सरकार की तरफ से जवाब नहीं मिलता तो कांग्रेस का अगला कदम क्या होगा, श्री सिब्बल ने कहा कि हम जनता के बीच जाकर नोट दिखाएंगे। 


On the question whether this raises the question on the quality of printing of the notes by the concerned Presses, Shri Sibal said I do not and I cannot answer that question. There are two possible interpretations – either it is criminal negligence or there is criminal culpability because you cannot deal with the currency of a Nation in this fashion.

 

Shri Sibal further said, I do not know, this is something that the RBI and the Government must tell us. I have no idea. I do not have that knowledge but what I have shown you worries me, worries me deeply and will worry every citizen of this country, because every citizen of this country is possessed of these notes.

 

On the question as to why the Congress Party is raising this issue today or is it because of elections in Gujarat, Shri Sibal said we are winning in Gujarat. Ask anybody, they will tell you.



Sd/-

(S.V. Ramani)

Secretary

Communication Deptt.  AICC 


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