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Highlights of the press briefing of Shri Anand Sharma, MP and Senior Spokesperson

 

श्री आनंद शर्मा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि, पिछले कल हमारे सहयोगी श्री कपिल सिब्बल जी ने प्रैस से बातचीत की थी और ये खुलासा किया था कि भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष श्री अमित शाह जी के सुपुत्र, जय शाह, की कंपनी ने किस तरह अलग-अलग सोर्सिज(sources) से अलग-अलग लोगों से, संस्थाओं से कर्जे लिए और बहुत बड़ी मुनाफाखोरी एक बरस के अंदर की। जाहिर है कुछ सवाल उठते हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी, अमित शाह जी और भारतीय जनती पार्टी अपनी पारदर्शिता, सफाई, भ्रष्टाचार-विरोधी नीतियाँ, कालेधन से लड़ाई, ये रोज दावे प्रधानमंत्री जी, अमित शाह जी और उनके तमाम बड़े मंत्री करते हैं। 

 

प्रश्न ये है कि जिस कंपनी को 2013-14 में नुकसान हुआ हो और 2014-15 में वो मुनाफे में गई हो करीब 18 हजार 728 करोड़ रुपये के, जब पूरा उनका टर्नओवर 50 हजार रुपये था, उससे पहले का ब्यौरा आपके पास है, ना कोई बड़ा टर्नओवर था, ना कोई बड़ा नुकसान था, तो 18 हजार रुपये कमाके, 50 हजार के टर्नओवर से अगले बरस एकदम से 80 करोड़ का टर्नओवर, टेंपल इंटरप्राईसिज प्रा. लि. का। उसमें उनको कर्जे भी मिले, 15 करोड़ से ऊपर, राजेश खंडवाला की फाईनेंशल कंपनी से। तो 16 हजार गुना टर्नओवर बढ़ना, ये उद्योग जगत के इतिहास में पहली ही कंपनी होगी भारत में, और इसकी जानकारी मिलनी चाहिए कि कैसे और ऐसे प्रतिभाशाली उद्यमी हैं, जो उद्योग जगत में हैं, कारोबार जगत में हैं, जो एक साल के अंदर 16 हजार गुना आमदनी बढ़ाते हैं और उस आमदनी में कई तरह से पैसे आए। जो कंपनी केवल स्टोक और शेयर में कारोबार करती है, अनसिक्योर्ड (unsecured) कर्जा लेती है, उसका इस टर्नओवर में 80 करोड़ में, 51 करोड़ फोरन कमाई हैं, बाहर से जो कमाई हुई, वो कौन सी कमाई थी? 51 करोड़, जिस कंपनी ने उससे पहले शून्य आमदनी की हो, बाहर के मुल्कों से, बाहर के देशों से, एक ही बार में एकदम से 51 करोड़ बाहर से कारोबार का कैसे आया? कौन सा ऐसा कारोबार था और कौन सी ऐसी सोच-समझ, बिजनेस मॉडल था, जो पहले इनके पास नहीं था, वो अचानक आया? इसका खुलासा होना चाहिए, देश में लोग संघर्ष कर रहे हैं, स्टार्ट-अप में संघर्ष कर रहे हैं, कर्जे नहीं मिल रहे हैं, नौजवानों को रोजगार नहीं मिल रहा, अगर इतनी यौग्यता घर के अंदर है, भारतीय जनता पार्टी जी के, तो कृपया करके ये बिजनेस मॉडल भारत के नौजवान जो entrepreneur हैं, उद्यमी हैं, उनको जरा बता दें कि इस तरह से ये होता है, तो सारे देश में लोगों की तकलीफ दूर हो जाएगी, जो आज नौजवान हताश हैं, शायद उसको कोई सूरज की कीरण दिखेगी कि इस तरह से काम करो तो इतना पैसा भी बन जाएगा और नौकरी की कोई जरुरत ना पड़े।

 

भारतीय जनता पार्टी का इसमें आपत्ति करना अजीब बात है। पिछले कल, मंत्री पीयूष गोयल जी ने पत्रकार सम्मेलन किया। वो सरकार के मंत्री हैं या जय शाह के प्रवक्ता हैं, ये स्पष्ट होना चाहिए। भारत सरकार के मंत्री, उनकी तनख्वाह सरकार देती है, टेंपल इंटरप्राईसिज नहीं देती और ये मंत्री थे उस विभाग के, जिसने इनकी दूसरी कंपनी कुसुम फिनसर्व, जिसमें 60% हिस्सा जय शाह का है और उस कंपनी में भी लगभग 5 करोड़ का अनसिक्योर्ड (unsecured) कर्जा लिया हुआ है, उसका भी कारोबार ट्रैडिंग एंड स्टोक का था, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी के पास फाईलिंग है, अचानक वो रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) में चले गए, वो भी रतलाम - मध्यप्रदेश में जहाँ बीजेपी की सरकार है, हम कोई आरोप नहीं लगा रहे हैं, कहीं भी जाकर लगाएं भारतवर्ष में। पर उसके लिए यहाँ कंपनी का जो बिजनेस है, वो स्टोक और शेयर में है, उसको IREDA 10 करोड़ 35 लाख रुपये कर्जा देती है। ये सूची आज सरकार जारी करे कि IREDA ने कितने ऐसे entrepreneur को, उद्यमों को, जिन्होंने पहले कभी काम ना किया हो और कंपनी दूसरा व्यापार करती है, व्यवसाय करती हो, उनको क़र्ज़े दिए, 10 करोड़। ये सूची जारी होनी चाहिए। 

 

कल ये कहा गया कि क्या गलत बात है अगर एक स्टार्ट-अप कंपनी, ये स्टार्ट-अप कंपनी तो है नहीं, ये गलत बयानी कल की गई, केन्द्र के मंत्री के द्वारा। आप जो रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी के पास फाईलिंग है, उसमें आप कहते हैं कि ट्रैडिंग इन स्टोकस है और सरकार के मंत्री कहते हैं कि स्टार्ट-अप कंपनी है, इसलिए IREDA ने ये 10 करोड़ 35 लाख रुपया दिया। 

 

और तीसरी बात कल कही गई, पर दोहराना जरुरी है - कालूपुर कमर्शियल कोऑपरेटिव बैंक, गुजरात में है, उसने 25 करोड़ रुपये का कर्जा दिया, इसी कंपनी को कुसुम फीनसर्व को, जो इनके परिवार की कंपनी है और 25 करोड़ के कर्जे के लिए 6 करोड़ 20 लाख का कोलेट्रल दिया गया, दो संपत्तियों को गिरवी रखकर। अब जाहिर ये कहेंगे कि हमने संपत्ति गिरवी रखकर कर्जा लिया तो क्यों इसकी आलोचना होती है, क्यों सवाल उठता है? सवाल इसलिए उठता है कि रिजर्व बैंक की गाईडलाईन हैं, बैंकों को, फाईनेंशियल सर्विसेज को, कोऑपरेटिव बैंक को, वो अनुमती नहीं देते हैं कि अगर कोई कोलेट्रल बराबरी का ना हो, कोलेट्रेल ज्यादा हो तो ठीक है, पर एक चौथाई कोलेट्रेल पर आप 25 करोड़ का कर्जा नहीं दे सकते, ये अपने आप में RBI का और कानून का उल्लंघन होता है। पर एक संपत्ति तो इनकी अपनी थी, अमित शाह जी की, अमित शाह जी की कंपनी, उन्होंने संपत्ति गिरवी रखवाई, उसमें किसी को कोई आपत्ति, कोई कष्ट नहीं है। दूसरी जो संपत्ति, जिसका कोलेट्रेल दिया गया, जमानत के रुप में, उसकी मल्कियत यशपाल चुदासमा की है। यशपाल चुदासमा, इनका नाम सार्वजनिक रुप में तब जाना गया और थोड़ी जो इनकी जान-पहचान हिंदुस्तान के अखबारों से हुई, लोगों से हुई कि कौन व्यक्ति हैं, क्योंकि ये श्री अमित शाह जी के साथ सह-अभियुक्त थे (co-accused), फर्जी एंनकाउंटर सोहराबुद्दीन के केस में, जिसमें अमित शाह जी बरी हुई, सह-अभियुक्त दोनों थे। तो कहीं ना कहीं तो रिश्ता अच्छा है, कि बेटे को कर्जा लेना है, वो भी कोऑपरेटिव बैंक से, एक संपत्ति अमित शाह जी के कोलेट्रेल में रखी जाए, दूसरी संपत्ति यशपाल चुदासमा जी की रखी जाए। 

 

तो ये सवाल उठा गए हैं कल से, इन सवालों का जवाब चाहिए। देश की जनता को यह पता होना चाहिए कि वो कौन सा कारोबार हुआ था, कौन सी कमोडिटी का आयात-निर्यात हुआ था, किस-किस देश में हुआ था, किस देश से कितना पैसा आया? कितना जो रिजर्व बैंक को इन्होंने घोषित किया फोरन एक्सचेंज, कितना उस पर टैक्स लगा और अगर 51 करोड़ रुपये की आमदनी बाहर से भी हो गई और इतना अच्छा कर्जा भी मिल गया, तो अचानक एकदम से पिछले साल अक्टूबर में कंपनी बंद कर दी, एक करोड़ 40 लाख का घाटा हो गया, समझ में नहीं आई बात। एक तरफ तो इतनी अच्छी कुशाग्र बुद्धि, कि 16 हजार गुना टर्नओवर बढ़ जाए, 51 करोड़ बाहर से आ जाए और फिर कंपनी एकदम से बंद कर दी, नोटबंदी से 4 हफ्ते पहले। ये खुलासा होना चाहिए सारी बातों का। कहाँ गया जो बाहर का पैसा था? ये किसी भी सोच-समझने वाले व्यक्ति के लिए हैरत की बात होगी। ये कोई आरोप-प्रत्यारोप की बात नहीं, वो कहें कि पुत्र को अधिकार है कारोबर करने का, हम कहते हैं पुर्ण अधिकार है। पर अगर कारोबार में एक इतनी बड़ी ऊछाल, पिता के प्रभावशाली पद पर आने के बाद हो और सरकार की तरफ से कर्जे हों, बैंक की तरफ से कर्जे हों, तो सवालिया निशान तो खड़े होंगे। 

 

भारतीय जनता पार्टी को जरा अपनी स्मरण शक्ति में देखना चाहिए, याद करना चाहिए कि इन्होंने क्या-क्या सवाल उठाए थे। अगर उनको अधिकार सवाल उठाने का रहा है, आज के प्रतिपक्ष को और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को, तो हमारा ये दायित्व बनता है ये सवाल उठाने का, देश की जनता की तरफ से ताकि ये सारी बात का खुलासा हो। अगर कोई गलत बात नहीं है, ठीक है, अगर कहीं कोई गलती, त्रुटि हुई है, वो भी सामने आ जाए। पर ये नहीं कह सकते कि ये प्रश्न उठाया नहीं जाएगा। पहले अगर कभी सवाल उठे, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्षों पर, माननीय लालकृष्ण आडवानी जी सम्मानित हैं, जैन हवाला के समय सवाल उठाया गया, उन्होंने त्याग पत्र तुरंत दे दिया, संसद से भी दे दिया। बंगारु लक्ष्मण जी इनके अध्यक्ष थे, दुर्भाग्यपूर्ण कैमरे पर पैसा लेते हुए फोटो खिंच गई, उनको जाना पड़ा, मुकदमा चला। नितिन गड़करी जी, उनकी कंपनियों के बारे में सवाल उठे थे, वो मुकदमा नहीं चला था, उन्होंने तुरंत त्यागपत्र दे दिया था। गड़करी जी अभी, इनके मंत्रीमंडल में कैबिनेट मंत्री हैं। 

 

हमारी ये मांग है प्रधानमंत्री जी से, बहुत ज्यादा बोलते हैं प्रधानमंत्री जी, रोज बोलते हैं, हर विषय पर बोलते हैं, इस विषय पर अपनी चुप्पी तोड़ दें आज और एक जांच आयोग का ऐलान करे दें,निष्पक्ष जांच हो और जांच की अवधि के समय तक, ताकि जांच प्रभावित ना हो, अमित शाह जी अपने पद से हट जाएँ। वो पद पर बने रहें और जांच हो, वो संभव नहीं। पद से हटने के बाद ही सही जांच होगी। 

 

Shri Sharma said we want to make it absolutely clear that the BJP, the Prime Minister and its Party President have always happily embraced hypocrisy, double standard and double speak. Valid questions have been raised about windfall gains and income increase in the private company owned by Shri Jai Shah, Temple Enterprises Pvt. Ltd. which was running in loss in 2013-14 and even in 2014-15 it had a very nominal profit with a turnover of Rs. 50,000, suddenly multiplies the turnover by 16,000 times to Rs. 80 Crores in a matter of months of which over Rs. 15.75 crore is the unsecured loan from KIFS of Rajesh Khandwala, Rs. 51 crores are the foreign earning. A company which is dealing in stocks and shares, suddenly gains the expertise and wisdom, without questioning the right to engage in any trade, that you have a global trade and foreign income of Rs. 51 crores only during a particular window and then suddenly the company is folded up. It is an amazing story, that you go up from Rs. 50,000 revenue to Rs. 80 crores, earn Rs. 51 crores in foreign income and then suddenly say I have got losses of over Rs. 1 crore and the company is closed. Similarly, about the other company which I have referred to and we will be issuing a Press Release also, that is again a family owned company - Kusum Finserv – it is a Limited Liability Partnership Company – 60% stake holding is of Shri Jai Shah, it also has unsecured loan of almost Rs. 5 crores (Rs. 4.9 crore) unspecified from whom, that should also be made public - Who gave? 

 

The second issue is of the loan which was given by IREDA, for Renewable Energy Project in Ratlam in Madhya Pradesh. There must be sound business reasons, but from Stocks and Shares to Wind Energy, there is the filing before the Registrar of Companies which says otherwise, needs some explanation. And the loan from the Kalupur Commercial Co-operative Bank is in violation of the RBI rules and guidelines because the collaterals are only Rs. 6 crores 20 Lakhs and that too in the form of two properties and the two properties – one belongs to Shri Jai Shah’s father, Shri Amit Shah and it is good, a father has every right to give a collateral of his property or family property for his son ‘s business. We are not questioning, I want to make that clear. But the second collateral is given by Shri Yashpal Chudasama and the question is that Shri Yashpal Chudasama was a co-accused along with Shri Amit Shah in Sohrabuddin and Kausar Bi false encounter case in which Shri Amit Shah was acquitted. The fact is that they were co-accused and the fact is that he gives a collateral. There is no legal bar on his giving a collateral, but these coincidences and connections raise some bona fide questions which should be answered. We want to make it absolutely clear to the Prime Minister and to the BJP - first it is not for a Union Cabinet Minister to act as a Spokesman or a Defence Counsel. He was a Minister when IREDA had given the loan. That is why we have said, release the list of all those beneficiaries – Start-up companies who got a loan from IREDA of Rs. 10 crores and above whereas the listing before the Registrar of Companies did not mention that as a core business or as a Start-up, because the ROC filing is important. Normally if a Start-up or a genuine Start-up goes for IREDA loan, they will see that whether you are in the core business or not, whether you have the knowledge, what is your filing, what is the structure of the company, even for a Start-Up. But here, what was the scrutiny before diversification sanctions and then the Minister says that a defamation case will be filed. This is not defaming, this is asking questions. Yes, the country would like to know and the young people in particular, the young entrepreneurs and they must share this great Business Model when Shri Piyush Goyal is the same Minister, who two days before, made one of the most ridiculous statements ever heard that - job losses is good news, this means that young people are creating their own jobs. He is on record. Mr Minister, share this business model with those who are creating their own jobs. This should be revealed. As we have said, all the details of the foreign earning, because the country’s trade is collapsing for the last three years, if you look at the numbers of India’s International Trades or International Exports, which were there when UPA left, this Government has not been able to keep that secure. At a time when global trade has increased, we went down and we are still below Rs. 300 Billion, when we left at Rs. 326 Billion only a merchandise exports, whereas we should have gone up to Rs. 450 crores. That is why I am requesting, that this Business Model must be shared and perhaps this wisdom should have been given also to the Director General of Foreign Trade and to then Commerce and Industry Minister of State who is now the Defence Minister, that this is Business Model if you adopt it, you can actually take India’s exports to Rs. 1 Trillion US Dollars from Rs. 326 Billion when UPA left. So, that was again exclusive Model, only for one enterprise that is why we are asking this question. 

 

प्रधानमंत्री जी ने किसी पर भी आज तक जो बातें उठी हैं, जो कहते हैं कि ‘मैं ना खाऊँगा ना खाने दूंगा’, प्रधानमंत्री जी ने एक भी बार कोई कार्यवाही नहीं की और ना ही कोई उस पर टिप्पणी करी है। बिरला-सहारा डायरी, जो सार्वजनिक जानकारी है, प्रधानमंत्री जी का अपना उल्लेख है, बार-बार उनका नाम आया है, GSPC का स्कैम है गुजरात का 20 हजार करोड़ का, आनंदी बैन पटेल की सुपुत्री अनार पटेल का गुजरात का लैंड स्कैम, जिस पर हमने जांच की मांग की थी। ललित मोदी देश से बाहर भाग गया, उसको लाने की कोशिश नहीं करते, उसमें तमाम इनके बड़े लोगों के नाम हैं, चाहे इनकी राजस्थान की मुख्यमंत्री के हैं, मध्यप्रदेश का व्यापाम स्कैम है, अरुणाचल प्रदेश में कीरण रिजूजी का नाम उल्लेखित है, क्योंकि मंत्री हैं, हम आरोप नहीं लगा रहे हैं, खुलासा तो होना चाहिए, जवाब दिए जाने चाहिएं, स्पष्टीकरण दिए जाने चाहिएं। राजस्थान में माईनिंग का घोटाला, 45 हजार करोड़ का है। जो स्पैक्ट्रम, जो टेलिकॉम का है उसमें अंडर रिक्वरी का, वो भी 45 हजार करोड़ है। पनामा पेपर सरकार के पास है, कोई FIR नहीं हुई, दूसरे देशों में तो कार्यवाही हो गई, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को जाना पड़ा, नवाज शरीफ जी को। ये क्या कर रहे हैं प्रधानमंत्री? सवाल ये है कि इन्होंने कार्यवाही कोई भी नहीं की और सारा टाईम कहते हैं कि मैं लड़ रहा हूं बेईमानी के खिलाफ, कालेधन के खिलाफ, तो क्या प्रधानमंत्री जी को किसने मना किया हैं? छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के पुत्र का नाम है उसमें, क्या उनको नोटिस गया, कोई FIR हुई, क्यों नहीं हुई? सृजन स्कैम और उसके अलावा एक लंबी सूची हम आपको दे देंगे और ये सूची बढ़ती जा रही है। 

 

तो पहले जो प्रधानमंत्री जी और भारतीय जनता पार्टी, हर छोटी सी बात पर जांच की मांग करती थी, कार्यवाही की मांग करती थी, इस्तीफे की मांग करती थी, नरेन्द्र मोदी जी के कार्यकाल में इतने गंभीर आरोप इनके वरिष्ठ नेताओं पर, मुख्यमंत्रियों पर, क्यों इन्होंने उनके खिलाफ कार्यवाही नहीं की, क्यों त्यागपत्र नहीं दिए? इसलिए हमने कहा कि इनके दोहरे मापदंड हैं, दोहरे पैमाने हैं, दोहरी भाषा है, जुबान दोहरी है। एक पैमाना, एक मापदंड इनके विरोधियों के लिए ये रखते हैं और अपने लिए वो मापदंड अलग है और वो मापदंड है - जो मर्जी करो, मैं बोलता रहूंगा, आप करते रहो। यही मुझे आज इस विषय में कहना था।

 

On the reaction of the Congress Party on the statement of Shri Piyush Goyal that all loans were obtained at the commercial rates and after securing the godown, Shri Sharma asked if Shri Piyush Goyal is the Business Manager of Shri Jai Shah. Is he his Defence Counsel and a Spokesman or a Cabinet Minister of the Government of India? That would be my question. Why Shri Piyush Goyal has all these details of his business when his own Ministry had sanctioned this loan. It is a bona fide question now. He knows everything what was in the godowns also. What was given as collaterals? What we are saying is, please come out and equally surprising it is, that last evening statement - normally I don’t comment - but the serving Additional Solicitor General of the Government of India says that he has been approached and he will, of course it is his right as a Lawyer, to take permission from the Government, but they say the permission was sought for and given on the 6th. This wild story came out now. So, in anticipation, the Additional Solicitor General of the Government of India applies for permission from the Government of India, to represent a private entity i.e. Temple Enterprises Pvt. Ltd and Shri Jai Shah – son of Shri Amit Shah – in this case and the permission is granted on the 6th of October. Kindly release when it was applied for and when the permission was given. This means that the Government was in the know and they were preparing their counters and their defence. They have every right to do so. So, the Minister had checked all the account books, he has come out with the statement and I repeat again that he is the same Minister who had made astounding statement insulting the unemployed youth of the country, that it is a very good sign that people are losing jobs. So, you have to now to judge these people.

 

Shri Sharma further said, my question is that we are actually flummoxed that this issue has not come in public domain, no questions have been raised, no allegations have been levelled, and if questions were raised, giving advice is a different thing, to seek permission from the Government of India to represent before the publication of this story, you are already applying for permission and given permission to file cases against the Journalists. Its timing is important. Let them explain, when it was published and when this permission was given, then you can put two and two together, whether it was well before or whether it is just coincidence. 

 

To a related question, Shri Sharma said Government lawyers have never been brought in. Even unfortunately when there were some questions raised or lose allegations made against some Ministers in the past, the Government Advocates, i.e. the Attorney General, the Solicitor General and the Addl. Solicitor General never moved in. Give me one instance where they sought permission and where they defended.

 

Shri Sharma said that he has to make one quick statement or a response to Finance Minister Shri Arun Jaitley’s unsolicited advice to the Indian National Congress, that we should select our Leader looking at the capability and potential. Well, we as a Party, take our conscious, considered decisions about our Leader. We have never been prescriptive to the BJP, whom they have chosen in the past and the present incumbent as their President. But my query would be – was Shri Amit Shah chosen by the BJP as the Party President for his image, intellect, integrity and humane values?


श्री शर्मा ने पुन: कहा कि ये तो प्रश्न उठता है कि अगर योग्यता और क्षमता के आधार पर कांग्रेस को सुझाव दिया गया है वित्त मंत्री के द्वारा, कि योग्यता देखें, क्षमता देखें, अपने नेतृत्व तय करने में। पहले तो अरुण जेटली जी ने, अभी मंत्री है मोदी जी की सरकार में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में तो शामिल नहीं हुए, वहीं हैं। यहाँ शामिल हों तो ये बताए कि हमें क्या करना है पार्टी के अंदर। हमने अपनी तरफ से कभी नसीहत नहीं दी, वो दूसरा दल है, जिसको भी चुनें, चाहे उन्होंने गडकरी जी बनाए थे, चाहे बंगारु लक्ष्मण जी बनाए थे, अब अमित शाह जी हैं। यही मैंने कहा कि, उनके क्या मापदंड क्या थे तय करने में, उऩको बनाने में? क्या वो छवी थी, बुद्धिमता थी, ईमानदारी थी और इंसानियत से जुड़े ऊँचे उसूल या आधार थे, यही प्रश्न है।

 

On another question on the recommendations for changing the names of BHU and AMU, Shri Sharma said did the Congress Party tinker with these Universities. It is a strange question. We were in Government for over 65 years, did we change, were these questions ever raised? That is the position. Let them come before the Parliament. 

 

On the question of the protest by NSUI students on the tracks of the metro on the price hike and that the Yellow Line services of Metro have been affected because of the protest, Shri Sharma said since you have just told me, I will check because I am not at all aware. Protest should be there if there is a fee hike, but in what manner. Young people are young people, when the protests are there. Let us not forget that the present day prime Minister as the Chief Minister of Gujarat had led a massive ‘Morcha’ against the GST and for demanding MSP hike for cotton and he had brought Ahmedabad to a standstill for days because he was the Chief Minister and the Police could not remove him. 

 

एक प्रश्न पर कि आपने इतने मामले याद दिलवाए भाजपा को बार-बार कि उन्होंने क्या-क्या प्रश्न उठाए थे, क्या आपका इशारा रॉबर्ट वाड्रा मामले पर था, श्री शर्मा ने कहा कि मैंने उस पर नहीं,इन्होंने तो हर चीज पर कहा था, कौन सा नहीं था। जब हमारी सरकार थी, उस समय जो इन्होंने हर विषय में, जो भी कोई बात आती थी सामने, उस समय की सरकार ने तो जो जांच कराई थी। प्रधानमंत्री जी हमारे ऐसे थे सज्जन व्यक्ति, कि अगर कहीं सवाल भी उठाया गया, चाहे गलत था, अगर कोई बात सामने आती, उसके ये मायने नहीं कि कोई व्यक्ति दोषि है या आरोपी है, वो तो अदालत तय करती है। पर अगर ये सवाल उठाया गया और विपक्ष ने मांग करी, हमारी सरकार ने पारदर्शिता को और ऊँचे सिद्धांतो को सामने रखते हुए मंत्रियों से आग्रह किया कि आप त्यागपत्र दें दे। हालांकि कोई मंत्री उसमें आरोपित नहीं रहा। कांग्रेस का कोई ऐसा कोई मंत्री नहीं जिसमें आज भी साढ़े तीन साल हो गए हैं, कि कोई ऐसी बात हो कि उन्होंने कोई गलत काम किया हो। तो ये त्यागपत्र क्यों नहीं कराते हैं, हमारी तो सीधी छोटी बात है। 

 

एक सवाल कि भाजपा कहती है कि त्यागपत्र की परम्परा कांग्रेस में है,UPA में है, भाजपा में नहीं है, श्री शर्मा बोले, इनके यहाँ परंपरा यह है कि चोरी करो और जांच ना करो। त्याग पत्र भी ना दो। निर्लजता से बैठे रहो, ये परंपरा है इनकी। 

 

एक अन्य प्रश्न पर किस तरह का जांच की मांग कर रहे हैं, क्या भाजपा अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग करते हैं, श्री शर्मा ने कहा कि इस्तीफा नहीं, उनको हट जाना चाहिए। जो आडवाणी जी ने किया,गड़करी जी ने किया, तो इनको भी करना चाहिए। या इनके लिए नया मापदडं है? जो आडवाणी जी पर और गड़करी जी पर और बंगारु लक्ष्मण जी पर था। पर मैं आड़वाणी जी और गड़करी जी की बात करता हूं। गड़करी जी की तो अभी की ताजी मिसाल है ना। गड़करी जी से सलाह-मशवरा करें जाकर, वो उनको बताएंगे कि कैसे लिखा जाता है त्यागपत्र।

 

इसी संदर्भ में एक सवाल कि पार्टी पद से इस्तीफ़ा दे, या राजनीति से, श्री शर्मा ने कहा कि पार्टी के अध्यक्ष हैं, सत्ताधारी दल के, वो सरकार चलाते हैं, देश चलाते हैं, देश को सारा उपदेश देते हैं,प्रधानमंत्री जी और अमित शाह जी, तो इसलिए ये अनुसरण करें, जो उनकी परंपरा है भाजपा की, कि अगर अध्यक्ष के बारे में इस तरह की कहीं कोई बातचीत आ जाए, तो गड़करी जी का भी अपना तो नहीं था न, कोई कंपनी थी, परिवार के सदस्य थे, कोई कर्मचारी थे, अगर वही भाजपा गड़करी जी को हटा सकती है, गड़करी जी पर कोई आरोप नहीं है, कोई उन पर मुकदमा नहीं चला, मैं स्पष्ट कर दूं। पर उन्होंने एक बात को सामने रखते हुए, कि अगर ये मर्यादा की बात है, प्रश्न उठ गया है, तो अध्यक्ष पद पर ना रहूं। हम उनसे मांग नहीं कर रहे हैं, हम तो कह रहे हैं कि एक ही दल में है ना, गड़करी जी भी उसी पार्टी में है, आडवाणी जी भी उसी पार्टी में हैं। हाँ देखिए उसी से पता लगेगा कि प्रधानमंत्री जी के शब्दों में कितना सच्चाई है। 

 

मणिशंकर अय्यर के बयान पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री शर्मा ने कहा कि ठीक है, बीजेपी में काफी लोग सवाल करते हैं, यशवंत सिन्हा जी और अपने अरुण शोहरी जी, तो उनके बहुत सवाल बहुत उठ रहे हैं। 

  

एक अन्य प्रश्न पर कि जब नीतीश कुमार जी से जय शाह मामले के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनको इसकी जानकारी नहीं है, श्री शर्मा ने कहा कि अब तो वो गठबंधन में साथ हैं ना, तो दोहरे मापदंड गठबंधन वालों पर भी लागू होते हैं। नीतीश कुमार जी पर भी अब वही दोहरे पैमाने लागू हो गए। जब भाजपा के खिलाफ थे तो मापदंड अलग था, अब मजबूरी में अब उनको मालूमात होगी नहीं, अगर वो बोलेंगे तो अमित शाह जी दरवाजा दिखा देंगे।  

 

एक अन्य प्रश्न पर कि UGC कमेटी ने सिफारिश की है बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी एवं अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नाम बदलने के लिए, क्या कहेंगे, श्री शर्मा ने कहा कि इस पर प्रधानमंत्री को बोलना चाहिए। बनारस का वो प्रतिनिधित्व करते हैँ। अभी पहले वहाँ पर बनारस गए थे, तो बच्चों के साथ क्या हुआ, छात्रों के साथ, सबको मालूम है। विश्वविद्यालय ये पुराने हैं, ऐतिहासिक हैं और इनकी आधारशिला जब रखी गई थी, किन लोगों ने रखी थी, शिक्षा के प्रसार के लिए और दोनों विश्वविद्यालयों का अपना महत्वपूर्ण योगदान है। और भारत का संविधान भी ये अनुमति देता है, शिक्षा में, अगर आप अल्पसंख्यक इन्सटिट्यूशन हैं, एजूकेशनल इन्सटिट्यूशन हैं, उसका भारत का संविधान भी अनुमति देता है। तो इस तरह की सिफारिशें अगर आ रही हैं तो कहीं ना कहीं सोच है, सरकार से जुड़े लोगों की, इसलिए प्रधानमंत्री जी ये स्पष्ट कर दें, बनारस वालों को बता दें कि अब ये नाम नहीं रखेंगे, और संसद को आकर बताए कि क्यूँ नहीं रखेंगे। अभी तो ये सिफारिश है, इस पर हम क्या कह सकते हैं?   

 

एक अन्य प्रश्न पर कि गुजरात हाई कोर्ट ने गोदरा कांड पर फैसले दिया है, श्री शर्मा ने कहा कि उसमें हम टिप्पणी नहीं करते, ये हाईकोर्ट के फैसले हैं।  

 

गृहमंत्री के बयान पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री शर्मा ने कहा कि गृहमंत्री ने कहा हैं ना, हम तो मंत्री नहीं, पूर्व मंत्री हैं। गृहमंत्री की अपनी शक्ति अगर कैबिनेट में बढ़ जाए तो अच्छा होगा।  

 

Sd/-

(S.V. Ramani)

Secretary

Communication Deptt. 


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