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Press Statement Issued by Shri Randeep Singh Surjewala (Hindi) with Annexures

रणदीप सिंह सुरजेवाला, मीडिया प्रभारी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने निम्नलिखित बयान जारी किया:-
भाजपा शासन के तीन साल में दस पत्रकारों की हत्या, 142 जघन्य हमले। ऐसा क्यों?
देश के कानून मंत्री द्वारा गौरी लंकेश को नक्सल समर्थक साबित करने का प्रयास शर्मनाक व निंदनीय
तर्कवादियों, विचारकों व लेखकों की आवाज दबाने की एक सुनियोजित साजिश
 

पत्रकार गौरी लंकेश की निर्मम हत्या को 72 घंटे भी नहीं बीते कि भारतीय जनता पार्टी व देश के कानून मंत्री ने इस सक्षम खोजी पत्रकार के संबंध नक्सलवादियों से जोड़ने वाला विवादित व निंदनीय बयान देकर पूरे देश को शर्मसार कर डाला। इतना ही नहीं, गौरी लंकेश की हत्या पर सोशल मीडिया के माध्यम से उन लोगों द्वारा व्यापक जश्न मनाया गया, जिन्हें प्रधानमंत्री ‘ट्विटर पर फौलो’ करते हैं। इसके बावज़ूद भाजपा के सोशल मीडिया प्रमुख हत्या का जश्न मनानेवालों को प्रधानमंत्री द्वारा ट्विटर पर फौलो किए जाने को अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा बताते हैं।  
और नफरत की पराकाष्ठा की हद तो तब हो गई, जब कर्नाटक के भाजपा विधायक, श्री डी. एन. जीवराज ने सार्वजनिक तौर से यह कहा कि अगर गौरी लंकेश ने ‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व भाजपा के बारे में न लिखा होता, तो वो आज जिंदा होतीं’।

देश का दुर्भाग्य है कि भारतीय जनता पार्टी और उसके मंत्रीगण अब हत्या को भी राजनैतिक व सांप्रदायिक रंगों में रंगकर देखने लगे हैं। विडंबना यह भी है कि कानूनमंत्री, श्री रविशंकर प्रसाद ने भाजपा मुख्यालय की प्रेसवार्ता में तर्कवादी, श्री एम. एम. कलबुर्गी की हत्या की चर्चा तो की, पर यह जानबूझकर बताना भूल गए कि दो और तर्कवादियों, श्री गोविंद पानसरे व श्री नरेंद्र दाभोलकर की हत्या में महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने कार्यवाही क्यों नहीं की। कानूनमंत्री व भाजपा ने देश को गुमराह करते हुए यह बताना भी उचित नहीं समझा कि इन तीनों तर्कवादियों की हत्या का संशय के तार कथित तौर से महाराष्ट्र स्थित सनातन संस्था से जुड़े हैं, जिनके खिलाफ भाजपा सरकार ने कोई उचित कार्यवाही नहीं की। 

क्या अब तर्कवादियों, विचारकों व पत्रकारों को अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं? जहां कांग्रेस उपाध्यक्ष, श्री राहुल गांधी ने एक अतिवादी विचारधारा द्वारा उदारवादी व सांप्रदायिकता विरोधी पत्रकार की आवाज़ दबाने की बात की, वहीं भाजपा व कानूनमंत्री जबरन गौरी लंकेश को नक्सलवादियों से जोड़ने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। यह प्रजातांत्रिक मूल्यों पर दिनदहाड़े हमला नहीं तो क्या है? 

देश के लोग जवाब मांग रहे हैं। भाजपा बताए:-
 
1. प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी ने आज तक पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या पर चुप्पी क्यों साध रखी है?
2. गौरी लंकेश की हत्या पर शर्मनाक तरीके से जो व्यक्ति जश्न मना रहे थे, ऐसी अतिवादी विचारधारा के लोगों को प्रधानमंत्री ट्विटर पर क्यों फौलो करते हैं?
3. क्या भाजपा व कानूनमंत्री भाजपा विधायक, श्री जीवराज के विवादित बयान से सहमत हैं कि गौरी लंकेश की हत्या न होती, अगर वो आरएसएस तथा भाजपा के खिलाफ लेख न लिखती?   
4. भाजपा व कानूनमंत्री, गौरी लंकेश को नक्सलवादी समर्थक या नक्सलवादियों से जुड़ाव होने की बेबुनियाद बात किस आधार पर कह रहे हैं?
5. क्या यह सच नहीं कि पत्रकार गौरी लंकेश ने दृढ़तापूर्वक तथा बार बार भाजपा के विभाजनकारी तथा नफरतभरे एजेंडा के खिलाफ अपनी लेखनी से एक व्यापक मुहिम चलाई?
 
 

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