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Highlights of the press conference of Dr. Abhishek Manu Singhvi, MP and Spokesperson AICC

 
 
श्री सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि, आप के ही सभी चैनल में और अन्य जगह बार बार प्रकाशित हो गया है की CBI की तहकीकात में कुछ मंत्रियों के नाम हाल में आये हैं, लिखित रूप से आये हैं, उनके बारे में तथ्य बारामद हुए, उनके विषय में उनके वार्तालाप रिकॉर्ड हुए हैं, इत्यादि-इत्यादि।
 
ये औपचरिक रूप से आपके कई चैनल ने घोषणा भी की हैं, नाम नहीं लिए हैं। तो हमारा सीधा प्रश्न सरकार से है कि, कृपया देश को अवगत करवाए कि ये कौन मंत्री महोदय हैं, मंत्री या मंत्री – बहुवचन में – और ये कौनसा विषय है, अटकल से कोई फायदा नहीं। कोई कहता है सृजन का मामला है, कोई कहता है मेडिकल कॉलेज का मामला है, कोई कहता है और किसी प्रकार का।
 
हम तो सिर्फ सीधा यह पूछ रहें हैं कि सरकार का उत्तर दाइत्व बनता है, एक अहम सरकारी एजेंसी है, उच्च स्थर पे, उन्होंने अगर मंत्री मंडल के कुछ सदस्यों, यानी मंत्रिओं के विषय में, माननीय प्रधानमंत्री को एक विशेष रिपोर्ट दी है, अवगत भी करवाया है, तो वो कौन है, किस विषय से शामिल हैं, किस प्रकार, कितनी हरकत, किस तरह से शामिल है, ये पहला प्रश्न हैं ।
 
और दूसरा प्रश्न, अगर ये रिपोर्ट माननीय प्रधानमंत्री और सरकार के पास है, तो क्या ये पर्याप्त है कि सिर्फ मंत्रिमंडल से किसी को हटाया जा, क्या ये पर्याप्त है कि सिर्फ इस्तीफा लिया जाये, या विषय हटाया जाये?
 
क्या ये उचित नहीं कि न्यूनतम PE और फिर तुरंत RC, PE यानि ‘ Prelimary Enquiry’ और RC ‘Registered Case’ दर्ज किया जाए, रजिस्टर किया जाए? और जिस प्रकार से दिन - प्रतिदिन, अभी हाल में बिहार की रैली से लेकर, देश भर में, अखिल भारीतय स्तर पे, जिस प्रकार से नाम प्रकाशित किए जाते हैं, विपक्ष के लोगों के, उस प्रकार से कम से कम देश को अवगत तो करवाया जाए कि कौन ये महानुभाव हैं?

उन्होंने कहा, इन दो प्रश्नों का जब तक स्पष्ट, साफ़ जवाबदेही वाला जवाब नहीं आएगा, तब तक ये ज़ाहिर है कि पूरा देश ये समझेगा कि जवाबदेही अवसरवादी हैं इस सरकार की, जवाबदेही सिर्फ कुछ लोगों के विषय में है, अन्य लोगों के विषय में नहीं है। अगर वे लोग सरकारी हैं, मंत्रिमंडल के हैं, सत्तारूढ़ पक्ष से जुड़े हैं, तब कोई जवाबदेही नहीं हैं, अगर नहीं जुड़े हैं तो जवाबदेही 100 क्या, 125 % है।
 
तो इस प्रश्न से बचने के लिए, हम तो बड़ा सरल प्रश्न पूछ रहें हैं, और कुछ नहीं - कौन व्यक्ति हैं? क्या विषय है? और क्या एक्शन ठोस लिया गया है, सिवाए मंत्री मंडल के हटाने के उसके इलावा ?
 
साथ – साथ अगर ये हमे तुरंत जवाब नहीं मिलता है देश को, आप के ज़रिये, तो वो सब बातें बार-बार दौराही जाएंगी जो हमने आपके समक्ष रखीं हैं।
 
व्यापम में कितनी मुश्किल से अंत में, कितने विलंभ के बाद, आखरी क्षण में, माननीय मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश ने माना कि CBI Enquiry हो। और ये एक अखिल भारितीय, विभिन्न प्रदेशों से सम्बंधित ऐसा Scam है जिसमे सिर्फ लाखों – करोड़ों कि बात नही है, लेकिन मृत्यु हुई हैं, लगभग 70, और आज तक हो रहीं हैं।
 
उसी प्रकार से जवाबदेही हमे नहीं दिखी, पनामा पेपर में- छत्तीसगढ़ में जिन व्यक्ति का नाम आया, न कोई ठोस जवाबदेही अभी तक देखी है PDS scam में, राजस्थान के कई मुद्दों में। महाराष्ट्र में एक इन्क्वारी समिति ज़रूर बिठाई गयी है, लेकिन क्या होगा उसका निकट भविष्य हम नहीं जानते।
 
श्री सिंघवी ने कहा, ये विभिन्न भ्रष्टाचार के द्योतक अखिल भारतीय स्तर पर इतने सारे विभिन्न उदाहरण जो हैं, ये आज उस स्रोत से जुड़े हैं, कि बहुत गंभीर चार्ज हैं, देश कि अहम तहकीकात वाली एजेंसी द्वारा और विशेष रूप से, लिखित रूप से, तथ्यों के आधार पर, एविडेंस के आधार पर, विभिन्न प्रकार की तथ्य, जिस से हम बहुत हद तक अवगत भी करवा दिए गए हैं, मैं नाम नहीं लेना चाहता, उसके विषय में कृपया हमे बताये।


मैं बात अपनी अंत करूँगा दौहरा के वापिस – एक, कौन हैं ऐसे मंत्री, कौनसे विभाग के, और ये किस scam से जुड़े हैं, चाहे वो मेडिकल कॉलेज हो, चाहे वो सृजन हो, चाहे वो कुछ और हो। और दूसरा, क्या सिर्फ इस्तीफा लेने से या स्थानांतरण करने से ये मामला ख़त्म होता है या 
 
 
Shri Singhvi said, we have a very short, straight, specific point. It is well known, it is an open secret, many of you have published it, and both in visual and print media that detailed investigations have culminated in material against some minister/minister regarding certain specific scams, which have been under active investigation by the country’s premier investigation agency. We are not going into details. It could be the Srijan Scam, it could be the Medical College Scam it could be some other scam. What we are saying is-
 
1.     The Hon'ble Prime Minister and the Government of India must share the names and the departments of these persons who have been specifically named.

2.     More importantly, we ask the question through you, is it sufficient to simply drop them from the council of ministers or transfer them here or there or change their department? Does it not require proper criminal action as an accused which in the case, the CBI proceeds with a PE which is a ‘Preliminary Enquiry” and RC which is a ‘Regular Case’.

 
He added, we ask the Hon’ble the Prime Minster, the Government to reply to this, to tell us, to share with us. It is but natural, that continued silence will be interpreted as complete lack of accountability or more appropriately as selective accountability, as opportunistic accountability.  If you are in the government, in the council of ministers or close to the ruling party or dispensation, then there is one kind of accountability which begins with the number 0. If you are not, then there is a different kind of accountability which may even exceed 100%. I think this selectivity and opportunism is something which can be avoided by the government by sharing with the country the details and definitely clear, criminal legal action is called for.
 
 
On the question asked on the recent thumbs up given by the RSS to the government, Shri Singhvi said, I do not the official statement, but figures and facts have a strange way of being painful, truthful and undeniable. If they have said what you are saying, they are only speaking the truth. But they are still guilty of gross understatement. I don’t want to take time, but let me tell you very quickly, that is not a gross understatement the way you have formulated it. When for This quarter we are down to 5.9. What is 7.5, 8, 8.5 and 5.9? Number 2, same quarter last year is always the comparative basis. What was it? Exceeding 7.5. Thirdly, in all these years in which quarter have we had 5.9? These are published figures of official agencies, linked to many other issues which we do not have time to go into now. Why did the RBI take the longest time? Nobody in the world, no central bank takes 9 months to count and give you statistics about demonetization. 10 months were taken, I think this must be the slowest exercise by the RBI, but I would complement the RBI, the RBI is not so slow, unless they are deliberately slow.
 
Secondly, every parameter is changed every day. You are told that the objective of demonetization was not to prevent money getting back to the banks; you are told that the objective of demonetization was not this and not that. Where is the greater increase in catching of counterfeit? - Marginal increase. Where is the diminishing in terrorism? – Nonexistent. Where is the return to the banks far less than 5 lakh crores which was claimed? – 99% has come back. And if the object was to have a credit card economy, I am sorry it takes a long time, a lot of infrastructure to create a credit card economy, not the push button of demonetization.
 
आंकड़ो का और तथ्यों का एक बड़ा स्वाभाविक तरीका होता है सत्य को प्रकाशित करने का। और वो सत्य तीव्र हो सकता है, दुखद हो सकता है, दर्दनाक हो सकता है, लेकिन सत्य- सत्य होता है, आकड़ों वाला सत्य- सत्य होता है। अगर जो आप कह रहीं है वो सत्य है, तो जिन्होंने कहा है उन्होंने सत्य कहा है, लेकिन, उन्होंने understatement कि चरमसीमा, बड़े हलके शब्दों का इस्तेमाल किया है। 5.9 जो प्रकाशित फिगर है, औपचारिक सरकारी RBI का, हमारा नहीं है, आपका नहीं है। वो कहा है? और 7.5, 8 और 8.5-9 कि छलांगे और बड़ी-बड़ी उड़ाने भर रहे थे, वो कहाँ है?
 
इसी क्वार्टर का पुराने वर्ष से होता है हमेशा तुलनात्मक विश्लेषण, उस वक्त कितना था, आज कितना है, वो ही फरक है 7 – 7.5 और 5.9 में। कितने क्वार्टर में 5.9 हुआ भारत का, मुझे तो याद नहीं आ रहा कोई आसानी से क्वार्टर। और, पूरे अर्थशास्त्री अगर सत्य बोले, तो हमारे ढांचे को एक ऐसी चोट लगी है नोटबंदी के नाम पे, जिसका आपको हर क्वार्टर में एक उदाहरण मिलेगा। इसीलिए शायद दुनिया की सबसे गणना हुई है अभी, 10 महीने लगाए हैं एक केंद्र के बैंक ने, जो मैं नहीं समझता किसी विश्व में ऐसा हुआ हो। कितनी मशीने होती है, कितने यंत्र-तंत्र होते हैं गणना के लिए, लेकिन हमे 10 महीने लगे हैं, क्यूंकि गणना के पश्चात् जो तथ्य निकल के आते हैं, जो परिणाम होते हैं, वो दर्दनाक होते हैं।
  
Doklam पर पूछे गए सवाल पर श्री सिंघवी ने कहा कि, हम बहुत हर्षित हैं अगर देश का कुछ भला हुआ हो। देश के हित में अगर कुछ हुआ है तो हम समर्थन करते हैं, हम हर्षित है, हम सकारात्मक हैं। लेकिन, मैंने पहले कहा, जब तक प्रधानमंत्री पूरे देश के साथ, जैसा वो ठीक समझे राष्ट्र सुरक्षा के नियमों और माप-दंडों पे, जितना वो ठीक समझे, और जैसा वो ठीक समझे, जब तक साँझा नहीं करेंगे, तब तक मै कैसे टिपण्णी कैसे करूँगा। मुझे भय है, और मैं चाहता हूँ कि मेरा भय गलत हो, मुझे भय है कि कही सिर्फ BRICS के विषय में, या सिर्फ BRICS के एक दो हफ्ते निकालने के लिए, कोई ऐसी चीज़ DOKLAM में नहीं हुई हो, जो एक ठन्डे बसते में, हफ्ते दो हफ्ते के लिए दाल दिया गया हो। 

मैं नहीं कह रहा हूँ, मैं आशा करता हूँ कि मैं गलत हूँ, लेकिन जब तक हमारे साथ यह साँझा नहीं होगा, तब तक यह शंका-संदेह देश में चलता रहेगा।
   
RBI द्वारा प्रकाशित किए गए आंकड़ों पर पूछे गए सवाल के जवाब में श्री सिंघवी ने कहा कि, मैं समझता हूँ कि RBI केंद्र द्वारा प्रकाशित औपचारिक आकड़ो पे किसी को टिप्पड़ी करने की आवश्यकता नहीं होती। वो सत्य अपने हिसाब से automatically प्रतीत करते हैं। उस सत्य को मानना या underline करना कोई बड़ी बात नहीं है, क्यूंकि सत्य तो सत्य है, आपके सामने प्रकाशित है, आकड़ों का सत्य है। इसीलिए किसी को बधाई देना या किसी की निंदा करने का प्रश्न इस विषय में नहीं उठता है।
 
 
Sd/-
(S.V. Ramani)
Secretary
Communication Deptt.,
AICC

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