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Shri Raj Babbar, MP, UP PCC President and Spokesperson AICC, addressed the media

श्री राज बब्बर ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि, आज एक बहुत ही संवेदनशील और गंभीर मसले के ऊपर मैं आपसे बातचीत करना चाहता हूं। उसके बाद जब कल उप कुलपति, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने जिस तरह से सफेद झूठ बोला है, गलतबयानी की है, मैं चाहता हूं कि देश को आपके जरिए इसकी खबर जरुर जानी चाहिए। आज सारे देश में शिक्षा संस्थाओं का, विश्वविद्यालयों का, IIT’s, तमाम ये Medical institute’s, इन तमाम संस्थानों को आज जिस तरह से RSSसीकरण किया जा रहा है, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघीयकरण का मतलब मेरा, जो बचपन में KG में जो बच्चों को ये तैयार करते थे पहली क्लास से, अब विश्वविद्यालयों में भी इस तरह का माहौल पैदा कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो ये है, RSS जिस सोच को बढ़ावा देता है, उस सोच की शुरुआत हो चुकी, पहले विपक्ष को खत्म करना, विपक्ष के ऊपर इस तरह के प्रहार करना कि विपक्ष defensive mode पर आ जाए, उसके बाद बुद्धिजीवियों को मारना, उनके अंदर भय पैदा करना और उसके बाद छात्र, और माफ करना उसके बाद पत्रकारों का समय आने वाला है। क्योंकि ये उनका एक मोडस ऑपरेशन हैं।चाहे वो हैदराबाद में रोहित वेमूला को फांसी पर चढ़ना पड़ा हो, चाहे चेन्नई में उन बच्चों के साथ जो हालात हुए और चाहे JNU में और अब BHU में।
 
मेरे ख्याल से इस बात को मैं लगातार देख रहा हूं कि चीफ सेक्रेट्री उत्तर प्रदेश और District Authority जो होती हैं, वो District Authority अपना सही बयान देती हैं, बयान लिखकर भेजती हैं मुख्य सचिव को, लेकिन उसके बाद में 3-4-5 दिन या हफ्ते भर के बाद वो बयान बदल जाते हैं। ऐसा ही गोरखपुर में हुआ, ऐसा ही फरुख्खाबाद में हुआ और ऐसा ही वाराणसी में होने जा रहा है, ऐसा लग रहा है मुझे। वाराणसी के कमिश्नर की जो प्राथमिक रिपोर्ट है, उस रिपोर्ट के मैं आपको चन्द शब्द सुनाता हूं, “ कमिश्नर ने सोमवार को मुख्य सचिव राजीव कुमार को भेजी अपनी प्रारभिंक जांच रिपोर्ट में कहा है कि “BHU प्रशासन ने पीड़िता की शिकायत को संवनेदनशील तरीके से नहीं संभाला, ना ही स्थिति को सही वक्त पर संभाला। इसी वजह से एक इतना बड़ा बवाल हुआ।“
 
ये वहाँ के कमिश्नर की रिपोर्ट है। BHU में हुए छात्रों के ऊपर ये जो कांड हुआ है, अगर इसका कोई जिम्मेदार है तो वो तीनों ऐजेंसी हैं, यूनिवर्सिटी का प्रशासन और उनके अधिकारी, जिला प्रशासन और उनके अधिकारी, पुलिस के प्रशासनिक और उनके अधिकारी। कल मैं TV पर देख रहा था उप-कुलपति ने जिस तरह से अपना बचाव मोड़ लिया है, मैं सिर्फ इतना ही कह सकता हूं कि किसी भी शिक्षा संस्थान के लिए इससे शर्मनाक कोई दिन नहीं होगा। मैं कल रात को TV देख रहा था और जिस तरह से उप-कुलपति बनारस यूनिवर्सिटी की गलतबयानी हो रही थी, जिस तरह का उनमे भरोसा और विश्वास था, मुझे देखते-देखते  शर्म आ रही थी कि किस तरह से वो बचाव मुद्रा में आ गए और किस तरह से वो अपनी दलीलें दे रहे हैं। यहाँ तक कह दिया कि महामना मदनमोहन मालवीय जी की मूर्ति को वहाँ पर नुक्सान पहुंचा रहे थे, इसलिए ये सब कुछ हुआ और इसलिए पुलिस ने वहाँ पर कार्यवाही की होगी। ये रिपोर्ट after thought है, ये रिपोर्ट 3 दिन के बाद लिखाई गई है।
 
उप-कुलपति जी ने कल एक ऐसा बयान दिया है कि जिसके बारे में, मेरे ख्याल से आप मीडिया के मेरे तमाम साथी बगले झांकना शुरु कर दिए होंगे, कि वहाँ पर किसी भी तरह का लाठीचार्ज नहीं हुआ है। मेरे पास में आपके ही द्वारा दिखाए गए वीडियो हैं, कुछ टीवी द्वारा लिए गए वीडियो हैं, आप चाहें तो मैं आपको दे सकता हूं और यहाँ पर उसकी आवाज सुना सकता हूं।
 
मैं चाहूंगा कि आप इसको जरुर देख लें। उप-कुलपति महोदय ने, जो आजादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, कि किसी यूनिवर्सिटी के 1000 विद्यार्थियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई हो। जब भी पुलिस में रिपोर्ट कराई जाती है या FIR होती है तो लिखा जाता है “अज्ञात लोग”, लेकिन उप-कुलपति जी की शह के ऊपर ये रिपोर्ट लिखी गई है - 1000 अज्ञात विद्यार्थी, ये FIR की रिपोर्ट है, FIR की कॉपी है। उप-कुलपति साहब ने यूनिवर्सिटी के अंदर जिस तरह से माहौल बनाया और जिस तरह से वहाँ पर अपने lawn में लोगों से बातचीत करते हुए कहा, कुछ उनके RSS  या भाजपा के साथी रहे होंगे, उनसे बात करते हुए कहा कि अगर एक छात्रा की शिकायत पर अगर हमने गौर करना शुरु कर दिया, तो यूनिवर्सिटी कैसे चलाएंगे? इससे ज्यादा असंवेदनशील अभिभावक कोई नहीं हो सकता। मैं फिर से वही बात दोहराना चाहता हूं प्रधानमंत्री महोदय, आपने जो नारा दिया था “बेटी पढाओ - बेटी बचाओ”, आपने किस तरह के लोगों के हाथ में बेटियों को दिलवा दिया। माँ – बाप ने अपने घरों से इन बच्चियों को भेजा हॉस्टल में और वो भी बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में और उसका अभिभावक जो है, उप-कुलपति है, और अगर उप-कुलपति इस तरह की भाषा बोलता है तो शायद आपने अपने नारे को बदल दिया है कि – “बेटी पढ़ाओ और बेटी पिटवाओ” - शायद ये अब नारे का मतलब होगा। इससे ज्यादा गंभीर और क्या बात हो सकती है? तमाम जितनी भी घटनाएं कैंपस के अंदर हुई हैं, उसके लिए एक बहुत बड़ा इन्होंने तगमा छेड़ा है कि न्यायिक जांच होगी। अगर दूध का दूध और पानी का पानी करना है, तो मेरी मांग है, जो मैंने वहाँ भी की है और मैं यहाँ भी कहूंगा, कि एक तमाम ऑल पार्टी सांसदों की एक कमेटी जानी चाहिए, वरिष्ठ सांसद जाएं, सभी पार्टियों से जाएं और इस घटना की जांच करें, क्योंकि ये घटना मामूली नहीं है। किसी भी यूनिवर्सिटी, किसी भी भविष्य का ये सवाल है। जिस तरह से यहाँ पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघीयकरण किया जा रहा है, तमाम यूनिवर्सिटियों के अंदर एक भय का माहौल पैदा किया जा रहा है और वो ऐसा भय जिसमें जो आवाज उठाएगा, वो पिट कर जाएगा, चाहे वो बुद्धिजिवी हो, चाहे विद्यार्थी हो, चाहे राजनेता हो। इस तरह के माहौल के अंदर CBI, ED और पुलिस के डंडों के माहौल के बीच में आज विद्यार्थी भी घेराव में आ गया है और जो भी जांच हो, उस जांच तक इस उप-कुलपति को, इससे मुझे नहीं लगता कि आपको कहीं सच जानने को मिलेगा, इस उप-कुलपति को तब तक के लिए हटा देना चाहिए, इसके उप-कुलपति रहते हुए सही जांच नहीं हो सकती।
 
एक प्रश्न पर कि UP सरकार ने इस घटना के न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं और उप-कुलपति को छुट्टी पर भेजने के लिए कहा है, क्या आप इससे संतुष्ट हैं, श्री बब्बर ने कहा कि ये पहला जो है उसके लिए मैं बिल्कुल संतुष्ट नहीं हूं क्योंकि जब न्यायिक जांच जब रखी जाएगी, तब जाँच इन अधिकारीयों का जो तरीका है, उसी से होगी, और इन्हीं के अधिकारी इन्हीं की जांच - ये जांच सही तरीके से नहीं हो पाएगी। जांच अगर हो, तो जरुरी है ऑल पार्टी सांसद यहाँ से जाएं और जांच करें और अपनी एक रिपोर्ट दें केन्द्र सरकार को क्योंकि ये केन्द्र का मसला है प्रदेश का मसला नहीं है। ये मार-पीट यूनिवर्सिटी के अँदर हुई है, यूनिवर्सिटी के बाहर जो हुई है उसकी जांच प्रदेश सरकार कर सकती है लेकिन जो अंदर हुई है वो केन्द्र के अधिकार में आती है, क्योंकि यूनिवर्सिटी केन्द्र की है और कुलपति राष्ट्रपति हैं और इसके बारे में अगर कोई जांच होगी तो वो केन्द्र में और केन्द्र से अगर होती है तो वो सांसदों के द्वारा होनी चाहिए। ऐसे उप-कुलपति को हमेशा के लिए छुट्टी पर भेज देना चाहिए और किसी भी शिक्षा संस्थान में दुबारा से घुसने नहीं देना चाहिए।
 
इसी संदर्भ में श्री बब्बर ने कहा कि, मुझे बहुत अफसोस के साथ ये कहना पड़ता है कि वहाँ पर प्रधानमंत्री का कार्यक्रम था या नहीं था, लेकिन सांसद बनारस का उस दिन बनारस में था। और सांसद का ये फर्ज बनता है कि अगर वहाँ पर जिस दिन ये लाठी चली, उस दिन Daughters Day था, 24 सितबंर को रात के 12 बजे के बाद में लाठी चली है, बच्चों को पीटा गया है, लड़कियों को पीटा गया है और सारी दुनिया के अंदर, मैं दावे के साथ कह सकता हूं, प्रधानमंत्री जैसे हाथ हिलाने के लिए अपने स्वागत कराने के लिए गाड़ियों से उतर जाते हैं, मैंने उनको यहाँ भी देखा है कि जब अपने पार्टी कार्यालय जाते हैं तो सड़क पर उतर कर पैदल चलना शुरु कर देते हैं। अगर एक बार इन बच्चियों की तरफ पैदल चले जाते तो मैं य़कीनन कह सकता हूं कि इस देश की बेटी अपने प्रधानमंत्री को देखती कि उसके पास चल के आ रहा है, उसके पिता समान हैं, लेकिन पिता की भूमिका शायद वो नहीं जानते, सांसद पिता की भूमिका नहीं निभाना चाहता था बनारस की, इसलिए पिता की भूमिका में ना आकर किस तरह से बनारस का सांसद गलियों में भाग कर गया है, मैं इतना ही कहना चहूंगा प्रधानमंत्री ना होते तो मैं ये कहता कि एक भगौडे की तरह भाग कर गया है।
 
रोहिंग्या मूसलमानों के भारत आने पर वरुण गाँधी द्वारा दिए गए वक्तव्य पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री बब्बर ने कहा कि रोहिंग्या पर तो टिप्पणी इसलिए नहीं दे सकता क्यूंकि विदेश नीति क्या है सरकार की, अभी तक हमको भी समझ नहीं आई है और विदेश नीति को लेकर मैं नहीं कहूंगा लेकिन मैं इतना जरुर कहना चाहूंगा कि किसी भी समुदाय या किसी भी चाहे बंगला देश से आया हुआ हिंदू हो या पाकिस्तान से आया हुआ हिंदू हो, या किसी भी और देश से आया हुआ किसी और बिरादरी का, किसी और धर्म का, किसी और मजहब का हो, वो सभी लोग आतंकवादी नहीं हो सकते। उनमें कुछ लोग जरुर होंगे। उसके बारे में मेरे पास ना कोई सुबूत है, ना कोई टिप्पणी है, ना मेरे पास कोई बात है। रोहिंग्य़ा विदेश नीति का एक हिस्सा है और विदेश मंत्री ने अभी तक तो UN में अच्छा बोला है, अगर हो सके तो उनसे इसके बारे में भी अच्छा बुलवा लीजिए।
 
 
 
Sd/-
(S.V. Ramani)
Secretary
Communication Deptt.,
 AICC

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