| |

MEDIA

Press Releases

Highlights of the Press Briefing of Shri Randeep Singh Surjewala, Shri Manpreet Badal and Shri Krishna Byre Gowda



Shri Randeep Singh Surjewala, In-charge Communication Deptt. AICC, Shri Manpreet Badal, Finance Minister of Punjab and Shri Krishna Byre Gowda, Cabinet Minister in Karnataka addressed the media.


श्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि, सबसे पहले तो मैं मेरे दो सहयोगियों सरदार मनप्रीत सिंह बादल, वित्त मंत्री, पंजाब और श्री कृष्णा बायर गौडा, कैबिनेट मिनिस्टर, कर्नाटक, जो एक विशेष विषय को लेकर आपके बीच में आए हैं, का स्वागत करता हूँ।


संक्षेप में मैं अपनी बात कहूंगा उसके बाद मेरे दोनों साथी अपनी बातें आपके सामने रखेंगे। आज हम दो विषय आपके सामने लेकर आए हैं, इससे पहले कि उसकी चर्चा शुरु करें..NSUI के और सभी साथियों और पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों को कल पंजाब विश्वविद्यालय में कांग्रेस पार्टी और NSUI की भारी जीत के लिए हम शुभकामनाएँ देते हैं। राजस्थान के बाद अब ये लगातार दूसरी बड़ी जीत छात्र संघ के चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की छात्र इकाई की है। वो सारे नौजवान इस देश के, जिनको मार्ग से भटकाकर और लुभावने सपने दिखाकर प्रधानमंत्री मोदी जी ने सत्ता हथियाई थी, वो सब अब इस देश की और अच्छे दिनों की असलियत को पहचान गए हैं और इसलिए उनके परिणाम अब छात्र संघों के चुनावों में दिखने लगे हैं और आगे आने वाले समय में ये और ज्यादा गतिशील होंगे। आज पूरे देश के टैक्सटाईल यानि कपड़ा उद्योग से जुड़े लोग व्यापक तौर से आंदोलित हैं। जैसा आप जानते भी हैं कि खेती के बाद देश में रोजगार का सृजन करने वाला दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर टैक्सटाईल (Textile) सेक्टर है, जिसमें लगभग 14 करोड़ लोगों के करीब रोजगार पाते हैं, प्रत्यक्ष और परोक्ष रुप से organized और unorganized sector में, टैक्सटाईल सेक्टर और दूसरे धंधों से जुड़े लोग कांग्रेस उपाध्यक्ष श्री राहुल गाँधी जी से मिले थे और उसको लेकर और कल GST काउंसिल की होने वाली बैठक को लेकर एक व्यापक वक्तव्य मेरे दोनों साथी देंगे और उसके बाद आज सरकार द्वारा एक विशेष बयान जारी किया गया है, संक्षिप्त में हम उसकी चर्चा करेंगे। अब मैं अनुरोध करुंगा श्री मनप्रीत बादल से कि वो अपनी बात कहें।


श्री मनप्रीत बादल ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि, सबसे पहले तो मैं तमाम दिल्ली की प्रैस को इस बात का बड़ा मशकूर और ममनून हूं कि आप इस कांग्रेस की प्रैस वार्ता में हाजिर हुए। एक बहुत बड़े शायर हुए हैं, बड़े संगीतकार, अलामा इकबाल और मैं उनसे शुरु करता हूं, आप लिखते हैं कि – हुस्न - ऐ -तकदीर से जाग उठता है, कौमौं का नसीब, हुस्न कहते हैं सुंदर को और तकदीर बोलते हैं प्लानिंग को, अगर अच्छी प्लानिंग हो तो कौमों के नसीब जाग उठती है। हुस्न - ऐ - तकदीर से जाग उठता है कौमौं का नसीब। कभी बदलती नहीं तकदीर अरमानों से, बातें करने से तकदीर जो है, वो कौमौं की नहीं बदलती। तो आज जो GST देश में लागु हुई है, 3 महीनों से और एक तासूर ये पैदा किया जा रहा है कि This has been a grand success और सरकार को 90 हजार करोड़ पहली किश्त में आ गया है और मैं आज जो भी बात कहूंगा, आप ये समझ लें कि मैं कोई सियासी शौकबाजी से ये बात नहीं कह रहा हूं। ये कोई तक्कलुफ का तकाजा भी नहीं है और खास कर के जो  क्रीटिसिजम होती है, वो बनाम तामीर हो, constructive criticism, मैं उसके एतबार से सिर्फ वाईस प्रेसिडेंड कांग्रेस पार्टी राहुल गाँधी साहब कुछ दिन पहले वो सूरत जाकर आए, वो तमाम टैक्सटाईल के जितने भी इस क्षेत्र में काम करते हैं, तो देखिए जैसा रणदीप साहब ने फरमाया कि एग्रीकल्चर के बाद टैक्सटाईल सबसे बड़ा उद्योग है, जो बड़ी मिलें हैं वो महज 10 फीसदी कपड़ा हिंदुस्तान में तैयार होता है, That is done by mill, 90 % जितना भी कपड़ा तैयार होता है वो बहुत छोटे, बिल्कुल अपने झौपडियों में, घरों में बैठकर, खड्डी की, लूम का, पॉवर लूम का काम हैं और They are the largest employers of labour in India, तो तीन नोबल causs हैं, टैक्सटाईल के समझ लीजिए, या सरकार के।


सबसे पहले है - मेक इन इंडिया, जो भी कारोबार चल रहा है, It should be done in India, Make in India.
 

दूसरा है To boost exports और तीसरा है – to give employment, अब जो GST का निजाम माफिज हुआ है और जिस तर्ज पर ये चल रहा है, Government of India is actually in breach of all three of them,  इससे पहले जो कपड़ा आयात होता था, उस पर 18% ड्यूटी लगती थी, ये ड्यूटी कम हो गई है, ये 5% पर आ गई है और जो हमारा हिंदुस्तान में कपड़ा तैयार होता था उस पर Exemption थी, अब ये effective रेट जिसको बोलते हैं वो 12% पर आ गया है। हमें शंका इस बात की है कि इससे चाईना या जो और हिंदुस्तान के competitors हैं, They will flood the market और जो बड़ी मिल हैं, वो तो Competition में आ जाएंगे, क्योंकि मेरा ताल्लुक पंजाब, लुधियाना से है। हर घर में कोई डाई कर रहा है, प्रैस कर रहा है, कोई बटन लगा रहा है और ये इसको क्योंकि The burden of competition हैं, ये साईकिल इन्डस्ट्री में भी है, ये कपड़े की इन्डस्ट्री में भी है, इससे रोजगार बिल्कुल खत्म हो जाएंगे, इससे आपके इम्पोर्ट बढ़ जाएंगे, एक्सपोर्ट में से आप competition से बाहर निकल जाएंगे और टोटल इंडिया का चाहे वो एक गुजरात का, चाहे वो महाराष्ट्र का है, चाहे पंजाब है, चाहे वो त्रिचुर है और मुझे अफसोस इस बात का है कि रिवेन्यू सेक्रेट्री भी गुजरात से है और प्रधानमंत्री भी गुजरात से हैं और इतना बड़ा ये जो हमारा सेक्टर है, ये बहुत ज्यादा टेंशन में आ गया है।

 
अगर इसको आप नोटबंदी से जोड़ो तो पिछला जो एक साल गुजरा है वो बहुत सख्त छोटे कारोबारी और व्यापारी के लिए है। क्योंकि मेरा ताल्लुक पंजाब से है, कल शाम को 8 बजे जो हमें रिजल्ट जुलाई के आए, तो पंजाब ने उम्मीद की थी 1650 करोड़, हमारा रिवेन्यू आना था और हमें सिर्फ 846 करोड़ मिला है। Punjab was expecting about Rs. 1650 crore of revenue but we received 846 crore and as a result every state is under stress. there is shortfall of Rs.600 crore.

 
And as a result और ये सिर्फ पंजाब की बात नहीं मैं कह रहा हूं, पंजाब तो सिर्फ उदाहरण है। हर राज्य Every state is under stress, हमें सैलरी देनी होती थी, ये पैसे Shortfall of 600 crore, साल में ये लगभग 6000 करोड़ बन जाएगा और जो सरकार ये कह रही है कि 90 हजार करोड़ इक्कट्ठा हो चुका है, दरअसल इसमें जो इन्होंने नहीं बताया कि जो टैक्स क्रेडिट क्लेम करने थे, That will almost amount to 30 हजार करोड़, तो ये इतना Shortfall के हालात नहीं हैं, जितने की बताए जा रहे हैं और हमें स्टेट को The money is not passed on, प्रोविजनली बहुत कम दिया जा रहा है। सरकार 30-40 हजार करोड़ पर बैठी है, हमें  borrow करना पड़ा, सैलरी देना पड़ा, तो हमें ब्याज लग रहा है और सिर्फ भारत सरकार को ब्याज मिल रहा है। जो हालात हैं वो काबिले रहम हैं, स्टेट के लिए खासकर।

 
There is lot of pressure on state, how do we  perform? There is pandemonium, there is chaos because the network has collapsed. It was done in such a hurry. How will money come in?

 
अगर पता नहीं 3 डेडलाईन दी गई। 3 बार टैक्स भरने की जो रिटर्न भरने की लास्ट डेट थी, Network collapse की वजह से। Network अगर collapse होगा तो टैक्स रिटर्न कैसे दिया जाएगा? जो employment creation जो टैक्सटाईल का था। तो कल GST काउंसिल की मीटिंग है, कृष्णा जी मेरे साथ बैठे हैं, ये कर्नाटक से ताल्लुक रखते हैं, तो कांग्रेस इस मुद्दे को उठाएगी कि टैस्सटाईल सेक्टर सुथरे ढंग से चल पाए।
 

आम जो छोटा कारोबारी है, आपने बात की मुआवजे में 75 लाख तक माफ है दरअसल 75 लाख में से अगर एक भी आप छोटा होटल चला रहे हैं, छोटा कारोबार कर रहे हैं, 75 लाख कहना, एक मिसाल देता हूं, आपके बैंक अकाउंट में 20 हजार रुपया पड़ा है, साल का आपको उसका 200, 300, 400 या 2000 जो भी आपको उस बैंक अकाउंट का ब्याज मिल गया, you are not entitled, you are liable to be taxed then. There are a lot of glitches in this. And so the Congress party has serious reservations on a lot of issues. It was done in a hurry.

 
They will, you will be. मुझे लगता है ये शुरु ही गुजरात चुनाव से पहले-पहले था कि जल्दी से इसको लागु कर दें। but it has led to human hardship in India.  क्योंकि ये खास कर के कृष्णा जी को दक्षिण से बुलाया गया और मुझे नोर्थ से बुलाया गया कि एक देश का एक व्यू प्वाईंट बने की इंडिया में क्या हो रहा है।

 
 Shri Krishna Byre Gowda said, that I represent Karnataka in the GST Council and our Congress Vice President Shri Rahul Gandhi Ji met with representatives from the Textile industry in Gujarat and being from Karnataka, though we are not a Textile Dominant State, we are a Garment Dominant State, but we completely sympathize with the issues raised by the Textile Sector and their representatives. Hence, I am here though from the South, from Karnataka, to add our voice to the concerns of people working in the Textile Sector. The Congress Party stands with the issues of the people of Textile Sector.

 
As Manpreet Ji mentioned, there are two-three issues here. Earlier there were many import duties, countervailing duties on imports of Textile which have come down with the introduction of GST. This is affecting the people working in the Textile Sector and making them cost unattractive comparative imports. I think that should be immediately corrected. Coming from Karnataka, it affects our Silk Sector also. Earlier, import duties on Silk were in excess of 20% and now it has come down to 10% and that is making the domestic silk industry, which has got a 2000-2,500 years history, it is almost a cottage industry, it is making this age-old industry uncompetitive. So, I think this change should be corrected, if you really believe in Make- in-India, want to propagate it, then I think Government of India must take measures to protect the domestic industry wherever possible, particularly Textile Industry.

 
Secondly, the way some of the input tax credits are structured, they favour large composite Textile Manufacturers and disfavour small independent Textile Manufacturers. This is also an issue I along with Manpreet Ji and our friends will be raising in the GST Council that the disparity that exists favouring the larger composite mega players and disfavouring the smaller Textile units, this disparity must be corrected. That would be another issue, we would be pushing for. Also, Textile Sector has demanded that instead of monthly returns filing, they may be given a quarterly option. I think there is a point to be taken in that. At least for Units of certain sizes, small or a semi-medium size of Textile players can be given a quarterly compliance filing option. We would be exploring this. There are lot of complexities involved in it but definitely we will be exploring this option of giving a quarterly reporting, that is also something the Congress Party has asked us to consider, we will be definitely exploring that option and lastly as Manpreet Ji pointed out, whatever the preparations or the lack of preparations of GST, I think the preparations in GSTN i.e. the portal which is the key backbone of the entire GST, it is an online portal that takes in returns, matches returns of suppliers, buyers, sellers, vendors and does the input credit part. That is also the portal that gets us the revenue. We feel very strongly that the preparations are inadequate as far as GST is concerned and hence, a lot of small tax-payers are unable to file their returns, many times the system is down, it is frequently down, some of its reporting is raising a lot of questions. There is a difference between the data given by the GSTN and data given by RBI. At times, we do not know which data to go by. So, in general the expectations we had of GSTN or the assurances that were made to us about the preparedness of GSTN have turned out to be much less than what was promised to us.

 
So, this is a serious lack of preparedness on the part of GSTN. It is badly affecting not only Government, Government revenues but it is more importantly badly affecting a lot of tax-payers who are unable to file their returns. As a result, multiple extensions are being given. You have all reported those extensions. So, I think, this is a serious issue which is affecting many tax-payers particularly the small ones, we will be raising those issues also in the tomorrow’s Council meeting. So, we support the concerns raised by the representatives of Textile Sector and we would be doing whatever we can to get as much relief as possible to them.


Shri Surjewala said there is a short statement on another subject just to supplement what my two senior colleagues and to put in rather even simpler words.


श्री सुरजेवाला ने कहा कि देश के कपड़ा उद्योग के साथ जो समस्या है वो बड़ी सीधी है। आपने फाईबर पर, मेगनेट फाईबर पर 18% टैक्स लगाया है और जो कपड़ा बुनकर आएगा उस पर 5% टैक्स है। तो इससे छोटे और बड़े जैसा मनप्रीत जी और कृष्णा जी ने कहा उन पर क्या असर पड़ा रहा है, एक छोटा सा उदाहरण देकर मैं आपको अगले विषय पर लेकर जाउँगा। 100 रुपए का कपड़ा एक छोटे से लूम वाले व्यक्ति ने क्योंकि कपड़ा तो छोटा जो 80 या 90 % है वो कपड़ा यानि फाईबर जो है माफ कीजिए फाईबर किसी से खरीदेगा, फाईबर नहीं बनाते, जो लूम चलाते हैं वो धागा जो है खरीदेंगे, जब वो 100 रुपए का खरीदा तो 18 रुपया उस पर टैक्स लग गया, तो 118 रुपया उसकी लागत हो गई, उसने उस पर 20 रुपए का काम कर दिया, जो भी कपड़े की बुनवाई का काम उसको करना था और 118 और 120, 138 रुपया। तो जो उसका कपड़ा बना उस पर 5% टैक्स लग गया तो कपड़े की लागत हो गई 145 रुपया। यानि अगर आप एक छोटा सा लूम चलाते हैं तो 100 रुपए का माल जब आपने खरीदा धागा और उसका जो कपड़ा बना उसकी लागत 145 रुपया।

अब आप देखें बड़ी कंपनियों को तकलीफ नहीं हैं। उदाहऱण के तौर पर रेमेंड हैं, आपने जब धागा क्योंकि वो स्वयं बनाते हैं तो 100 रुपए का जब उन्होंने धागा लिया तो उन पर कोई टैक्स नहीं लगा, क्योंकि धागा उन्होंने खुद बनाया, खरीदा नहीं। उस पर उन्होंने 20 रुपए का काम किया तो लागत हो गई 120 रुपया, तो कपड़ा बना उस पर 5% टैक्स लग गया तो लागत हो गई 125 रुपया। तो आप जो एक साधारण लूम वाले हैं जो छोटे-छोटे 90% हैं उनके 100 रुपए की लागत आई 145 और जो एक और व्यक्ति है जो बहुत बड़ा उद्योगपति है, उसकी लागत इस regime के अंदर आ रही है 125, तो उसका धंधा तो ठप होगा ही, ये है जो बात और इस प्रकार की अन्य बातें हैं, जो राहुल जी से वो सब मिले और उन्होंने वो उठाई, हमारे आदरणीय मित्र GST काउंसिल के माध्यम से रखेंगे।


एक और अन्य महत्वपूर्ण विषय है। भारतीय जनता पार्टी के शासन में पिछले 3 साल में 10 पत्रकारों की जघन्य हत्याएं हो चुकी हैं और 142 पत्रकारों पर हमले हुए। पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या को अभी 72 घंटे बीते नहीं परंतु भारतीय जनता पार्टी और देश के कानून मंत्री ने इस सक्षम और खोजी पत्रकार के संबंध नक्सलवादियों से लाकर जोड़ दिए और इससे पूरे देश को इस विवादित बयान से शर्मसार भी कर डाला। इतना ही नहीं गौरी लंकेश की हत्या पर सोशल मीडिया पर जिन अतिवादी विचारधारा लोगों के द्वारा जश्न मनाया गया, उन्हें देश के प्रधानमंत्री फोलो करते हैं और बीजेपी के सोशल मीडिया हेड़ के सेल ये कहते हैं लिखित बयान में कल रात को कि अगर प्रधानमंत्री किसी अतिवादी विचारधारा के लोगों को फोलो करते हैं जो पत्रकारों को हत्या का जश्न मनाता है तो ये अभिव्यक्ति की आजादी की हिस्सा है और शायद इतना ही नहीं नफरत की पराकाष्ठा तो जब हो गई जब कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक जिनका नाम है श्री डी.एन.जीवराज, कल उन्होंने सार्वजनिक तौर से कहा कि अगर गौरी लंकेश आर.एस.एस और भाजपा के खिलाफ ना लिखती तो उनकी हत्या ना होती, इसका क्या मतलब निकाला जाए?
 

देश का दुर्भाग्य अब यह है कि भाजपा और देश के कानून मंत्री अब हत्या को भी साम्प्रदायिक और राजनीतिक रंगों से देखने लगे हैं। हत्या और हत्यारे का कोई रंग हो नहीं सकता, उसकी केवल एकमात्र कानून और संविधान के अनुरुप सजा हो सकती है। विडंबना ये भी है कि देश के कानून मंत्री द्वारा भाजपा के मुख्यालय में पूरे देश को ये कह कर बहकाने की कोशिश की गई कि तर्कवादी यानी rationalist कलबुर्गी जी की हत्या का आज तक पूरा खुलासा नहीं हो पाया, पर वो जानबूझ कर ये बताना भूल गए कि दो और तर्कवादी श्री गोविंद पंसारे और श्री एम.एम दाबोलकर, उनकी जो हत्या है, उसके बारे में महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने आज तक कोई कार्यवाही नहीं की और भाजपा और कानून मंत्री ये बताना भी भूल गए कि इन तीनों तर्कवादियों की हत्या के तार और संशय कथित तौर से एक ही संस्था से जुड़े हैं और वो संस्था है सनातन संस्था जो महाराष्ट्र में है जिस पर पूरी जांच आज तक की नहीं गई। तो क्या तर्कवादियों, विचारवादियों, पत्रकारों, लेखकों को उनको अभिव्यक्ति की आजादी इस देश में नहीं। जब कांग्रेस उपाध्यक्ष श्री राहुल गाँधी जी एक अतिवादी विचारधारा द्वारा एक निर्भिक पत्रकार की आवाज दबाने की बात करते हैं तो भाजपा के नेता और देश के कानून मंत्री पत्रकार गौरी लंकेश के संबंध जबरन बगैर आधार के नक्सलवाद से जोड़ने की बात करते हैं, ये किस प्रकार का कुतर्क है, हमें समझ नहीं आया और इसलिए इस देश के लोग जवाब मांगते हैं और हम 5 सवाल भाजपा से पूछना चाहते हैं।


प्रधानमंत्री जी आज तक गौरी लंकेश की हत्या पर चुप्पी क्यों साधे हैं, जवाब दें?


दूसरा सवाल गौरी लंकेश की हत्या पर शर्मनाक तरीके से जो व्यक्ति सोशल मीडिया के माध्यम से जश्न मना रहे थे, उन्हें आज भी प्रधानमंत्री ट्विटर पर क्यों फोलो कर रहे हैं और ये किस प्रकार से अभिव्यक्ति की आजादी है, जैसा कि भाजपा के नेतागण कह रहे हैं?


तीसरा सवाल क्या भारतीय जनता पार्टी और देश के कानून मंत्री जीवराज के इस विवादित बयान से सहमत हैं कि अगर गौरी लंकेश आर.एस.एस और भाजपा के खिलाफ ना लिखती तो उनकी हत्या ना होती, इस सवाल का जवाब देश जरुर जानना चाहेगा?

चौथा, किस आधार पर देश के कानून मंत्री गौरी लंकेश के संबंध नक्सलवादियों से होने की बात कर रहे हैं, इसका क्या आधार है?


पाँचवा, क्या ये सच नहीं कि पत्रकार गौरी लंकेश लगातार भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के भ्रष्टाचार, भारतीय जनता पार्टी के विभाजनकारी और नफरत भरे ऐजेन्डा के खिलाफ अपनी कलम से मुहिम चलाती रही। इन सब सवालों का जवाब भाजपा को इस देश को देने की आवश्यकता है।


एक प्रश्न पर कि बिहार के मुज्जफरनगर में भी एक पत्रकार को गोली मारी गई है, श्री सुरजेवाला ने कहा कि आपने वाजिब कहा, मैंने जब 10 पत्रकारों की हत्या की बात की, तो 10 वें पत्रकार जिनकी बिहार में जेडीयू से संबंधित एक व्यक्ति के द्वारा हत्या की गई है, उसी की चर्चा कर रहा था। 10 पत्रकारों की तीन सालों में उनकी कलम की धार की वजह से हत्या कर दिए जाना और 143 पत्रकारों पर जानलेवा हमला होना, ये दिखाता है कि ऐसी ताकतें जो अतिवादी विचारधारा की परिचायक हमारे देश में है, वो इस देश में बोलने, लिखने, सुनने और कहने इन सबकी आजादी पर अंकुश लगाना चाहती हैं। हम जहाँ उस सम्मानित पत्रकार की हत्या की निंदा करते हैं, उम्मीद करते हैं क्योंकि सरकार उसी पार्टी की है जिस पार्टी से संबंधित व्यक्ति ने हत्या की है, य़ा तो ये जांच सीबीआई को दे दी जाए, नहीं तो निष्पक्ष जांच के लिए SIT का गठन किया जाए।


एक अन्य प्रश्न पर कि GST के लिए 1600 करोड़ सिर्फ एक महीने के लिए था, श्री मनप्रीत ने कहा कि सब सिर्फ 1 जुलाई के महीने के लिए था, तो क्या है कि 1600 करोड़ की उम्मीद थी, पंजाब को और कर्नाटक हर राज्य को, शार्ट फॉल हर राज्य में हुआ है, तो राज्य को अपनी जिसको हिंदी में आई चलाई रोज का, तो हमें तो borrow करना पड़ा। हमारा loss तकरीबन 800 करोड का है। हमें मजबूरन Borrow करना पड़ा, क्योंकि हमें सैलरी देनी हैं, इन्ट्रस्ट पेमेंट देनी है, पेंशन देनी है। सरकार दे नहीं रही है, Government of India is sitting on a pile of money जैसा कि कृष्णा जी ने कहा कि नेटवर्क डाउन है, लोग रिटर्न नहीं भर रहे हैं, 3-3 डेडलाईन हो गई हैं, आज फिर crash कर गया है, तो जो स्टेट को, We have come under severe stress..शार्ट फॉल हो गया है। लेकिन जो छोटा कारोबारी है वो बड़ा तंग आ गया है।


एक अन्य प्रश्न पर कि कि क्या ये GST के चलते लॉस है, श्री मनप्रीत ने कहा कि जो तो स्टेट का GST था क्योंकि इसके दो पहलू हैं एक स्टेट GST है, एक IGST है, स्टेट का तो हमारे खजाने में आ गया है, लेकिन IGST को देरी हो रही है, शेयर नहीं आ रहा है। इसका जो GST की तर्जेहकुमत है, ये ढंग से नहीं चल रही है।  There is chaos and there is pandemonium, That is what I wanted to say. स्टेट का तो पहले ही आ गया है, कल शाम को 8 बजे सभी राज्यों को दिया गया है।

So the shortfall which we had perceived in Punjab is about Rs.800 crore.

एक अन्य प्रश्न पर कि जो शार्ट फॉल हुआ है, उसमें compensation मिलेगा, श्री मनप्रीत ने कहा कि अभी तक तो compensation हर राज्य को मिलना है, लेकिन जो हमारे cash flow disturb हो गए हैं, 800 करोड तो मुँह से ही बोल दें। ये पंजाब पहले महीने में फेस कर रहा है। जो हम इन्ट्रस्ट दे रहे हैं, वो वापस किया जाए जो हमारा शार्ट फॉल है।

गौरी लंकेश हत्या पर बीजेपी के बयान पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री सुरजेवाला ने कहा कि शायद कानून मंत्री जी ने ना तो कर्नाटक मुख्यमंत्री जी का बयान और ना उनकी पत्रकार वार्ता और ना उनके ट्विटर अकाउंट को देखने की कोशिश की और अगर देखते तो इस तरह का बगैर जानकारी का बयान न देते। श्री राहुल गाँधी जी ने क्या कहा, कांग्रेस उपाध्यक्ष श्री राहुल गाँधी जी ने कहा कि इस देश में लेखकों, तर्कवादियों, पत्रकारों और विचारकों उनकी आवाज को एक अतिवादी विचारधारा दबाना चाहती है। कभी वो नौकरी से बर्खास्त करवा कर, कभी शारीरिक हमले करवा कर, कभी extreme में कत्ल करवा कर, कभी उनकी आवाज को दबा कर, इसके अलग-अलग तरीके हो सकते हैं, पर आखिर में ये एक विचारधारा है और हम याद दिलाएं भाजपा को ये वही विचारधारा तो है जिसने महात्मा गाँधी जी की हत्या पर भी जश्न मनाया था और उसके बाद देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने बाकायदा एक पत्र लिखकर और उसमें ये इल्जाम लिखकर रिकोर्ड करके कि आर.एस.एस की विचारधारा की वजह से महात्मा गाँधी जी की हत्या हुई है और उसी वजह से आर.एस.एस को प्रतिबंद्धित किया था। अतिवादी विचारधारा किसी भी संगठन की हो या व्यक्ति की हो, वो समाज के लिए सही नहीं, प्रजातंत्र के प्रतिकूल है और यही राहुल जी ने कहा।
 

एक अन्य प्रश्न पर कि श्री सिद्धारमैया कर्नाटक के मुख्यमंत्री है, कर्नाटक में इस मामले में जांच की क्या कोई टाईमलाईन निर्धारित होगी, श्री सुरजेवाला ने कहा कि मैं अपने आपको आपसे जोड़ता हूं सबसे पहले और श्री सिद्धारमैया जी ने स्पष्ट ये कहा है कि SIT का गठन 24 घंटे के अंदर हो गया था और जो दोषी हैं उनकी जो पहली पहचान है वो एक जो सीसीटीवी कैमरा गेराज के उपर लगा था, एक दोषी की उसमें हैलमेट पहने हुए पिक्चर पुलिस के पास है, इससे ज्यादा जानकारी सांझा करना इस स्टेज पर अभी उचित नहीं होगा, हमें पूरा विश्वास है कि कर्नाटक सरकार सीमित समय के अंदर दोषियों को पकड़ने में कामयाब होगी।
 

कलबुर्गी हत्याकांड पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री सुरजेवाला ने कहा कि 3 तर्कवादी प्रमुख तौर से जिनके नाम सार्वजनिक पटल पर हैं उनकी हत्याएं हुई, कलबुर्गी जी, पंसारे जी, दाबोलकर जी और अब ये जांच में जो STI महाराष्ट्र में जिसका गठन हुआ था, उसमें ये आया और अभी ये प्रथम दृष्टि पर है कि तीनों हत्याओं में एक weapon इस्तेमाल हुआ, तो इसका मतलब दो हत्याएँ जो महाराष्ट्र में हुई, उनके तार-तार सीधे-सीधे कहीं ना कहीं प्रथम दृष्टि में कलबुर्गी से जुड़े और ये भी SIT ने प्राथमिक तौर से समाचार पत्रों में साक्षात्कार में कहा कि एक विशेष संस्था जो महाराष्ट्र में है उसके तार कथित तौर से इन हत्याओं से कहीं ना कहीं जुड़े हैं। प्रश्न अब य़े भी है कि क्या भाजपा की महाराष्ट्र की सरकार या तो स्वयं जांच करे और अगर वो अपने आपको असक्षम पाते हैं किसी भी कारण से तो कम से कम इस पूरे मामले को एक औऱ कोर्ट मॉनीटर्ड SIT को दे दिया जाए। इससे ज्यादा जब आनगोईंग मर्डर के बारे में जांच चल रही है, कहना उचित नहीं होगा।
 

एक अन्य प्रश्न पर कि गौरी लंकेश जी की हत्या के बारे में जो लोग लिख रहे थे, उनमें से 5 पत्रकारों को धमकी मिली है, क्या कहेंगे, श्री सुरजेवाला ने कहा कि जिस प्रकार से पत्रकारों को ड़राने की साजिश की जा रही है, फेसबुक के माध्यम से 5 पत्रकारों को शारीरिक तौर से हमले की और हत्या की जिस प्रकार से चेतावनियाँ दी गई, ये उन सारी चेतावानियों से कहीं ना कहीं मिलती हैं, जिन लोगों ने गौरी लंकेश की हत्या के बाद ट्विटर पर जश्न मनाया था, या भाजपा के एक वो विधायक जो एक तरह से पूरे देश के पत्रकारों को कर्नाटक से चेतावनी दे रहे थे, प्रश्न ये है कि जैसा कि एक आदरणीय साथी पूछ रहीं थी, लड़ाई विचारधारा की नहीं, लड़ाई इस देश में प्रजातंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी औऱ अतिवादी विचारधारा के बीच की है। आप किस पाले में किस तरफ खड़े हैं, निर्णय ये करना है। दुर्भाग्य से मौजूदा भाजपा सरकार इन अतिवादी तत्वों को संरक्षण देते और प्रोत्साहन देते नजर आती है और इसलिए हमें इस पत्रकार गोष्ठी के माध्यम से इन शब्दों का उपयोग देश के कानून मंत्री के लिए करना पड़ा।

 
एक अन्य प्रश्न पर कि पंजाब में लंगर का मुद्दा उठा था, क्या कहेंगे, श्री मनप्रीत ने कहा कि क्योंकि मेरा ताल्लुक पंजाब से हैं, इन्होंने पूछा कि पंजाब के क्या मसले हैं, लेकिन जो आपका लास्ट सवाल का पिछला हिस्सा था कि जो लंगर पर या दरबार साहब पर टैक्स लगा है तो पिछली मीटिंग में भी पंजाब ने ये raise किया था, टैक्स देने पर कोई एतराज नहीं है, पर आप समझने की कोशिश कीजिए कि 350 साल हो गए हैं, दरबार साहब को वजूद में आए, 350 साल में या अंग्रेज की हुकुमत रही, अफगानों की हुकुमत रही, तुर्कों की हुकुमत रही, किसी ने दरबार साहब पर टैक्स नहीं लगाया था, किसी ने नहीं लगाया था। तो पंजाब का एतराज सिर्फ ये है कि दरबार साहब को टैक्स देने से गुरेज नहीं है, लेकिन आईडिया है वो टैक्स के बारे में है और आपका जो दूसरा सवाल था कि सुखबीर सिंह बादल ने कोई इल्जामतराशी की है, कांग्रेस की सरकार पर। 70 साल हो गए हैं, हिंदुस्तान को आजाद हुए और 10 साल पहले इलेक्शन शुरु हो गए थे राज्यों में, 1937 में पहली बार चुनाव हुए थे, भारत में, हांलाकि उस वक्त यूनाईटिड़ पंजाब होता था, जिसमें पाकिस्तान का बहुत बड़ा हिस्सा था, हरियाणा, हिमाचल, पंजाब। सुखबीर बादल को कोई अक्लेतुल्म तो है नहीं, मैं आपके माध्यम से ये कहना चाहूंगा कि 1937 से लेकर 2017 तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि अकाली दल को ऐसी तारीख शिक्सत का सामना करना पड़ा हो  कि अकाली दल पंजाब की 117 ऐसेम्बली में सिर्फ 15 विधायक रह गए हैं, वो सुखबीर साहब की लीडरशीप की वजह से है, पंजाब के लोगों ने कांग्रेस पार्टी सुर्ख होकर निकली है और पंजाब के लोगों ने चोर और चौकीदार का फैसला कर दिया है।

 
श्री फारुख अबदुल्ला के दिए बयान पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री सुरजेवाला ने कहा कि जब तक एनआईए की जांच रिपोर्ट सामने ना आ जाए, हम तब तक कुछ नहीं कहना चाहेंगे, लेकिन एक बात सही है कि अगर कोई व्यक्ति या समूह विदेश से नाजायज तरीके से धन लाकर, भारत विरोधी गतिविधियों में उसका इस्तेमाल करता है तो उसके खिलाफ निर्णायक कार्यवाही होनी चाहिए, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इसकी पक्षधर है।     

 
On the question that BJP has said Gauri Lankesh was not provided the kind of security needed and the State Government has failed in that, Shri Surjewala said the foundation of this misconceived argument by the Law Minister of India unfortunately is that, Gauri Lankesh had an inroad or a connection to a Naxalite. May we respectfully ask BJP and the Law Minister of the country, what is that information that he has and the Union Government has that they were withholding. Why don’t they share if they have any such information with Congress Government of Karnataka and we will be happy to look at it. And if they do not have any such information, then they should stop this entire game of misinformation and maligning an independent Journalist, who took on BJP and RSS Leaders.

 
On the question that the tax-payers are unable to file their returns, in addition to what Shri Manpreet said, Shri Gowda said the fact that the tax payers are unable to file their returns, shows that there is an economic activity and that is not reflected in tax returns because of GSTN not functioning as per expectation. Many people are unable to file their returns. They are having lot of difficulty. So, there is latent tax revenue which could have come, which has not come on account of GSTN and preparedness issues. So, that means the problem is with the preparedness.

 
On the question that the PM had given assurance that the shortfall will be compensated to the States, Shri Manpreet said that is there but our cash flow has been disrupted. That is the loss which Punjab is facing first month is to the tune of around Rs. 800 crores. What we are saying is Government of India in sitting on a pile of money probably making/accruing some interest on that. States meanwhile have to borrow. Compensation will come but it has caused severe disruption that is all.

 
On the question of the reaction of the Congress Party on twitter of Shri Digvijay Singh, Shri Surjewala said Shri Digvijay Singh has already spoken about it and clarified the issue. I think there is nothing further to add in the matter.

 
 
Sd/-
(S.V. Ramani)
Secretary
Communication Deptt.,
AICC 


Indian National Congress
24, Akbar Road, New Delhi - 110011, INDIA
Tel: 91-11-23019080 | Fax: 91-11-23017047 | Email : connect@inc.in
© 2012–2013 All India Congress Committee. All Rights Reserved.
Terms & Conditions | Privacy Policy | Sitemap