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Highlights of the press briefing of Dr. Abhishek Manu Singhvi, MP and Spokesperson

 

श्री सिंघवी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि, आज एक बड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है, वो एक स्तर पे आप लोगों से भी सीधा सम्बंधित है। हमने सुना है कि अब इस देश में पूछना गुनाह है। विचारों पे पाबंदी, सोचने की पाबंदी, लिखने पे पाबंदी, लेकिन यहाँ तक पाबंदी सीमित नहीं है, विचारों पे, सोचने पे और लिखने पे, लेकिन अब, विचारों की हत्या हो रही है, सोच की हत्या हो रही है और लिखने पर भी हत्या की जा रही है।


श्री सिंघवी ने कहा कि यह एक बहुत अजब प्रकार की कश्मकश है, यह कश्मकश मित्रों इस वक़्त की है, बोलें तो मारे जाएँगे,मर गए तो बोल नहीं पाएँगे। यह दुर्भाग्य है आज के समय का, हमारे आज के वातावरण का, कि हमे कहना पढ़ता है कि हमने सुना है, कि अब इस देश में पूछना गुनाह है। विचारों पे पाबंदी, सोचने पे पाबंदी, लिखने पे पाबंदी तक हम सीमित नहीं रहें है। अब विचारों पे हत्या, सोच पे हत्या और लिखने पर भी हत्या का समय आ गया है। आज जो स्वतंत्र सोच, free-thinking, चाहे वो असहमति की सोच हो, चाहे वो intellectuals की सोच हो, यह एक गाली वाला शब्द हो गया है। आपकी हिम्मत कैसे है कि आप स्वतंत्र सोच कर सकते हैं। यह जो आज हुआ है Ms Gauri Lankesh के विषय में, यह कोई एक हत्या नहीं है, यह हमारे गणतंत्र - लोकतंत्र के स्तम्भ की हत्या है। सबसे पहले, यह सिर्फ़ स्वतंत्र, निष्पक्ष, निडर भावना प्रकट करने के हमारे मानव अधिकार की हत्या है। लेकिन उस मानव अधिकार में सामविधानिक जो है, 19(1)(A), उसमें कही प्रेस का ज़िक्कर नहीं किया। यह प्रेस का ज़िक्कर कहा से आया है?


क्यूँकि 70 साल पहले, और यह आज की बात नहीं है, हमारे उच्चतम  न्यायालय ने कहा था कि, 19(1)(A) अनुच्छेद जो है, वो तो खोखला होगा प्रेस के बिना। आपके लोकतंत्र का स्तम्भ जब तक उसमें नहीं आएगा, तब तक यह मानवाधिकार कैसे है?आज उस स्तम्भ पर सीधा एक वार है, घात है, और यह हमारे लोकतंत्र के लिए एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह है।


श्री सिंघवी ने कहा कि, कांग्रेस पार्टी उन सब सही, स्वछंद, स्वतंत्र, निडर बोलने वालों के साथ खड़ी है, चाहे वो प्रेस के मेंबरान हो या चाहे बाहर के लोग । और आप लोगों ने ज़्यादा शायद कांग्रेस पार्टी की निंदा इसीलिए नहीं की है, लेकिन हम मानते हैं कि यह कसौटी लोकतंत्र में नहीं है कि आपने हमारी निंदा की है कि नही की है। यही कसौटी नहीं समझ पा रही है यह सरकार, इसीलिए यह सब हो रहा है।


श्री सिंघवी ने कहा, माननीय कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी जी, उपाध्यक्ष श्री राहुल गांधी जी ने तुरंत, व्यापक रूप से,गम्भीर वार्तालाप किया है मुख्यमंत्री कर्नाटक से, और वह हर चीज़, हर प्रकार का यंत्र-तंत्र किया जा रहा है। अभी दोपहर में, 15-20 मिनिट पहले, एक IG के अंतर्गत एक SIT बन्ने का पूरा स्वरूप, आकार आ गया है। 3 पुलीस की टीम, प्रदेश के विभिन्न कोनो में, ऐसे भर्त्सना योग्य कार्यों में उन्हें पकड़ने में लगी हुई है। हमें आशा है, विश्वास है, हम आवान करते हैं कि तुरंत, जल्द से जल्द, सिर्फ़ पकड़ना नहीं होगा, लेकिन दंडित, सबसे ज़्यादा गम्भीर दंड जो मिल सकता है ऐसी चीज़ के लिए वह होगा, इसका हम आशा और विश्वास रखते हैं।


लेकिन यह सिर्फ़ Ms Gauri Lankesh की बात नहीं है, वो एक शहीद बनी है इसमें, लेकिन यह मुद्दा जो है वह इससे कई ज़्यादा व्यापक है। आज यह एक कोरी घटना नहीं है, न ही यह पहला है, और हमें दुर्भाग्य से कहना पढ़ रहा है कि आख़री भी नहीं।


क्यूँ 2014 के बाद इस वर्ग के विरुध, इस regularity से, हर हफ़्ते, हर महीने हो रहा है? यह प्रश्न मैं सरकार से पूछना चाहता हूँ और इसका उत्तर भी मैं आपको देना चाहता हूँ, इसके उत्तर में कोई संदेह नहीं है।


यह एक व्यक्ति विशेष की बात नहीं है, यह बात है एक वातावरण  जो बनाया गया है संदेह का, असहिष्णुता  का, एक अविश्वास का, finger pointing का, यह एक नया भारत है, यह नए अच्छे दिन है, यह नया Normal है। और यह सब उसी चीज़ की एक आप विद्यमान incident देख रहे हैं, लेकिन इसका जो मूल कारण है, वो यही है। 2016 में जब एक BJP के सांसद ने जब मुक़दमा दायर किया था, और जब न्यायालय का आदेश आया, तो जो पहला ट्वीट जो आया, वो सांसद भाजपा के MP थे, वो भाजपा के राष्ट्र अध्यक्ष IT सेल के, श्री अमित मालवीया का आया, मैं क्वोट कर रहा हूँ "Hope journalists have learnt their lesson”. तो आप सबक़ सीखिए, मेरा अनुरोध है कि आपको सबक़ सिखाया जा रहा है और आप लोग सबक़ नहीं सीख रहे है - यह आज का वार्तालाप है, यह आज का dialogue है, यह आज का New Normal  है। यह गणतंत्र की नई परिभाषा है। और क्यूँकि आप वो अलिखित आदेश का पालन नहीं कर रहें है, इसीलिए यह सब हो रहा है। ऐसे कई लोग है जिनके ट्विटर और फ़ेस्बुक अकाउंट PMO फ़ॉलो करता है, आप चेक कर लीजिए। माननीय वरिष्ठ नेता, कैबिनेट के मेंबरान उन्हें फ़ॉलो करते है। कोई सीधा पीठ थपथपा के औपचारक वक्तव्य देने की ज़रूरत नहीं होती है, प्रोत्साहन एक आँख से, मुँह से, और चेहरे के भृकुटि से प्रोत्साहन दिया जा सकता है। और यह प्रोत्साहन करने के वातावरण ही इसके मूल्य कारण है जिसकी मैं भ्रष्टना करता हूँ।


George Orwell का बिलकुल सही कहना है,  'The further a society drifts from truth, the more it well hate those who speak it.'


तो आज यह जैसा मैंने कहा, अजब कश्मकश है, इसका निवारण सिर्फ़ गणतंत्र - लोकतंत्र की सही परिभाषा समझ कर ही हो सकता है और उसको समझना के लिए, जाग्रुत करने के लिए, व्यक्त करने के लिए, जिनको Presititute कहा गया है, जिनको बाज़ारू कहा गया है, वही वर्ग है जिसको हिम्मत से बोलना पढ़ेगा, स्वतंत्र, स्वछंद, निडर और निष्पक्ष।


Dr. Singhvi said democracy is being throttled and asphyxiated, strangled. Media freedom is on ventilator and Right to Question is being murdered. The word 'free thinker' the word 'dissenter' the word 'intellectual' has become an abuse. The shocking and blood curdling murder of a senior Journalist and Activist, Ms. Gauri Lankesh is a grim reminder of the times we live in. This mindless and cowardly assassination has shaken our conscious to the core. It is an extremely sad moment also for our democracy. Extremely Sad. In condemning this debilitating attack on the foundations of democracy, my Party - The Congress Party - stands as one with free speech and media, with rationalist, with free thinker, with Journalists and with the media fraternity, which more often than not, may be critical of us, but that is not the test, that is not the test of democracy.


The Hon'ble Congress President Smt. Sonia Gandhi, the Hon'ble Congress Vice President Shri Rahul Gandhi have immediately spoken to the Chief Minister of Karnataka and urged him in the strongest possible words to Swiftly and Promptly bring these reprehensible culprits to book.


Every possible measure should be taken to ensure a safe environment are the instructions given. As you know, according to the Police, this incident, this terrifying and terrible incident happened around 8.00 0'clock, when she was found lying in a pool of blood in the porch at her threshold of the veranda. The best Investigative Officers have been put on the job and now you are told that the SIT is headed by an IG. Police Teams, 3 in number, but this can change minute to minute, are already on the job to nab the culprits and we urge, as The Congress Party, and I have already told you that the Hon'ble Congress President and the Hon'ble Congress Vice President have given the strongest possible inputs for the most urgent of action. But the real issue is that this is not an isolated incident. It is not the first and sadly it does not appear to be the last. There is a definite pattern to this narrative. There is a paradigm to this narrative.


Yes, after I attack you, you will punish me - No problem - Question is, why is it happening in the first place? We are talking of preventive first, subsequent is only punishment and law and order will take its own course. But why is it happening in 2014 onwards with savage regularity. This is savage attack on freedom of speech, my freedom of speech but it is an equally savage attack on the press freedom and let me remind you, something you know - 19(1)(A) does not talk of press anywhere. Please read the Constitution. It does not talk of Press. We have called it the Fourth Estate. The Hon'ble Supreme Court in the 1950s has read Press Freedom into 19(1) (A) – why – because you are and you represent a pillar of democracy and more often than not from 2004 to 2014, you have disagreed with us. You have vociferously criticized us but has free thinking dissenters, intellectuals been singled out for physical attack for persecution, for prosecution.


It is happening because an unprecedented climate of intolerance and hate is being deliberately spread in this country. The new rule is, if you do not agree with us, remember Voltaire, he said, 'If you do not agree with me, I will defend to death your right to disagree with me'. The new rule of this is, if you do not agree with us, we shall kill you. This is the New India. This is the definition of 'Ache Din'. This is the new normal, muzzling the fourth estate – the pillar of democracy. And I Ask you this question – the reason why it is happening in the first place – is bigotry and hate – a climate of divisiveness, distrust, suspicion, finger pointing, false jingoism, do not call it, do not besmirch a holy word like Nationalism, it is called Jingoism.  And I want to remind you what the National Head of the BJP Information Technology said in 2016 when this case was filed against this deceased lady. In 2016 Mr. Malviya, the National Head of the IT of BJP, after the case is filed and the person is prosecuted, the Journalist Ms. Gauri Lankesh was prosecuted, he said "I hope Journalists have learnt their lesson'. And the BJP sitting MP was the complainant. Why, because free thinkers and dissenters and intellectuals do not follow the unwritten code of conduct set by this Government about how you must speak, what you must speak, what you must wear, what you must do, how you must think, how you must behave. This is thrust upon us. And let me tell you, many of these people whom you are reading from yesterday also and the earlier Tweets by Mr. Malviya I told you, I have told you, are followed by the PMO. They are followed by Ministers of the BJP of this government. Why, is there no immediate prompt condemnation? Even condemnation by the sitting Government of the BJP would be only word but you do not have that. Obviously, a party which has no shame in calling Journalists 'Bazaar' or 'Prestitutes', will not be very quick to condemn deaths like this when the deaths are motivated by a philosophy which seeks to divide India and polarize India.


Dr. Singhvi said that there are innumerable examples. 'Bazaru' and 'Prestitute' are one. Dabolkar, Pansare, Kalbgurgi are others.  I myself appeared in the Hon'ble Supreme Court. Very reputed newspapers, advertisements were stopped from both Chhattisgarh and Rajasthan. Immediately after publication of reports, the Hon'ble Supreme Court had passed interim orders and they were restored in both Rajasthan and Chhattisgarh. This is the true face and character of this Government. This is the true approach of this Government. Let me make it clear that, intolerance towards criticism is contrary to the core of our democracy. It is a signature posting of a dictatorial regime. This person, this Gauri, this Kalburgi does not matter. What matters is the thought behind it. George Orwell who spoke again and again against totalitarian regime said - 'The further a society drifts from the truth, the more it will hate those who speak it.” We are now being governed by a political system which wants society to drift away and away and away from the truth and the moment one of you speaks the truth, you deserve to be hated, is the new rule.


एक प्रश्न - जैसा कि आपने कहा क्या पिछले तीन साल में, हत्यायें करने वाले और उसके लिए माहौल बनाने वालों के हौसले इसीलिए बढ़ गए हैं क्यूँकि इनके जो आरोपी थे, उनको पिछले तीन सालों में जेलों से बाहर कर दिया गया है के उत्तर में श्री सिंघवी ने कहा, मैं जेनरल बात नहीं कहूँगा, लेकिन हमारा स्पष्ट आरोप लिखित रूप से कई महीनो पहले से है, की जहाँ तक कर्नाटक का सवाल है और महाराष्ट्र का विशेष रूप से सवाल है, बहुत सारी चीज़ें कर्नाटक में महाराष्ट्र के प्रभाव से, दुशप्रभाव से, हो रही हैं, एक सनातन संस्था कर के जो नाम है, और उसके कई cadre, इधर-उधर, महाराष्ट्र कह ले,कर्नाटक कह ले, और उनके कई अभियुक्त महाराष्ट्र पे हमने स्पष्ट रूप से नाम लेकर कहा है, उन पर कोई दण्ड का कार्य नहीं हुआ है। आपने अपने माथे, अपने भृकुटि, अपने चेहरे, अपने आँख से यह संकेत दे दिया है कि यह प्रोत्साहित है ऐसी प्रक्रिया और आपने निंदा न कर के भी एक और प्रोत्साहन दिया है। दण्ड तो बहुत दूर की बात कर रहें हैं आप, इसीलिए निश्चित रूप से यह nexus है और इसका दुशप्रभाव एक प्रदेश में नहीं, अखिल भारत में फैल रहा है,


दूसरा सवाल कि नितिन गड़करी जी कह रहें हैं कि, कर्नाटक की यह घटना है और कर्नाटक सरकार के ज़िम्मे है क़ानून व्यवस्था, हर चीज़ पर प्रधानमंत्री बोले ये ज़रूरी नहीं है, श्री सिंघवी ने कहा कि, वो उनका मत हो सकता है, मैंने तो देखा है कि हमारे सबसे प्रभावशाली वक़्ता माननीय प्रधानमंत्री जी हर चीज़ पर बोलते हैं, ख़ुद नहीं बोलते हैं तो उनका ट्विटर अकाउंट बोलता है,ट्विटर नहीं बोलता है तो उनका फ़ेस्बुक अकाउंट बोलता है, यह प्रकाशित किया जाता है आप लोगों के ज़रिए कि इतने मिल्लियन-लाखों-करोड़ों फ़ालोअर हैं। तो यह ज़ाहिर है कि यह मुद्दा अहम नहीं है उनकी priority लिस्ट में, अब मैं तो नहीं कह सकता कि आप ज़रूर बोले किसी चीज़ पर, मैं तो सिर्फ़ कह सकता हूँ कि आपकी अहमियत और उसकी अहमियत के पीछे क्या कारण है, कारण यह है कि यह एक वर्ग की सोच है और वो जो उस वर्ग की निंदा नहीं करता है कड़े से कड़े शब्द में, मैं उसको इसमें भागेदारी मानता हूँ उस सोच का।


एक और सवाल पर कि अनंत कुमार ने भाजपा की प्रेस वार्ता में  कहा है कि अब तक 18-19 जो राजनेतिक हत्यायें जो हुई है उस प्रदेश में, यह पूरी तरह से क़ानून व्यवस्था का मामला है और उसके ख़िलाफ़ सकट करवाई हो, इसको विचारधारा से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, श्री सिंघवी ने कहा है कि, आप यह बताइये, आप लोगों ने प्रश्न क्यूँ नहीं पूछा अनंत जी से कि क्या ऐसी घटना दस वर्ष में हुई? यह जिनके नाम आप सुनते है, यह संस्था वो संस्था यह अभियान, यह वर्ग, इनका नाम सुना आपने? क्यूँ? यह मूल प्रश्न पूछ रहा हूँ मैं आपसे, इसीलिए क्यूँकि उन्मे भय था, उन्मे परोक्ष रूप से प्रोत्साहन नहीं था। यह मूल-मुद्दा है जो आप भूल रहे हैं। वह क़ानून व्यवस्था का प्रश्न आप लोगों ने किया, वो होता है इवेंट के बाद। मैं आपको मारता हूँ, आप मुझे दंडित करते हैं, वो इवेंट के बाद की प्रक्रिया होगी। हम यह प्रश्न पूछ रहें हैं कि यह तीन साल से हो क्यूँ रहा है?


रोहिंग्या मुस्लिम के ऊपर कांग्रेस के स्टैंड के के सवाल पर श्री सिंघवी ने कहा कि, मैं नहीं कहूँगी इसपे क्यूँकि यह directly subjudice है। उच्चितम न्यायालय ने नोटिस दिया है, अगली तारीख़, 11 तारीख़ है, इसी मुद्दे पर बहस हो रही है, इसीलिए सही नहीं होगा, लेकिन एक बात ज़रूर कहूँगा मैं, हर सरकार की, कांग्रेस के पहले जो सरकार की भी, कांग्रेस की सरकार की भी और यह सरकार की भी, एक नीति है जिसके अंतर्गत पाकिस्तान से, नेपाल से, अफ़ग़ानिस्तान से, कई सारे देश है जहाँ से रेफ़्यूजी आए न आए, उसकी नीती चल रही है। आप उस नीती के अनुसार अगर किसी को हटाए या ले, तो कोई आपत्ति नहीं है,लेकिन आप किसी को सिर्फ़ उनके धार्मिक विचार के कारण अगर निष्पक्ष भावना से व्यवहार नहीं करेंगे तो उसका उल्लंघं होगा। लेकिन, आज मैं यह नहीं कह रहा हूँ, मैं 11 तारीख़ के उच्चितम न्यालय के आदेश के बाद टिप्पणी करूँगा।


To a related question as to why this is happening when the Congress Party is in power in Karnataka, Dr. Singhvi said that is why I took a name. There is very definite material to show that this is 'Sanatan Sanstha' which is operating from Maharashtra because Maharashtra has been going soft on them. Death is in Karnataka.

 

On Kalburgi issue, Dr.Singhvi said he has said that there were three cases. They have a very strong connection with an organization which we have named the 'Sanatan Sena' which has roots in Maharashtra. The Maharashtra Government has not taken sufficient steps. They have fanned out to neighbouring States. However, as far as Kalburgi is concerned, since the murder occurred in Karnataka, we are confident that very soon, you will have a proper suspect and a proper prosecution but we cannot at this stage reveal nor can attack an innocent person.


Sd/-

(S.V. Ramani)

Secretary

Communication Deptt.,

AICC 


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